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अंतरिक्ष की ओर बस्ती की बेटी अनुश्री के कदम

Tue, 11 Aug 2020 11:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 11:33 PM IST
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Daughter Anushree's step towards space
नासा में अनुश्री - फोटो : BASTI
अंतरिक्ष की ओर बस्ती के बेटी अनुश्री के कदम
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अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष
इन दिनों इंग्लैंड में स्पेस विषय पर कर रहीं पीएचडी
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं होता। हौसलों की राह पर चलते हुए आसमां चूमने का सपना भी आसानी से सच किया जा सकता है। इसे साबित कर दिखाया है बस्ती की 33 वर्षीय अनुश्री ने। कल्पना चावला को प्रेरणा मानने वाली अनुश्री को नासा ने एक अप्रैल-2020 से प्रशिक्षण के लिए बुलावा भेजा था, मगर लॉकडाउन की वजह से फिलहाल प्रशिक्षण टल गया है। अगली तिथि अब तक नहीं मिली है। अनुश्री इन दिनों इंग्लैड के कालचेस्टर सिटी में रहकर माइक्रो आइट्रोलॉजी अर्थात स्पेस विषय से पीएचडी कर रही हैं। यहां नासा ने उन्हें भेजा है।

शहर के गांधीनगर निवासी रेलवे के अधिकारी राकेश श्रीवास्तव व सुनीता की इकलौती बेटी अनुश्री कुशाग्र बुद्धि की हैं। परिवार ने उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्ष-2003 में लखनऊ में तैयारी के दौरान कल्पना चावला की अंतरिक्ष अभियान से लौटते समय मौत की घटना ने अनुश्री को झकझोर दिया। इसी बीच उसने सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए ली गई साइंस की पुस्तक में मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश के बारे में पढ़ा। इसके बाद सिविल सर्विसेज से उसका मन उचट गया और यहीं उसके मन में मंगल ग्रह अभियान में शामिल होने का बीज रोपित हो गया। परास्नातक करने के दौरान अनुश्री ने लखनऊ में बायो एक्सिस डीएनई रिसर्च सेंटर से बायो टेक्नोलॉजी में शार्ट टर्म प्रोजेक्ट का प्रशिक्षण लेकर अपने जीवन की दिशा मोड़ दी। इसी बीच इंग्लैंड की एक निजी संस्था यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स ने एमएससी का ऑफर दिया, जिसे अनुश्री ने स्वीकार कर लिया। वहां पढ़ाई के दौरान अमेरिका की एक निजी कंपनी ने मंगल ग्रह अभियान के लिए यूटा के रेगिस्तान में प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव दिया। यहां भारत से अनुश्री के अलावा सात देशों के प्रशिक्षणार्थियों के साथ मंगल ग्रह के वातावरण में रहने का प्रशिक्षण दिया गया। अनुश्री बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हैब से बाहर आने पर पंद्रह किलो का स्पेस सूट पहनकर काम कराया जाता था। दो माह नार्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के करीब प्रशिक्षण दिया गया, जहां दो माह में कभी रात नहीं देखी। इंग्लैंड में मंगल ग्रह से संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग के लिए धरती के 1.1 किमी नीचे नमक की खदान में पंद्रह दिन का प्रशिक्षण मिला। अनुश्री ने कहा कि उनका जीवन अब मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए समर्पित है। एक अप्रैल से नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर, मेरी लैंडस्टेट अमेरिका में चार माह का प्रशिक्षण होना था, मगर टल गया है। कहती हैं कि मिशन अंतरिक्ष का सफर अभी लंबा है। फिर भी मंगल ग्रह के अभियान में खुद की भागीदारी को लेकर आश्वस्त हूं।
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