फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   data ki bhaji giri

अन्नदाताओं की दशा खराब, आंकड़ांे की बाजीगरी

Sun, 19 Jan 2020 11:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2020 11:54 PM IST
विज्ञापन
data ki bhaji giri
अन्नदाताओं की दशा खराब, आंकड़ों में बाजीगरी
विज्ञापन

बस्ती। बे-मौसम बारिश से खेती किसानी का पूरा खेल बिगड़ रहा है। जिले के उत्तरी क्षेत्र में इसका असर भी देखने को मिल रहा है। गेहूं की फसल देख किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं। हालात से अनजान जिम्मेदार अधिकारी बारिश को खेती के लिए फायदेमंद भले ही बता रहे हों लेकिन पांच ब्लॉकों में स्थिति इसके विपरीत है। खेतों में पानी भरा हुआ है और की फसल पूरी तरह से चौपट हो रही है।
जिले के उत्तर में भारी और दक्षिण में हल्की (बलुई) मिट्टी होने के कारण बारिश का असर अलग-अलग होता है। लेकिन जिले की भौगोलिक स्थितियों से अनजान अधिकारी कभी कभार आसपास के 10 से 20 किलोमीटर का क्षेत्र भ्रमण कर जिले भर का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर देते हैं। किसानों की हालात जानने का समय प्रशासन के पास भी नहीं है।
विज्ञापन

पिछले कुछ महीने में हुई बे-मौसम हुई बारिश पर गौर करें तो खेती के हालात को बेहतर समझा जा सकता है। धान की फसल पक रही थी कि 25 सितंबर को अचानक मौसम खराब होता है और हफ्ते भर बारिश होती है। इसका सीधा असर फसल के पकने पर पड़ता है। धान कटाई देर में होती है और रबी सीजन के फसलों की बुवाई भी इसी कारण प्रभावित होती है। कटाई के बाद खेतों की सिंचाई कर गेहूं की बुआई के लिए तैयारी की जा रही थी कि अचानक 13 दिसंबर को मौसम फिर खराब होता है और गेहूं बुवाई की तैयारियों पर पानी फेर देता है। इससे बुवाई पिछड़ी और कृषि लागत बढ़ी। जैसे-तैसे जनवरी में बुवाई हुई तो फिर बारिश होनी शुरू हो गई। हालात जिले के उत्तर दिशा में काफी खराब हैं। जहां आजकल खेतों में पानी नजर आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दिशावार जिले के ब्लॉकों की स्थिति
जिले के उत्तर में गौर, सल्टौआ, रामनगर, रुधौली व सांऊघाट ब्लॉक के अलावा बहादुरपुर के लालगंज से आगे का क्षेत्र भारी मिट्टी के लिए जाना जाता है। बारिश के बाद यहां पानी सूखने में लंबा समय लगता है। दूसरी ओर दक्षिण दिशा में सदर, बहादुरपुर, कुदरहा, बनकटी, दुबौलिया, कप्तानगंज, हर्रैया, विक्रमजोत, परशुरामपुर में मिट्टी हल्की (बलुई) होने के कारण बारिश का पानी जल्द सूख जाता है।
एक जैसी सलाह किसान के लित है घातक
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरवी सिंह बताते हैं कि अलग-अलग मिट्टी होने केे कारण बिना फील्ड निरीक्षण के एक जैसी सलाह किसान और फसल के लिए घातक साबित हो सकती है। बताते हैं कि जिन किसानों का गेहूं टिलरिंग स्टेज (कल्ले फूटने का समय) में है वे 40-45 किलोग्राम यूरिया के साथ 10 किलोग्राम जिंक प्रति एकड़ बुवाई करें। यह पौध विकास में काफी सहायक होगा। इसके 3 से 4 दिन बाद जल विलेय उर्वरक (डब्लूपी) या एनपीके का प्रयोग 2 किलोग्राम/एकड़ की दर से 200 सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है : डॉ. संजय
उप कृषि निदेशक डॉ. संजय त्रिपाठी ने बताया कि नुकसान का आंकलन करने के लिए क्षेत्र भ्रमण किया जा रहा है। स्थितियों को देखकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके अनुसार आगे कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed