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Basti News: हाईवे पर अंडरपास नहीं... चौराहा पार करते समय बना रहता खतरा

Sat, 10 Feb 2024 03:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 10 Feb 2024 03:03 AM IST
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Danger remains while crossing the intersection
फोटो
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डेढ़ दशक बाद भी प्रमुख चौराहों पर नहीं बन पाई फ्लाइओवर की योजना
ब्रेकर बनाकर कर रहे सुरक्षा, सड़क पार करते समय हाईवे पर लग रहा जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती-अयोध्या हाईवे के प्रमुख चौराहों पर अंडरपास की व्यवस्था नहीं है। यहां सड़क पार करते समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जान जोखिम में डालकर लोग हाईवे पार करते हैं। मुख्यालय पर हाईवे से जुड़ने वाली छह सड़कों में से केवल दो जगहों पर अंडरपास है। शहर में प्रवेश करने के लिए चार जगहो पर सीधा हाईवे को पार करना पड़ रहा है।
इसके अलावा हाईवे से जुड़े दो नगर पंचायत क्षेत्र में प्रवेश के लिए अंडरपास की व्यवस्था नहीं बनी है। इससे यह स्थल दुर्घटना बाहुल्य बन गए हैं। डेढ़ दशक से लोग इन जगहों पर सुरक्षा की दृष्टि से अंडरपास बनने की प्रतीक्षा में है। मगर, इसकी योजना ही नहीं बन पाई। एनएचएआई की तरफ से केवल ब्रेकर बनाकर इन संवेदनशील चौराहों पर सुरक्षा की गारंटी दी जा रही है। यहां वाहनों को धीमी गति से चलने के लिए संकेतक तक नहीं लगवाए गए हैं।
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इन चौराहों को पार करने के लिए कभी हाईवे के दोनों तरफ लोकल यात्रियों को कतारबद्ध देखा जा सकता तो कभी हाईवे पर जाम लग जा रहा है। रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। संकेतक न होने से हाईवे पर चलने वाले वाहनों की गति नियंत्रित नहीं हो पाती है। सबसे व्यस्त पॉलिटेक्निक और कप्तानगंज चौराहे पर अंडरपास न होने की वजह से अक्सर दुर्घटना होने से हाईवे की सड़क लाल हो रही है।
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पॉलिटेक्निक पर बनी थी योजना, बाद में हुई फेल
शहर के कामर्शियल क्षेत्र पुरानी बस्ती का सीधा निकास हाईवे के पॉलिटेक्निक चौराहे पर है। बांसी, डुमरियागंज, मेंहदावल, खलीलाबाद मार्ग के लोग इसी रास्ते पुरानी बस्ती में प्रवेश पाते हैं। व्यापारिक दृष्टि से आम राहगीरों के अलावा माल वाहकों का आवागमन रहता है। इस चौराहे से पुरानी बस्ती में प्रतिदिन 25 से 30 हजार वाहनों का आना-जाना हो रहा है। यहां डेढ़ दशक पहले हाईवे निर्माण के दौरान अंडरपास बनना प्रस्तावित रहा। मगर, राजनीतिक रसूख वाले लोग निजी लाभ के लिए इसे निरस्त करा दिए। हाईवे चालू होने के बाद इसकी जरूरत महसूस हुई तो फिर से आवाज उठी। एनएचएआई की तरफ से सर्वे भी कराया गया। मगर, तब तक हाईवे को छह लेन में परिवर्तित करने की योजना आ गई। इसी चक्कर में अंडरपास बनने की प्रक्रिया रोक दी गई।
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पटेल चौक पर भी हाईवे पार करना कठिन
हाईवे पर स्थित पटेल चौक पर शहरी आवागमन का भार अधिक है। रोडवेज, पचपेड़िया से निकलने वाली सड़क बस्ती-बांसी मार्ग को जोड़ती है। इसकी क्रॉसिंग हाईवे पर पटेल चौक पर हो रही है। यहां अंडरपास न होने से हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग रही है। दिन में पुलिस वाहनों को पार करा रहा है। रात के समय भगवान भरोसे लोग हाईवे पार करते हैं। यहां सुरक्षा की दृष्टि से हाईवे पर केवल ब्रेकर बनाए गए हैं। संकेतक नहीं हैं। इस वजह से इस चौक पर हाईवे पार करते समय अक्सर दुर्घटना होती रहती है।
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मूड़घाट पर बंद करना पड़ा रास्ता
हाईवे पर स्थित शहरी क्षेत्र के मूड़घाट चौराहा पर अंडरपास न होने की वजह एक साल पहले यहां रास्ता बंद करना पड़ा। अब लोगों को एक किमी अतिरिक्त दूरी तय कर शहर में आना पड़ रहा है। यहां पहले सीधे लोग हाईवे पार कर इधर से उधर होते रहे। इससे कई बार हादसे हुए। अतिसंवेदनशील चौराहा होने के कारण अब इस चौराहे पर हाईवे को बैरिकेड कर दिया गया। हाईवे निर्माण के समय यहां भी अंडरपास बनना प्रस्तावित रहा। मगर, इसे भी निरस्त कर दिया गया था।
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कांटे और कप्तानगंज चौराहा भी संवेदनशील
हाईवे से मुंडेरवा नगर पंचायत को जोड़ने वाला कांटे चौराहा दुर्घटना की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है। यहां भी अंडरपास नहीं बनाया गया है। गोरखपुर की ओर से आने वाले लोग तो मुंडेरवा मार्ग पर आसानी से हो जा रहे हैं। मगर, मुंडरेवा की ओर से जाने पर हाईवे पार कर गोरखपुर की ओर बढ़ना पड़ रहा है। यहां भी कई बार दुर्घटना हो चुकी है। कप्तानगंज चौराहा भी दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र बन गया है।
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स्कूली बच्चों को सबसे अधिक खतरा
बिना अंडरपास वाले स्थानों पर हाईवे पार करने में स्कूली बच्चों को सबसेे ज्यादा खतरा है। कुछ बड़ों के सहारे पैदल हाईवे पार कर रहे हैं तो कुछ स्कूल वैन एवं बस में बैठकर सड़क पार कर रहे हैं। इस दौरान इन बच्चों के सिर पर खतरा बना रहता है। बहुत ही सावधानी से इन्हें हाईवे पार कराया जाता है।
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केस- एक

पॉलिटेक्निक चौराहा पर तीन साल पहले पॉलिटेक्निक की एक छात्रा की हाईवे पार करते समय वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उस समय छात्रों ने हाईवे जाम करके बड़ा आंदोलन किया था। उच्चाधिकारियों ने यहां अंडरपास बनाने के लिए प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया था। मगर, मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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केस- दो
दो साल पहले हाईवे पर चल रहे तेज रफ्तार वाहन ने कांटे चौराहे पर स्थित पुलिस चौकी को अपने चपेट में ले लिया था। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन पुलिस चौकी क्षतिग्रस्त हो गई थी। यदि अंडरपास का निर्माण हुआ होता तो शायद यह दुर्घटना टल जाती।

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केस- तीन
बिना अंडरपास वाले पटेल चौक पर पांच साल पहले गोरखपुर की ओर से आ रही एक कार हाईवे पार करने वाले वाहन से टकरा गई। कार सवार तीन युवकों की मौत हो गई थी। यह हादसा काफी दिनों तक चर्चा में रहा। लोगों का कहना था यदि अंडरपास की व्यवस्था होती तो यह हादसा टल सकता था।
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कोट
पॉलिटेक्निक चौराहे पर अंडरपास के लिए प्रस्ताव तैयार कराए जा रहे थे। मगर, हाईवे छह लेन प्रस्तावित होने से यह प्रक्रिया रुक गई।
-भावेश अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
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