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Basti News: मोंथा तूफान का कहर...जनजीवन अस्त-व्यस्त, फसलें चौपट
Sat, 01 Nov 2025 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:29 AM IST
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हर्रैया। क्षेत्र में दो दिनों से हो रही बरसात में बर्बाद हो रही धान की पककर तैयार फसल।संवाद
बस्ती। चक्रवाती तूफान मोंथा ने चार दिन से मौसम में उथल-पुथल मचा रखा है। समूचा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। तूफान का कहर किसानों पर टूट रहा है। धान और सब्जी की फसलें चौपट हो गई हैं। 24 घंटे से रुक-रुककर हो रही हल्की बारिश ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। दफ्तर, स्कूल या बाजार जाना मुहाल हो गया है।
शहर से लेकर ग्रामीण सड़कों पर कीचड़ से फिसलन हो गई है, जिससे लोगों को चलने में दिक्कत हो रही है। बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोगों कार से बाजार जाने से शहर के गांधीनगर, रोडवेज, दक्षिण दरवाजा जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में दिन में कई बार लंबा जाम भी लगा। जाम में फंसे बाइक सवार भीगते रहे। बिजली और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की शिकायतें मिल रही हैं। फाल्ट के मामले बढ़ गए हैं।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 6.8 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक है। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की बारिश होती रही। बीते 24 घंटे में 19.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
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मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अधिकतम आर्द्रता 83 प्रतिशत और न्यूनतम 81 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पूर्वी दिशा से चली हवा की गति 7.4 किलोमीटर प्रति घंटा रही। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र का कहना है कि अगले 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। बारिश और नमी बढ़ने से ठंडक का असर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम धान की कटाई और मड़ाई के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में नमी उपयोगी साबित होगी।
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तैयार फसल की बर्बादी से किसानों में मायूसी
बस्ती। पककर तैयार धान की फसल बर्बाद होते देख किसानों में मायूसी है। 15 से 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा हवा चलने से धान की फसल खेत में गिर जा रही है। इससे 15 से 20 प्रतिशत उपज खेत में रह जाने की आशंका है। जिले में लगभग 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुआई की गई है। धान की कुल अनुमानित पैदावार लगभग 9.25 से 9.30 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है। अभी महज 25-30 फीसदी कटाई हो पाई है जबकि बिक्री तो एक दाना नहीं हो पाई है। किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
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बेमौसम बारिश से बढ़ी चिंता, धान और सब्जी की फसल पर संकट
सल्टौआ। रुक-रुक कर हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। भिरिया रितुराज गांव के किसान सुखमंगल सिंह ने बताया कि धान की फसल कटाई के लिए तैयार है, लेकिन बारिश से दाना भीग गया है और पूरी उपज के चौपट होने का खतरा है। वहीं, सिकंदरपुर गांव के भीखाराम ने बताया कि उन्होंने गोभी और मटर की बुवाई की थी, मगर खेतों में पानी भरने से पौधे सड़ने लगे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अगले 24 घंटे में मौसम नहीं सुधरा तो खेतों में जलभराव से फसलों को स्थायी नुकसान हो सकता है। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि कब बारिश थमे और खेतों में दोबारा काम शुरू हो सके।
धान भीगा, गन्ना धराशायी...किसान बेहाल
टिनिच। सल्टौआ क्षेत्र में बृहस्पतिवार रात तेज हवा के साथ बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अजगैवाजंगल, तिनहरी, बसहवा, भदना, वजहिया, बोधपुर, झग्गापुर, शिवपुर, शीतलनगर और सुल्तानपुर सहित आसपास के गांवों में धान और गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। भदना गांव के किसान ध्रुव पांडेय ने बताया कि करीब दस बीघा गन्ने की फसल हवाओं से धराशायी हो गई है। इससे गन्ने का वजन कम होगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। तिनहरी के किसान अंबिका ने कहा कि धान काटकर सूखने के लिए खेत में रखा था, लेकिन पानी भर जाने से अब वह सड़ने लगा है। अगर मौसम ऐसे ही रहा तो धान जामने लगेगा। किसान गंगाराम, आनंद मिश्र, इसरार खान, रामकेश, रवींद्र कुमार, ओमप्रकाश, शिवकुमार त्रिपाठी, रमेश चंद्र, भास्कर चौधरी सहित सैकड़ों किसानों की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने क्षति का सर्वे कर मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
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बुआई में हुई 10-15 दिन की देर
मौसम की यह अनिश्चितता खरीफ से रबी सीजन में संक्रमण काल को प्रभावित कर रही है। कृषि विभाग के अनुसार, धान की कटाई और मड़ाई में 7-10 दिन की देरी हो सकती है। लगातार नमी से कटे धान में अंकुरण और फफूंद का खतरा बढ़ गया है। जिन किसानों ने कटाई पूरी कर ली है, उन्हें अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, धान की उपज की गुणवत्ता पर 10-15 तक असर संभव है।
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मंडी और आपूर्ति तंत्र पर प्रभाव
कई दिन से मौसम खराब होने और फोरलेन पर डायवर्जन होने का असर सब्जी और फल मंडियों पर भी दिखा है। लगातार नमी और ट्रांसपोर्ट में देरी से नाशवान वस्तुओं की खराबी बढ़ी है। सब्जी के फुटकर व्यवसायी बबलू चौहान बताते हैं कि बृहस्पतिवार से टमाटर, हरी मिर्च, धनिया और फूलगोभी के दामों में 15-20 प्रतिशत तक उछाल आया है। मंडी व्यापारी राम उग्रह, उस्मान, समाउल्लाह आदि ने बताया कि पिछले पांच दिनों में सब्ज़ी की आवक में लगभग 30 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। खुदरा बाजारों में सब्जियां महंगी हुई हैं, जिससे आम लोगों पर असर पड़ा है।
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वातावरण में बदलाव, हवा हुई साफ
बादल और फुहारों की वजह से हवा में धूलकणों की मात्रा घट गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में एअर क्वालिटी इंडेक्स 122 से घटकर 84 दर्ज किया गया है, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम अस्थायी राहत देता है लेकिन लंबे समय तक नमी रहने से सांस और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
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शहर से लेकर ग्रामीण सड़कों पर कीचड़ से फिसलन हो गई है, जिससे लोगों को चलने में दिक्कत हो रही है। बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोगों कार से बाजार जाने से शहर के गांधीनगर, रोडवेज, दक्षिण दरवाजा जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में दिन में कई बार लंबा जाम भी लगा। जाम में फंसे बाइक सवार भीगते रहे। बिजली और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की शिकायतें मिल रही हैं। फाल्ट के मामले बढ़ गए हैं।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 6.8 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक है। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की बारिश होती रही। बीते 24 घंटे में 19.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
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मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अधिकतम आर्द्रता 83 प्रतिशत और न्यूनतम 81 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पूर्वी दिशा से चली हवा की गति 7.4 किलोमीटर प्रति घंटा रही। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र का कहना है कि अगले 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। बारिश और नमी बढ़ने से ठंडक का असर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम धान की कटाई और मड़ाई के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में नमी उपयोगी साबित होगी।
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तैयार फसल की बर्बादी से किसानों में मायूसी
बस्ती। पककर तैयार धान की फसल बर्बाद होते देख किसानों में मायूसी है। 15 से 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा हवा चलने से धान की फसल खेत में गिर जा रही है। इससे 15 से 20 प्रतिशत उपज खेत में रह जाने की आशंका है। जिले में लगभग 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुआई की गई है। धान की कुल अनुमानित पैदावार लगभग 9.25 से 9.30 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है। अभी महज 25-30 फीसदी कटाई हो पाई है जबकि बिक्री तो एक दाना नहीं हो पाई है। किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
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बेमौसम बारिश से बढ़ी चिंता, धान और सब्जी की फसल पर संकट
सल्टौआ। रुक-रुक कर हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। भिरिया रितुराज गांव के किसान सुखमंगल सिंह ने बताया कि धान की फसल कटाई के लिए तैयार है, लेकिन बारिश से दाना भीग गया है और पूरी उपज के चौपट होने का खतरा है। वहीं, सिकंदरपुर गांव के भीखाराम ने बताया कि उन्होंने गोभी और मटर की बुवाई की थी, मगर खेतों में पानी भरने से पौधे सड़ने लगे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अगले 24 घंटे में मौसम नहीं सुधरा तो खेतों में जलभराव से फसलों को स्थायी नुकसान हो सकता है। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि कब बारिश थमे और खेतों में दोबारा काम शुरू हो सके।
धान भीगा, गन्ना धराशायी...किसान बेहाल
टिनिच। सल्टौआ क्षेत्र में बृहस्पतिवार रात तेज हवा के साथ बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अजगैवाजंगल, तिनहरी, बसहवा, भदना, वजहिया, बोधपुर, झग्गापुर, शिवपुर, शीतलनगर और सुल्तानपुर सहित आसपास के गांवों में धान और गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। भदना गांव के किसान ध्रुव पांडेय ने बताया कि करीब दस बीघा गन्ने की फसल हवाओं से धराशायी हो गई है। इससे गन्ने का वजन कम होगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। तिनहरी के किसान अंबिका ने कहा कि धान काटकर सूखने के लिए खेत में रखा था, लेकिन पानी भर जाने से अब वह सड़ने लगा है। अगर मौसम ऐसे ही रहा तो धान जामने लगेगा। किसान गंगाराम, आनंद मिश्र, इसरार खान, रामकेश, रवींद्र कुमार, ओमप्रकाश, शिवकुमार त्रिपाठी, रमेश चंद्र, भास्कर चौधरी सहित सैकड़ों किसानों की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने क्षति का सर्वे कर मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
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बुआई में हुई 10-15 दिन की देर
मौसम की यह अनिश्चितता खरीफ से रबी सीजन में संक्रमण काल को प्रभावित कर रही है। कृषि विभाग के अनुसार, धान की कटाई और मड़ाई में 7-10 दिन की देरी हो सकती है। लगातार नमी से कटे धान में अंकुरण और फफूंद का खतरा बढ़ गया है। जिन किसानों ने कटाई पूरी कर ली है, उन्हें अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, धान की उपज की गुणवत्ता पर 10-15 तक असर संभव है।
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मंडी और आपूर्ति तंत्र पर प्रभाव
कई दिन से मौसम खराब होने और फोरलेन पर डायवर्जन होने का असर सब्जी और फल मंडियों पर भी दिखा है। लगातार नमी और ट्रांसपोर्ट में देरी से नाशवान वस्तुओं की खराबी बढ़ी है। सब्जी के फुटकर व्यवसायी बबलू चौहान बताते हैं कि बृहस्पतिवार से टमाटर, हरी मिर्च, धनिया और फूलगोभी के दामों में 15-20 प्रतिशत तक उछाल आया है। मंडी व्यापारी राम उग्रह, उस्मान, समाउल्लाह आदि ने बताया कि पिछले पांच दिनों में सब्ज़ी की आवक में लगभग 30 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। खुदरा बाजारों में सब्जियां महंगी हुई हैं, जिससे आम लोगों पर असर पड़ा है।
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वातावरण में बदलाव, हवा हुई साफ
बादल और फुहारों की वजह से हवा में धूलकणों की मात्रा घट गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में एअर क्वालिटी इंडेक्स 122 से घटकर 84 दर्ज किया गया है, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम अस्थायी राहत देता है लेकिन लंबे समय तक नमी रहने से सांस और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।

हर्रैया। क्षेत्र में दो दिनों से हो रही बरसात में बर्बाद हो रही धान की पककर तैयार फसल।संवाद

हर्रैया। क्षेत्र में दो दिनों से हो रही बरसात में बर्बाद हो रही धान की पककर तैयार फसल।संवाद