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Basti News: लोगो<bha>--</bha>-होलिका दहन, शब-ए-बरात एक साथ, दें अमनचैन का पैगाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। होलिका दहन और शब-ए-बरात साथ होने से पुलिस व प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। दोनों त्योहार सात मार्च को पड़ रहे हैं। इसे लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ज्यादा तैयारी कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि पंचांग के अनुसार अगर होलिका दहन छह मार्च को होता है तो शांति व्यवस्था बनाए रखने में ज्यादा आसानी होगी। मगर परंपरा के अनुसार रंगोत्सव से एक दिन पहले सात मार्च को होलिका दहन होने की स्थिति में संवेदनशीलता बढ़ जाएगी। पुलिस ने दोनों समुदाय के लोगों से अनुरोध किया है कि लोग शांति के साथ पर्व को मनाएं और समाज को अमनचैन का पैगाम दें।
रात में मुस्लिम समाज के लोग मजारों व कब्रिस्तानों को सजाने के साथ फातेहा पढ़ते हैं। ऐसे में होलिका दहन व शब-ए-बरात एक साथ होने पर सुरक्षा व शांति व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है। इस बार होलिका दहन की तिथि को लेकर ज्योतिषाचार्यों का अलग-अलग मत है। कुछ ज्योतिषाचार्य छह मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त बता रहे हैं, तो कुछ सात मार्च के दिन को शुभ बता रहे हैं। ऐसे में लोग अभी असमंजस में हैं कि उन्हें क्या करना है। उनकी यही दुविधा पुलिस प्रशासन की परेशानी का सबब बना हुआ है।
पुलिस प्रशासन चाहता है कि लोग छह मार्च को ही होलिका दहन कर लें। ऐसा करने से उनकी कानून व्यवस्था को लेकर दुविधा खत्म हो जाएगी। कारण यह कि सात मार्च को रात में शब-ए-बरात मनाया जाएगा। इसको लेकर पूरी रात चहल पहल बनी रहती है। वहीं, होलिका दहन के समय लोग हर्षोल्लास के साथ नाचते-गाते बाहर निकलते हैं।
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पुलिस प्रशासन दोनों स्थिति में तैयार
पुलिस प्रशासन दोनों स्थितियों में तैयार है। इसके लिए दो-तीन दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर दी गई है। सभी संवेदनशील स्थानों, होलिका दहन के स्थानों के अलावा दरगाह, मजार, कब्रिस्तानों की सूची तैयार की जा रही है। सभी जगह आवश्यक पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए जा रहे हैं। थानावार शांति-सुरक्षा समिति की बैठकें की जा रही हैं। संवेदनशील क्षेेत्र का आकलन भी किया जा रहा है। दोनों संप्रदाय से अपील है कि वे सामाजिक सौहार्द कायम रखते हुए त्योहारों की गरिमा कायम रखने में सहयोग करें।
-आशीष श्रीवास्तव, एसपी
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बस्ती। होलिका दहन और शब-ए-बरात साथ होने से पुलिस व प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। दोनों त्योहार सात मार्च को पड़ रहे हैं। इसे लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ज्यादा तैयारी कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि पंचांग के अनुसार अगर होलिका दहन छह मार्च को होता है तो शांति व्यवस्था बनाए रखने में ज्यादा आसानी होगी। मगर परंपरा के अनुसार रंगोत्सव से एक दिन पहले सात मार्च को होलिका दहन होने की स्थिति में संवेदनशीलता बढ़ जाएगी। पुलिस ने दोनों समुदाय के लोगों से अनुरोध किया है कि लोग शांति के साथ पर्व को मनाएं और समाज को अमनचैन का पैगाम दें।
रात में मुस्लिम समाज के लोग मजारों व कब्रिस्तानों को सजाने के साथ फातेहा पढ़ते हैं। ऐसे में होलिका दहन व शब-ए-बरात एक साथ होने पर सुरक्षा व शांति व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है। इस बार होलिका दहन की तिथि को लेकर ज्योतिषाचार्यों का अलग-अलग मत है। कुछ ज्योतिषाचार्य छह मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त बता रहे हैं, तो कुछ सात मार्च के दिन को शुभ बता रहे हैं। ऐसे में लोग अभी असमंजस में हैं कि उन्हें क्या करना है। उनकी यही दुविधा पुलिस प्रशासन की परेशानी का सबब बना हुआ है।
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पुलिस प्रशासन चाहता है कि लोग छह मार्च को ही होलिका दहन कर लें। ऐसा करने से उनकी कानून व्यवस्था को लेकर दुविधा खत्म हो जाएगी। कारण यह कि सात मार्च को रात में शब-ए-बरात मनाया जाएगा। इसको लेकर पूरी रात चहल पहल बनी रहती है। वहीं, होलिका दहन के समय लोग हर्षोल्लास के साथ नाचते-गाते बाहर निकलते हैं।
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पुलिस प्रशासन दोनों स्थिति में तैयार
पुलिस प्रशासन दोनों स्थितियों में तैयार है। इसके लिए दो-तीन दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर दी गई है। सभी संवेदनशील स्थानों, होलिका दहन के स्थानों के अलावा दरगाह, मजार, कब्रिस्तानों की सूची तैयार की जा रही है। सभी जगह आवश्यक पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए जा रहे हैं। थानावार शांति-सुरक्षा समिति की बैठकें की जा रही हैं। संवेदनशील क्षेेत्र का आकलन भी किया जा रहा है। दोनों संप्रदाय से अपील है कि वे सामाजिक सौहार्द कायम रखते हुए त्योहारों की गरिमा कायम रखने में सहयोग करें।
-आशीष श्रीवास्तव, एसपी