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Basti News: 30 हजार खर्च कर स्टेबलाइजर नहीं बनवाया, ऑक्सीजन सिलिंडर पर बहा दिए 96 हजार
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बस्ती। स्टेबलाइजर में खराबी की वजह से जिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट महीने भर से बंद पड़ा है। स्टेबलाइजर का खराब पार्ट बदलने में 30 हजार रुपये खर्च होने हैं। इसे बनवाने की कवायद फाइलों में जारी है। इस बीच अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सिलिंडर पर करीब 96 हजार रुपये खर्च कर चुका है।
जानकारी के मुताबिक 20 सितंबर को अस्पताल के पावर सब स्टेशन में आई खराबी से ऑक्सीजन प्लांट की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे प्लांट बंद हो गया। इसके बाद अस्पताल में मरीजों को सिलिंडर के जरिये ऑक्सीजन देने की व्यवस्था शुरू की गई। करीब 10 दिन की मशक्कत के बाद बिजली व्यवस्था बहाल हुई लेकिन प्लांट चालू नहीं हो सका। जांच में प्लांट में लगे स्टेबलाइजर का एक पार्ट जला मिला। स्टेबलाइजर बनवाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने प्लांट संचालित करने के लिए अनुबंधित फर्म साइरेक्स से संपर्क किया। फर्म ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए स्टेबलाइजर बदलने से इन्कार कर दिया।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर पर स्टेबलाइजर बनवाने की पहल की तो पता चला कि खराब पार्ट की कीमत 30 हजार रुपये है। अस्पताल प्रशासन ने करीब हफ्ते भर पहले इसके लिए ऑर्डर भेजा है। इस बीच अनुबंधित फर्म के जरिये गोरखपुर से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाकर काम चलाया जा रहा है। हर चौथे दिन 32 सिलिंडर की खेप आती है जिस पर करीब 11 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस व्यवस्था में करीब 96 हजार रुपये खर्च किए जा चुके हैं। स्टेबलाइजर का पार्ट बदलकर ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई कब तक बहाल हो सकेगी यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
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रोजाना 10 से 12 सिलिंडर की खपत
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड, मेडिकल वार्ड, आईसीयू, पीआईसीयू, ट्रामा सेंटर और इमरजेंसी में करीब 20 से 25 मरीजों को रोजाना ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जिला अस्पताल प्रशासन के पास 70 सिलिंडर हैं। रोजाना 10 से 12 सिलिंडर की खपत हो रही है। गोरखपुर से एक सिलिंडर मंगाने में 341 रुपये का खर्च आता है। महीने भर में करीब 280 सिलिंडर मंगाए जा चुके हैं जिस पर 96 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। मौसम बदलने से सांस संबंधी परेशानी वाले बुजुर्गों और बच्चों की संख्या बढ़ने पर मांग में इजाफा हो सकता है।
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आठ बेड का आईसीयू, टेक्नीशियन की तैनाती नहीं
जिला अस्पताल में आठ बेड का आईसीयू है लेकिन इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन की नियमित तैनाती नहीं है। जरूरत पड़ने पर पीआईसीयू से टेक्नीशियन बुलाए जाते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों समेत अन्य गंभीर मरीजों की देखभाल प्रभावित होने की आशंका रहती है। संसाधनों और तकनीकी स्टाफ के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर भी करना पड़ता है।
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गोरखपुर से अनुबंधित फर्म के माध्यम से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगवाए जा रहे हैं। प्लांट में लगे स्टेबलाइजर का एक पार्ट खराब हो गया है। उसे मंगवाया गया है। पार्ट लगने के बाद जल्द ही ऑक्सीजन की आपूर्ति प्लांट से शुरू हो जाएगी। - डॉ. अनिल कुमार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, बस्ती
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जानकारी के मुताबिक 20 सितंबर को अस्पताल के पावर सब स्टेशन में आई खराबी से ऑक्सीजन प्लांट की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे प्लांट बंद हो गया। इसके बाद अस्पताल में मरीजों को सिलिंडर के जरिये ऑक्सीजन देने की व्यवस्था शुरू की गई। करीब 10 दिन की मशक्कत के बाद बिजली व्यवस्था बहाल हुई लेकिन प्लांट चालू नहीं हो सका। जांच में प्लांट में लगे स्टेबलाइजर का एक पार्ट जला मिला। स्टेबलाइजर बनवाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने प्लांट संचालित करने के लिए अनुबंधित फर्म साइरेक्स से संपर्क किया। फर्म ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए स्टेबलाइजर बदलने से इन्कार कर दिया।
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इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर पर स्टेबलाइजर बनवाने की पहल की तो पता चला कि खराब पार्ट की कीमत 30 हजार रुपये है। अस्पताल प्रशासन ने करीब हफ्ते भर पहले इसके लिए ऑर्डर भेजा है। इस बीच अनुबंधित फर्म के जरिये गोरखपुर से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाकर काम चलाया जा रहा है। हर चौथे दिन 32 सिलिंडर की खेप आती है जिस पर करीब 11 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस व्यवस्था में करीब 96 हजार रुपये खर्च किए जा चुके हैं। स्टेबलाइजर का पार्ट बदलकर ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई कब तक बहाल हो सकेगी यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
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रोजाना 10 से 12 सिलिंडर की खपत
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड, मेडिकल वार्ड, आईसीयू, पीआईसीयू, ट्रामा सेंटर और इमरजेंसी में करीब 20 से 25 मरीजों को रोजाना ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जिला अस्पताल प्रशासन के पास 70 सिलिंडर हैं। रोजाना 10 से 12 सिलिंडर की खपत हो रही है। गोरखपुर से एक सिलिंडर मंगाने में 341 रुपये का खर्च आता है। महीने भर में करीब 280 सिलिंडर मंगाए जा चुके हैं जिस पर 96 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। मौसम बदलने से सांस संबंधी परेशानी वाले बुजुर्गों और बच्चों की संख्या बढ़ने पर मांग में इजाफा हो सकता है।
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आठ बेड का आईसीयू, टेक्नीशियन की तैनाती नहीं
जिला अस्पताल में आठ बेड का आईसीयू है लेकिन इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन की नियमित तैनाती नहीं है। जरूरत पड़ने पर पीआईसीयू से टेक्नीशियन बुलाए जाते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों समेत अन्य गंभीर मरीजों की देखभाल प्रभावित होने की आशंका रहती है। संसाधनों और तकनीकी स्टाफ के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर भी करना पड़ता है।
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गोरखपुर से अनुबंधित फर्म के माध्यम से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगवाए जा रहे हैं। प्लांट में लगे स्टेबलाइजर का एक पार्ट खराब हो गया है। उसे मंगवाया गया है। पार्ट लगने के बाद जल्द ही ऑक्सीजन की आपूर्ति प्लांट से शुरू हो जाएगी। - डॉ. अनिल कुमार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, बस्ती