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Basti News: मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की भीड़... 60 बेड का वार्ड फुल
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मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में भर्ती मरीज। संवाद
- फोटो : Archive
बस्ती। क्रिटिकल मरीज ब्लॉक, तहसील से लेकर जिला स्तरीय महिला अस्पताल से रेफर किए जाने से मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग (गायनी) में मरीजों का दबाव बढ़ गया है।उच्च रक्तचाप, पानी व खून की कमी होने पर ज्यादातर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। 60 बेड का वार्ड प्रसूताओं से भर चुका है। मरीजों को बरामदे या गैलरी में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
इस विभाग में रोजाना सामान्य व सिजेरियन मिलाकर 15 से 20 डिलीवरी कराई जा रही है। ओपीडी में रोजाना 200 से 250 गर्भवती महिलाओं का उपचार किया जा रहा है। स्त्री रोग विभाग में एक साथ तीन-तीन चिकित्सक ओपीडी की व्यवस्था संभाल रहे हैं। यहां मरीजों की लाइन लगी रहती है।
जबकि जिले के अन्य अस्पतालों की तुलना में प्रसव कराने की संख्या भी यहां ज्यादा है। जिला महिला चिकित्सालय में इन दिनों औसत 10 से 12 डिलीवरी हो रही है। ज्यादातर सामान्य रिपोर्ट वाले मरीजों की डिलीवरी यहां हो पाती है। जबकि जिले के ग्रामीण अंचल में संचालित सीएचसी और पीएचसी पर गिनती के प्रसव कराए जाते हैं।
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एक चिकित्सक ने बताया कि अभी तो गनीमत है कि जितने बेड हैं, उतने ही मरीज यहां भर्ती हैं। कभी-कभी प्रसूताओं की संख्या 100 के भी पार हो जाती है। ऐसी स्थिति में विभाग के बरामदे और गैलरी में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करनी पड़ती है। मरीजों की तादाद देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से आपातकालीन सेवा के लिए दो जूनियर और एक सीनियर चिकित्सक की ड्यूटी 24 घंटे लगाई गई है।
आईसीयू की वजह से बढ़ रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का आईसीयू वार्ड भी स्थापित है। क्रिटिकल मरीजों का प्रसव कराते समय कभी-कभी आईसीयू की भी जरूरत पड़ती है। इस वजह से मरीजों की संख्या यहां बढ़ रही है। इसके अलावा प्रसव के बाद नवजात के लिए एसएनसीयू की भी सुविधा तत्काल मिल जाती है। मुंडेरवा से आनंद कुमार ने बताया कि एहतियातन वह अपनी पत्नी का प्रसव कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आए हैं। पहले जिला महिला चिकित्सालय गए थे। वहां उच्च रक्तचाप की समस्या बताई गई। यहां लाने पर चिकित्सकों ने स्थिति नियंत्रित कर नॉर्मल डिलीवरी करा दी है।
कोट
प्रसूताओं के लिए 60 बेड का वार्ड बनाया गया है। यहां अक्सर मरीज बढ़ जाते हैं। इसलिए उन्हें भर्ती रखने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। अतिरिक्त बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। उनका समुचित इलाज भी किया जाता है। -डॉ. अनिल कुमार यादव, उप प्रधानाचार्य।
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इस विभाग में रोजाना सामान्य व सिजेरियन मिलाकर 15 से 20 डिलीवरी कराई जा रही है। ओपीडी में रोजाना 200 से 250 गर्भवती महिलाओं का उपचार किया जा रहा है। स्त्री रोग विभाग में एक साथ तीन-तीन चिकित्सक ओपीडी की व्यवस्था संभाल रहे हैं। यहां मरीजों की लाइन लगी रहती है।
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जबकि जिले के अन्य अस्पतालों की तुलना में प्रसव कराने की संख्या भी यहां ज्यादा है। जिला महिला चिकित्सालय में इन दिनों औसत 10 से 12 डिलीवरी हो रही है। ज्यादातर सामान्य रिपोर्ट वाले मरीजों की डिलीवरी यहां हो पाती है। जबकि जिले के ग्रामीण अंचल में संचालित सीएचसी और पीएचसी पर गिनती के प्रसव कराए जाते हैं।
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एक चिकित्सक ने बताया कि अभी तो गनीमत है कि जितने बेड हैं, उतने ही मरीज यहां भर्ती हैं। कभी-कभी प्रसूताओं की संख्या 100 के भी पार हो जाती है। ऐसी स्थिति में विभाग के बरामदे और गैलरी में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करनी पड़ती है। मरीजों की तादाद देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से आपातकालीन सेवा के लिए दो जूनियर और एक सीनियर चिकित्सक की ड्यूटी 24 घंटे लगाई गई है।
आईसीयू की वजह से बढ़ रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का आईसीयू वार्ड भी स्थापित है। क्रिटिकल मरीजों का प्रसव कराते समय कभी-कभी आईसीयू की भी जरूरत पड़ती है। इस वजह से मरीजों की संख्या यहां बढ़ रही है। इसके अलावा प्रसव के बाद नवजात के लिए एसएनसीयू की भी सुविधा तत्काल मिल जाती है। मुंडेरवा से आनंद कुमार ने बताया कि एहतियातन वह अपनी पत्नी का प्रसव कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आए हैं। पहले जिला महिला चिकित्सालय गए थे। वहां उच्च रक्तचाप की समस्या बताई गई। यहां लाने पर चिकित्सकों ने स्थिति नियंत्रित कर नॉर्मल डिलीवरी करा दी है।
कोट
प्रसूताओं के लिए 60 बेड का वार्ड बनाया गया है। यहां अक्सर मरीज बढ़ जाते हैं। इसलिए उन्हें भर्ती रखने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। अतिरिक्त बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। उनका समुचित इलाज भी किया जाता है। -डॉ. अनिल कुमार यादव, उप प्रधानाचार्य।