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Basti News: त्वचा संबंधी दिक्कत की अनदेखी कुष्ठ रोग का बना रही शिकार
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बस्ती। त्वचा संबंधी दिक्कत की अनदेखी कुष्ठ रोग का शिकार बना रही है। जिला अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सक का कहना है कि बारिश के बाद नमी के चलते फंगल इन्फेक्शन के रोगियों की परेशानी और बढ़ गई है।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह का कहना है कि कुष्ठ रोग के बेहतर उपचार और समाज में फैली भ्रांतियों के खिलाफ जागरूकता से इस बीमारी पर लगाम लगा है। समय पर पहचान और इलाज से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। अस्पताल में रोजाना एक-दो नए व पुराने कुष्ठ रोगी आते हैं।
कुष्ठ न तो छुआछूत की बीमारी है न ही वंशानुगत रोग है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है। सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज मुफ्त होता है। माइकोबैक्टीरियम लेप्रे बैक्टीरिया की वजह से त्वचा, मांसपेशियां और नसें प्रभावित होती हैं। समय रहते जांच कराकर दवा शुरू करें तो सालभर में इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं।
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डॉ. राम अनुग्रह ने बताया कि वर्तमान में 200 की ओपीडी है। पहले, 170 से 180 मरीज ओपीडी में आते थे। पुराने रोगी जो त्वचा के हैं उनमें कुष्ठ रोग के लक्षण दिखते हैं। सात अक्तूबर को दो मरीज जबकि आठ अक्तूबर को चार मरीज आए, जिनमें से दो पुराने थे। इनका कुष्ठ रोग कन्फर्म हुआ तो इलाज शुरू कराया गया। अस्पताल में कुष्ठ रोग की जांच और मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की सुविधा उपलब्ध है।
शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, उन हिस्सों में सुन्नपन, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी और नसों में दर्द शामिल हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य रोग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते इलाज करने से शारीरिक दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम के अनुसार, जनपद में एक्टिव 118 मरीज कुष्ठ के हैं जिनकी दवा चल रही है।
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जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह का कहना है कि कुष्ठ रोग के बेहतर उपचार और समाज में फैली भ्रांतियों के खिलाफ जागरूकता से इस बीमारी पर लगाम लगा है। समय पर पहचान और इलाज से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। अस्पताल में रोजाना एक-दो नए व पुराने कुष्ठ रोगी आते हैं।
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कुष्ठ न तो छुआछूत की बीमारी है न ही वंशानुगत रोग है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है। सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज मुफ्त होता है। माइकोबैक्टीरियम लेप्रे बैक्टीरिया की वजह से त्वचा, मांसपेशियां और नसें प्रभावित होती हैं। समय रहते जांच कराकर दवा शुरू करें तो सालभर में इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं।
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डॉ. राम अनुग्रह ने बताया कि वर्तमान में 200 की ओपीडी है। पहले, 170 से 180 मरीज ओपीडी में आते थे। पुराने रोगी जो त्वचा के हैं उनमें कुष्ठ रोग के लक्षण दिखते हैं। सात अक्तूबर को दो मरीज जबकि आठ अक्तूबर को चार मरीज आए, जिनमें से दो पुराने थे। इनका कुष्ठ रोग कन्फर्म हुआ तो इलाज शुरू कराया गया। अस्पताल में कुष्ठ रोग की जांच और मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की सुविधा उपलब्ध है।
शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, उन हिस्सों में सुन्नपन, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी और नसों में दर्द शामिल हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य रोग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय रहते इलाज करने से शारीरिक दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम के अनुसार, जनपद में एक्टिव 118 मरीज कुष्ठ के हैं जिनकी दवा चल रही है।