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Basti News: बदरंग हो गए चौराहे... हर बार फेल हुई सुंदरीकरण की योजना
Thu, 05 Sep 2024 03:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 05 Sep 2024 03:17 AM IST
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पांच साल पहले तत्कालीन डीएम और एडीजी ने की थी चौराहों को गोद लेने की पहल
कई बार चौराहों को सुंदर बनाने की बनी रणनीति, मगर धरातल पर नहीं उतर पाई योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर की पहचान बदरंग चौराहों से हो रही है। एनएचएआई की सड़क से शहर में प्रवेश करिए या रेल मार्ग से आने के बाद रेलवे स्टेशन के बाहर निकलिए या फिर रोडवेज से शहर की राह पकड़िए, हर जगह उजड़ा चमन सा दृश्य दिखाई पड़ रहा है। अस्त-व्यस्त चौराहे, चहुंओर गंदगी, धूल की मोटी परतों से ढकी महापुरुषों की प्रतिमाएं शहर के पिछड़ेपन का अहसास करा रही हैं। एक दशक से इन चौराहों पर विकास की नई लकीर नहीं खींची जा सकी है।
शहर के प्रमुख चौराहे अपनी बदसूरती पर खुद मुंह चुराने लगे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों, व्यापारियों को रिझाने के लिए शहर के पास कोई सुंदर चौक-चौराहा नहीं है। इसीलिए मन बहलाने के लिए किसी भी चौराहों पर आमजन का ठहराव नहीं है। पैदल या वाहनों से चलते समय लोग इन चौराहों की दुश्वारियों को निहारते हुए आगे बढ़ रहे हैं। एक दशक से ऊपर की अवधि बीतने को है, लेकिन इन चौराहों के सुंदरीकरण की कोई ठोस पहल होती नहीं दिखी।
इसके पहले एक दर्जन स्थानों पर महापुरुषों की प्रतिमाएं लगवाई गई थीं। कुछ ही दिनों के बाद वह भी उपेक्षित हो गईं। इन प्रतिमाओं की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। धूल की मोटी परत से महापुरुषों की प्रतिमाएं ढकी हुई हैं। समय बीता तो चौराहों का रंग देखरेख के अभाव में और फीका पड़ गया।
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गांधीनगर बाजार का मुख्य चौराहा पक्के है। यहां चौराहे पर ही सड़क की एक पटरी पर पुलिस चौकी है। इस चौराहे की पहचान के लिए यहां कुछ खास नहीं है। अनजान लोग नहीं समझ पाते हैं कि यह गांधीनगर चौक है। बस, यात्रियों और खरीदारों की भीड़ है और दुकानों की भरमार। जाम लगने के दौरान यह चौराहा ही गुम रहता है।
रेलवे स्टेशन चौराहे की स्थिति शुरू से बिगड़ी हुई है। इधर पांच साल में यहां स्थायी अतिक्रमण हटाकर चौराहे के क्षेत्रफल को बढ़ाया गया है। मगर, सुंदरीकरण के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। हरियाली, ट्रैफिक सिग्नल जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां किसी महापुरुष की प्रतिमा भी नहीं है। हर समय यह चौराहा वीरान सा रहता है।
रोडवेज तिराहे पर दो दशक पूर्व सरदार भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित कर छोटा सा पार्क बनाया गया था। मगर, अतिक्रमण के चलते यह स्थल भी रौनक नहीं बिखेर पाया। वर्तमान में नजदीक से निहारने पर यह पार्क दिखाई देता है। एक तरफ अतिक्रमण है तो दूसरी तरफ शौचालय। पार्क के अंदर की हरियाली गायब है।
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घोड़े पर बैठे नेहरू जी भी देख रहे बदहाली
रोडवेज से 50 मीटर दूर स्थित तिराहे पर घोड़े पर बैठे नेहरू जी की प्रतिमा गोलंबर के बीच बनाई गई है। मगर, यहां नियमित सफाई नहीं होती है। गोलंबर में हरियाली और लाइट की व्यवस्था बदहाल हो गई है। यहां सब्जियों की दुकान लगने से भीड़ जुट जाती है। बाकी समय घोड़े पर बैठे नेहरू जी अकेले यहां की बदहाली निहारते रहते हैं। इसके अलावा कंपनी बाग शहर के वीआईपी चौराहों में शुमार है। यहां एक दशक पहले सिख समुदाय की सहभागिता से गुरु गोविंद सिंह के निशान का निर्माण बीच चौराहे पर कराया गया था। इसके अलावा प्रकाश की जगमगाहट के साथ ट्रैफिक सिग्नल का इंतजाम हुआ। यह व्यवस्था बहुत दिनों तक चल नहीं पाई। वर्तमान में यह चौराहा बदहाल है। ट्रैफिक सिग्नल खराब है।
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बड़ेवन में आचार्य राम चंद्र शुक्ल की प्रतिमा उपेक्षित
एनएचएआई की सड़क से शहर में प्रवेश करते ही बड़ेवन चौराहा है। यहां पांच साल पहले आचार्य राम चंद्र शुक्ल की आदमकद प्रतिमा स्थापित हुई। चारों तरफ पार्क बनाया गया। इसके बाद इस स्थल को उपेक्षित छोड़ दिया गया। पार्क में एक भी पौधे नहीं हैं। अब यहां अवैध टैक्सी स्टैंड संचालित हो रहा है। सदर तहसील के पास फव्वारा चौराहा डेढ़ दशक पहले जिस सुंदरीकरा को प्राप्त किया था, आज वह खत्म हो चला है। यहां फव्वारा मशीन का अवशेष बचा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बदरंग हालत में है। फुलवारी भी गायब है। फल और टैक्सी वालों की भरमार है।
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शास्त्री चौक भी हो गया उपेक्षित
शास्त्री चौक भी उपेक्षित हो गया है। तत्कालीन सांसद ने यहां लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के पास तिरंगा लगवाया था। इसके बाद से इस चौराहे को विकसित नहीं किया गया है। बीडीए ने साल भर पहले किसान और शौर्य स्तंभ बनाने की योजना तैयार की थी। मगर, यह कागजों की होकर रह गई। शहर के प्रमुख चौराहों को संवारने के लिए पांच साल पहले तत्कालीन डीएम ने योजना तैयार कराई थी। इसके तहत प्रमुख चौराहों को निजी एवं सरकारी क्षेत्र के बैंक, व्यापारी संगठनों व अन्य कारपोरेट एजेंसियों को गोद लेने के लिए आह्वान किया गया। मगर, यह योजना रंग नहीं ला पाई। इसके बाद एडीजी गोरखपुर ने भी यहां भ्रमण के दौरान पुलिस अधिकारियों को चौराहों को विकसित करने के लिए प्रेरित किया था।
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को
महापुरुषों की प्रतिमाओं और चौराहों की नियमित सफाई कराई जाती है। समय-समय पर रंगरोगन भी होता है। जहां तक संदुरीकरण की बात है तो इसकी योजना बनाई जाएगी। -
सत्येंद्र कुमार सिंह, प्रभारी ईओ/एसडीएम।
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शास्त्री चौक पर जय जवान-जय किसान एवं शौर्य स्तंभ की स्थापना होनी थी। इसी बीच पीडब्ल्यूडी की ओर सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव आ गया। इसलिए निर्माण रोक दिया गया है।
-संदीप कुमार, एक्सईएन बीडीए
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कई बार चौराहों को सुंदर बनाने की बनी रणनीति, मगर धरातल पर नहीं उतर पाई योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर की पहचान बदरंग चौराहों से हो रही है। एनएचएआई की सड़क से शहर में प्रवेश करिए या रेल मार्ग से आने के बाद रेलवे स्टेशन के बाहर निकलिए या फिर रोडवेज से शहर की राह पकड़िए, हर जगह उजड़ा चमन सा दृश्य दिखाई पड़ रहा है। अस्त-व्यस्त चौराहे, चहुंओर गंदगी, धूल की मोटी परतों से ढकी महापुरुषों की प्रतिमाएं शहर के पिछड़ेपन का अहसास करा रही हैं। एक दशक से इन चौराहों पर विकास की नई लकीर नहीं खींची जा सकी है।
शहर के प्रमुख चौराहे अपनी बदसूरती पर खुद मुंह चुराने लगे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों, व्यापारियों को रिझाने के लिए शहर के पास कोई सुंदर चौक-चौराहा नहीं है। इसीलिए मन बहलाने के लिए किसी भी चौराहों पर आमजन का ठहराव नहीं है। पैदल या वाहनों से चलते समय लोग इन चौराहों की दुश्वारियों को निहारते हुए आगे बढ़ रहे हैं। एक दशक से ऊपर की अवधि बीतने को है, लेकिन इन चौराहों के सुंदरीकरण की कोई ठोस पहल होती नहीं दिखी।
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इसके पहले एक दर्जन स्थानों पर महापुरुषों की प्रतिमाएं लगवाई गई थीं। कुछ ही दिनों के बाद वह भी उपेक्षित हो गईं। इन प्रतिमाओं की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। धूल की मोटी परत से महापुरुषों की प्रतिमाएं ढकी हुई हैं। समय बीता तो चौराहों का रंग देखरेख के अभाव में और फीका पड़ गया।
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गांधीनगर बाजार का मुख्य चौराहा पक्के है। यहां चौराहे पर ही सड़क की एक पटरी पर पुलिस चौकी है। इस चौराहे की पहचान के लिए यहां कुछ खास नहीं है। अनजान लोग नहीं समझ पाते हैं कि यह गांधीनगर चौक है। बस, यात्रियों और खरीदारों की भीड़ है और दुकानों की भरमार। जाम लगने के दौरान यह चौराहा ही गुम रहता है।
रेलवे स्टेशन चौराहे की स्थिति शुरू से बिगड़ी हुई है। इधर पांच साल में यहां स्थायी अतिक्रमण हटाकर चौराहे के क्षेत्रफल को बढ़ाया गया है। मगर, सुंदरीकरण के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। हरियाली, ट्रैफिक सिग्नल जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां किसी महापुरुष की प्रतिमा भी नहीं है। हर समय यह चौराहा वीरान सा रहता है।
रोडवेज तिराहे पर दो दशक पूर्व सरदार भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित कर छोटा सा पार्क बनाया गया था। मगर, अतिक्रमण के चलते यह स्थल भी रौनक नहीं बिखेर पाया। वर्तमान में नजदीक से निहारने पर यह पार्क दिखाई देता है। एक तरफ अतिक्रमण है तो दूसरी तरफ शौचालय। पार्क के अंदर की हरियाली गायब है।
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घोड़े पर बैठे नेहरू जी भी देख रहे बदहाली
रोडवेज से 50 मीटर दूर स्थित तिराहे पर घोड़े पर बैठे नेहरू जी की प्रतिमा गोलंबर के बीच बनाई गई है। मगर, यहां नियमित सफाई नहीं होती है। गोलंबर में हरियाली और लाइट की व्यवस्था बदहाल हो गई है। यहां सब्जियों की दुकान लगने से भीड़ जुट जाती है। बाकी समय घोड़े पर बैठे नेहरू जी अकेले यहां की बदहाली निहारते रहते हैं। इसके अलावा कंपनी बाग शहर के वीआईपी चौराहों में शुमार है। यहां एक दशक पहले सिख समुदाय की सहभागिता से गुरु गोविंद सिंह के निशान का निर्माण बीच चौराहे पर कराया गया था। इसके अलावा प्रकाश की जगमगाहट के साथ ट्रैफिक सिग्नल का इंतजाम हुआ। यह व्यवस्था बहुत दिनों तक चल नहीं पाई। वर्तमान में यह चौराहा बदहाल है। ट्रैफिक सिग्नल खराब है।
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बड़ेवन में आचार्य राम चंद्र शुक्ल की प्रतिमा उपेक्षित
एनएचएआई की सड़क से शहर में प्रवेश करते ही बड़ेवन चौराहा है। यहां पांच साल पहले आचार्य राम चंद्र शुक्ल की आदमकद प्रतिमा स्थापित हुई। चारों तरफ पार्क बनाया गया। इसके बाद इस स्थल को उपेक्षित छोड़ दिया गया। पार्क में एक भी पौधे नहीं हैं। अब यहां अवैध टैक्सी स्टैंड संचालित हो रहा है। सदर तहसील के पास फव्वारा चौराहा डेढ़ दशक पहले जिस सुंदरीकरा को प्राप्त किया था, आज वह खत्म हो चला है। यहां फव्वारा मशीन का अवशेष बचा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बदरंग हालत में है। फुलवारी भी गायब है। फल और टैक्सी वालों की भरमार है।
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शास्त्री चौक भी हो गया उपेक्षित
शास्त्री चौक भी उपेक्षित हो गया है। तत्कालीन सांसद ने यहां लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के पास तिरंगा लगवाया था। इसके बाद से इस चौराहे को विकसित नहीं किया गया है। बीडीए ने साल भर पहले किसान और शौर्य स्तंभ बनाने की योजना तैयार की थी। मगर, यह कागजों की होकर रह गई। शहर के प्रमुख चौराहों को संवारने के लिए पांच साल पहले तत्कालीन डीएम ने योजना तैयार कराई थी। इसके तहत प्रमुख चौराहों को निजी एवं सरकारी क्षेत्र के बैंक, व्यापारी संगठनों व अन्य कारपोरेट एजेंसियों को गोद लेने के लिए आह्वान किया गया। मगर, यह योजना रंग नहीं ला पाई। इसके बाद एडीजी गोरखपुर ने भी यहां भ्रमण के दौरान पुलिस अधिकारियों को चौराहों को विकसित करने के लिए प्रेरित किया था।
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महापुरुषों की प्रतिमाओं और चौराहों की नियमित सफाई कराई जाती है। समय-समय पर रंगरोगन भी होता है। जहां तक संदुरीकरण की बात है तो इसकी योजना बनाई जाएगी। -
सत्येंद्र कुमार सिंह, प्रभारी ईओ/एसडीएम।
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शास्त्री चौक पर जय जवान-जय किसान एवं शौर्य स्तंभ की स्थापना होनी थी। इसी बीच पीडब्ल्यूडी की ओर सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव आ गया। इसलिए निर्माण रोक दिया गया है।
-संदीप कुमार, एक्सईएन बीडीए