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करोड़ों खर्च फिर भी पानी बहता सड़क पर

Thu, 22 Feb 2018 12:28 AM IST
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा Updated Thu, 22 Feb 2018 12:28 AM IST
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Crores flowing in the creek construction, do not shed water
जाम नाला। - फोटो : बस्ती
बस्ती। शहर का गंदा पानी बाहर निकालने के लिए कई योजनाएं आईं, हर जन प्रतिनिधि इसके लिए आश्वासन देता रहा। बजट भी मिलता रहा लेकिन शहर का पानी नाले से हमेशा उफान मारता रहा, जिससे शहर वासी परेशान हैं। इसके लिए आए दिन अधिकारियों से गुहार भी लगाते रहते हैं लेकिन वहां से सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता। नाला हमेशा उफान मारते रहते हैं और लोग सड़ांध की दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर हो गए हैं।
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शहर में गांधी नगर, मालवीय मार्ग, कंपनी बाग, रोडवेज, दक्षिण दरवाजा, सुर्ती हट्टा, रेलवे स्टेशन रोड व पांडेय बाजार में नाला है। इन नालों का लिंक के लिए गांधी नगर में दो तो पुरानी बस्ती में भी दो बड़े नाले हैं, जो शहरी गंदे पानी को बाहर निकालते हैं।  शहर का गांधी नगर इलाका ही एक ऐसा है, जहां नालों का निर्माण वर्षों पूर्व कराया गया था जो गुणवत्तापूर्ण है। यानी यहां छिटपुट स्थानों को छोड़ दिया जाए तो पानी बह जाता है। 
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शहर के मालवीय मार्ग पर करीब 10 किमी नाला निर्माण दोनों पटरियों पर हुआ है। इन नालों की हालत ठीक नहीं है। यहां अक्सर नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं। बारिश होने पर तो हालत और दयनीय हो जाती है, क्योंकि नालों का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है और घरों में इसका पानी घुसने लगता है। यहां बनाए गए नाले अधूरे हैं। मालवीय रोड पर रौता चौराहा पर नाला है ही नहीं, जबकि ब्लाक रोड पर नाला बना है। यही हाल रौता से आगे बढ़ने पर है। बिजली दफ्तर के निकट नाला को इतना संकरा कर दिया गया है कि यह नाली का आकार ले लिया है तो दूसरी पटरी पर दबंगों के चलते नाले को आड़ा तिरछा कर दिया गया। नतीजतन यहां पानी ऊपर तक आ गया है। उस पर कूड़ा करकट के चलते नाला जाम रहता है। 
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यहां भी अधूरा नाला निर्माण तो हुआ ही है मानक को भी दर किनार कर दिया गया है। ऐसे में बहाव न होने के कारण यहां सड़ांध उठती है। बारिश के दिनो तो यह नाला ओवरफ्लो हो अधिकारियों के आवास में भी घुस जाता है। 

शहर का व्यवसायिक इलाका सुर्ती हट्टा भी नाला की अव्यवस्था की मार झेल रहा है। यहां लिंक नालियां ओवरफ्लो हैं तो नालों में पानी जाम है। बहाव न होने कारण गर्मी के दिनों में बीमारियों की आशंका भी रहती है।

- शहर के पानी निकास को व्यवस्थित करने के लिए नगर पालिका ने पांच वर्ष में करीब दस करोड़ रुपये खर्च किए,मगर इसका परिणाम शून्य रहा। आज भी स्थिति जस की तस है। यह हैं आंकड़े 
नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2012 में शहर के मालवीय रोड, रोडवेज, दक्षिण दरवाजा, स्टेशन रोड सुर्ती हट्टा तथा कंपनी बाग व आवास विकास कालोनी में नाला निर्माण का कार्य अरबन डेवलपमेंट स्कीम फार स्माल एंड मीडियम टाउन योजना से शुरू कराया। इस पर पांच करोड़ रुपये खर्च हुए, मगर नाला फिर भी आधा अधूरा रहा। करीब दो वर्ष तक चले कार्य में पालिका ने कार्य का पूरा भुगतान कर दिया। 
- वर्ष 2014 से 2016 तक नाला के सुदृढ़ीकरण को लेकर मालवीय मार्ग व कंपनी बाग व आवास विकास कालोनी में कार्य कराया गया। इस पर स्टांप शुल्क व स्थापना मद से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये व्यय कर नाला मरम्मत व निर्माण कार्य हुआ, मगर नालों के बहाव में रुकावट बरकरार रही। 
- वर्ष 2017 में जब नवागत पालिकाध्यक्ष रुपम मिश्रा ने कार्य भार ग्रहण किया तो उन्होंने दिसंबर माह में 14वें वित्त से तुरकहिया, रहमतगंज, रोडवेज से कोतवाली मार्ग पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर नाला निर्माण कराया है। यह कार्य अभी चल रहा है। 

नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष रुपम मिश्रा ने कहा कि नाला निर्माण के नाम पर जो कुछ भी हुआ उसकी जांच कराई जाएगी। पांच वर्ष में करीब दस करोड़ खर्च किया गया है, मगर आज भी स्थिति जस की तस है। प्रयास है कि शहर में पानी निकास की व्यवस्था चाक चौबंद हो जाए। सभी नालों की सफाई का निर्देश दिया गया है। बारिश से पहले सफाई हो जाएगी। 

 
नगर पालिका परिषद के ईओ ओम प्रकाश ने कहा कि नालों की दशा खराब है। यह पालिका के संज्ञान में है। पानी बहाव न होने का कारण इसमें जमा सिल्ट है। इसका सर्वे किया गया है। जल्द ही इसकी सफाई करा कर बहाव को दुरुस्त कराया जाएगा। इसके बाद जरूरत के मुताबिक निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। शहरी व्यवस्था दुरुस्त करने का प्रयास लगातार जारी है।
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