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तीन छप्पर, अनाज राख
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:37 AM IST
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नगर थाना क्षेत्र के अईलिया गांव में आग को बुझाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बहादुरपुर(ब्यूरो)। अइलिया गांव में भोजन बनाते समय सिलिंडर का पाइप फटने से आग लग गई। बजाय आग बुझाने के सिलेंडर फटने के डर से लोग भाग लिए। काफी देर बाद जब खतरा कम लगा तब आग बुझाने लगे। इस बीच तीन छप्पर जल गए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुअा।
गांव के दिनेश चंद्र ओझा के पिता की मंगलवार को बरसी थी। भोज कराने के लिए बाहर छप्पर में भोजन बनाया जा रहा था। दोपहर करीब पौने दो बजे सिलेंडर का पाइप गरम होकर फट गया। गैस रिसाव होते ही उसमें आग पकड़ लिया। यह देख भोजन पका रहे कारीगर व अन्य लोग भाग खड़े हुए। जिससे आग मड़ई में भी लग गई।
जब तक लोग पहुंचकर उसे बुझाते, तब तक आसपास के छप्परों में रखा करीब पचास कुंटल भूसा,चार साइकिल, 30 क्विंटल गेहूं आदि अनाज व अन्य घरेलू उपयाग की वस्तुएं जल गईं। हल्का लेखपाल व पुलिस पहुंच गई और नुकसान का आंकलन किया। बहादुरपुर ब्लाक प्रमुख की ओर से अग्निपीड़ितों को मदद दी गई। प्रमुख प्रतिनिधि महेंद्र नाथ यादव घटना के कुछ देर बाद गांव में पहुंचे और लोगों का ढांढस बंधाया।
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एक्सपाइरी की ऐसे करें जांच
प्रत्येक सिलिंडर पर एबीसीडी शब्द लिखे होते हैं। ए जनवरी से मार्च तक, बी अप्रैल से जून तक, सी जुलाई से सितंबर तक व डी अक्तूबर से दिसंबर तक होता है। इसके साथ वर्ष भी लिखा होता है, जो वर्ष होता है। वहीं उस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है।
गैस एजेंसी की जिम्मेदारी
रसोई गैस सिलिंडर एक्सपायरी डेट के हैं, तो गैस एजेंसी की जिम्मेवारी होती है कि वो ऐसे सिलेंडरों की छंटनी करें और संबंधित पेट्रोलियम कंपनी में भेजे। जांच के बाद अवधि बढ़ाई जाती है। इसी तरह उसके पाइप को भी समय पर बदलना चाहिए।
कंपनी से बीमा
प्रत्येक गैस उपभोक्ता का गैस कनेक्शन लेते समय कंपनी द्वारा इंश्योरेंस किया जाता है। हालांकि इसके कुछ नियम जरूर हैं। इसमें सिलेंडर का घरेलू प्रयोग होना, आईएसआई मार्का का रेगुलेटर और कंपनी द्वारा दी गई आईएसआई मार्का की पाइप होना जरूरी है। हादसे में मारे जाने व घायल होने दोनों ही अवस्था में क्लेम लिया जा सकता है।
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गांव के दिनेश चंद्र ओझा के पिता की मंगलवार को बरसी थी। भोज कराने के लिए बाहर छप्पर में भोजन बनाया जा रहा था। दोपहर करीब पौने दो बजे सिलेंडर का पाइप गरम होकर फट गया। गैस रिसाव होते ही उसमें आग पकड़ लिया। यह देख भोजन पका रहे कारीगर व अन्य लोग भाग खड़े हुए। जिससे आग मड़ई में भी लग गई।
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जब तक लोग पहुंचकर उसे बुझाते, तब तक आसपास के छप्परों में रखा करीब पचास कुंटल भूसा,चार साइकिल, 30 क्विंटल गेहूं आदि अनाज व अन्य घरेलू उपयाग की वस्तुएं जल गईं। हल्का लेखपाल व पुलिस पहुंच गई और नुकसान का आंकलन किया। बहादुरपुर ब्लाक प्रमुख की ओर से अग्निपीड़ितों को मदद दी गई। प्रमुख प्रतिनिधि महेंद्र नाथ यादव घटना के कुछ देर बाद गांव में पहुंचे और लोगों का ढांढस बंधाया।
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एक्सपाइरी की ऐसे करें जांच
प्रत्येक सिलिंडर पर एबीसीडी शब्द लिखे होते हैं। ए जनवरी से मार्च तक, बी अप्रैल से जून तक, सी जुलाई से सितंबर तक व डी अक्तूबर से दिसंबर तक होता है। इसके साथ वर्ष भी लिखा होता है, जो वर्ष होता है। वहीं उस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है।
गैस एजेंसी की जिम्मेदारी
रसोई गैस सिलिंडर एक्सपायरी डेट के हैं, तो गैस एजेंसी की जिम्मेवारी होती है कि वो ऐसे सिलेंडरों की छंटनी करें और संबंधित पेट्रोलियम कंपनी में भेजे। जांच के बाद अवधि बढ़ाई जाती है। इसी तरह उसके पाइप को भी समय पर बदलना चाहिए।
कंपनी से बीमा
प्रत्येक गैस उपभोक्ता का गैस कनेक्शन लेते समय कंपनी द्वारा इंश्योरेंस किया जाता है। हालांकि इसके कुछ नियम जरूर हैं। इसमें सिलेंडर का घरेलू प्रयोग होना, आईएसआई मार्का का रेगुलेटर और कंपनी द्वारा दी गई आईएसआई मार्का की पाइप होना जरूरी है। हादसे में मारे जाने व घायल होने दोनों ही अवस्था में क्लेम लिया जा सकता है।