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पूर्व विधायक वीरेंद्र शाही के बेटे समेत दो की सड़क हादसे में मौत
basti
Updated Sat, 17 Mar 2018 11:50 PM IST
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दुर्घटना में क्षतिग्रस्रूत हुई गाड़ी।
- फोटो : amar ujala
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गायघाट। गोरखपुर के पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही के बेटे विवेक प्रताप शाही (32) की तेज रफ्तार फार्च्यूनर कार शनिवार भोर में कलवारी थाना क्षेत्र के पाऊ नर्सरी मोड़ पर बेकाबू होकर पेड़ से जा भिड़ी। हादसे में गाड़ी चला रहे विवेक और साथी अमृतराज सिंह (20) की मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि गाड़ी बहुत तेज रफ्तार से जा रही थी जो नर्सरी मोड़ पर अनियंत्रित होकर जामुन के पेड़ से टकरा गई। गाड़ी विवेक प्रताप शाही खुद चला रहे थे। उनके सहयोगी अमृतराज सिंह बैठे थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को ही गोरखपुर में गाड़ी खरीदी गई थी। बड़हलगंज थाना क्षेत्र के महुआपार निवासी विवेक प्रताप शाही शुक्रवार रात करीब दो बजे मोहद्दीपुर स्थित शक्ति भवन से अपने सहयोगी अमृतराज सिंह के साथ राम जानकी मार्ग होते हुए लखनऊ जा रहे थे। भोर में चार बजे हुई दुर्घटना की जानकारी राहगीरों ने डायल 100 पुलिस को दी। आननफानन में पहुंचे एसओ कलवारी शिवाकांत मिश्र ने दोनों को गाड़ी से निकलवाया और कुदरहा पीएचसी ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अमृतराज सिंह की जेब से पर्स व मोबाइल मिला। आधार कार्ड पर लिखे पते पर उनके परिजनों को सूचना दी गई। मौत की सूचना मिलते ही कलवारी थाने पर परिवार व रिश्तेदारों का तांता लग गया। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
घर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे विवेक
वर्ष 1997 में पिता पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की मृत्यु के बाद कम उम्र में ही विवेक शाही ने घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी। करीब आठ साल पहले उनकी शादी बस्ती जिले के लालगंज क्षेत्र के भीटिहा गांव निवासी राजेश्वर बक्स पाल की बेटी शेफाली से हुआ था। दो साल पहले विवेक के दिव्यांग व अविवाहित बड़े भाई दुर्गेश प्रताप शाही की मृत्यु हुई थी। घटनास्थल पर पहुंचीं माता गिरजेश शाही, ससुर राजेश्वर बक्स पाल, पत्नी शेफाली, साढ़े तीन साल की बेटी पीहू का रो-रो कर बुरा हाल था।
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गोरखुर में बीए के छात्र थे अमृतराज
गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के राप्तीनगर निवासी अमृतराज गोरखपुर यूनिवर्सिटी में बीए तृतीय वर्ष के छात्र थे। अमृतराज के पिता संजय सिंह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सेवा दल के पूर्व राष्ट्रीय संगठक हैं। बड़े भाई पुष्पराज सिंह, माता सत्या सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं। इन लोगों के विलाप से सबकी आंखें नम हो गई थीं।
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भाजपा नेताओं और रिश्तेदारों का लगा तांता
पूर्वांचल की राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक स्व. वीरेंद्र प्रताप शाही की जिले में आधा दर्जन से अधिक रिश्तेदारियां हैं। मौत की जानकारी होते ही कलवारी थाने पर रिश्तेदारों के अलावा कई भाजपा नेता भी पहुंच गए। जिसमें अभय पाल, आशुतोष पाल, गोपेश पाल, कबीर तिवारी, लाल वीरेंद्र प्रताप पाल के अलावा सैकड़ों लोग शामिल थे। विवेक के ससुर राजेश्वर बक्स पाल बताते हैं कि विवेक बहुत सलीके से गाड़ी चलाते थे। उनका कभी एक्सीडेंट नहीं हुआ था। विवेक की मौत के बाद घर में माता गिरजेश पाल (65), पत्नी शेफाली (28) और साढ़े तीन साल की बेटी पीहू ही बचे हैं।
अंधे मोड़ पर कई की जा चुकी है जान
कलवारी थानाक्षेत्र के रामजानकी मार्ग स्थित पाऊ के अंधे नर्सरी मोड़ पर दुर्घटना में दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जबकि आए दिन तमाम दुर्घटनाओं से लोग चोटहिल होते रहते है। अंधे मोड़ के किनारे लगे पेड़ों को न तो काटा गया और न ही संकेतक ही लगाए गए।
राम जानकी मार्ग
घटनास्थल पर जुटे लोगों के बीच राम जानकी मार्ग से होकर लखनऊ के रास्ते को लेकर तमाम चर्चाएं होती रहीं। लोगों का कहना था कि गोरखपुर से लखनऊ फोरलेन है लेकिन राम जानकी मार्ग से निकलने की वजह समझ नहीं आ रही। विवेक के ससुर राजेश्वर बक्स पाल का कहना है कि शुक्रवार को गाड़ी खरीदकर रात नौ बजे रोडवेज बस से मैं तो घर आ गया लेकिन विवेक मेरे घर नहीं आए थे। ऐसे में इस मार्ग को क्यों चुना, यह बात समझ में नहीं आई। लोगों के मुताबिक विवेक प्रताप शाही गोलघर गोरखपुर स्थित पेट्रोल पंप के साथ गांव महुआपार में स्थापित इंटर कॉलेज के संचालन के अलावा ठेकेदारी का काम करते थे। इस काम में संतकबीरनगर के रामजानकी मार्ग स्थित रामपुर के सुशील पाल उकनी मदद करते थे।
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि गाड़ी बहुत तेज रफ्तार से जा रही थी जो नर्सरी मोड़ पर अनियंत्रित होकर जामुन के पेड़ से टकरा गई। गाड़ी विवेक प्रताप शाही खुद चला रहे थे। उनके सहयोगी अमृतराज सिंह बैठे थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को ही गोरखपुर में गाड़ी खरीदी गई थी। बड़हलगंज थाना क्षेत्र के महुआपार निवासी विवेक प्रताप शाही शुक्रवार रात करीब दो बजे मोहद्दीपुर स्थित शक्ति भवन से अपने सहयोगी अमृतराज सिंह के साथ राम जानकी मार्ग होते हुए लखनऊ जा रहे थे। भोर में चार बजे हुई दुर्घटना की जानकारी राहगीरों ने डायल 100 पुलिस को दी। आननफानन में पहुंचे एसओ कलवारी शिवाकांत मिश्र ने दोनों को गाड़ी से निकलवाया और कुदरहा पीएचसी ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अमृतराज सिंह की जेब से पर्स व मोबाइल मिला। आधार कार्ड पर लिखे पते पर उनके परिजनों को सूचना दी गई। मौत की सूचना मिलते ही कलवारी थाने पर परिवार व रिश्तेदारों का तांता लग गया। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
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घर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे विवेक
वर्ष 1997 में पिता पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की मृत्यु के बाद कम उम्र में ही विवेक शाही ने घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी। करीब आठ साल पहले उनकी शादी बस्ती जिले के लालगंज क्षेत्र के भीटिहा गांव निवासी राजेश्वर बक्स पाल की बेटी शेफाली से हुआ था। दो साल पहले विवेक के दिव्यांग व अविवाहित बड़े भाई दुर्गेश प्रताप शाही की मृत्यु हुई थी। घटनास्थल पर पहुंचीं माता गिरजेश शाही, ससुर राजेश्वर बक्स पाल, पत्नी शेफाली, साढ़े तीन साल की बेटी पीहू का रो-रो कर बुरा हाल था।
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गोरखुर में बीए के छात्र थे अमृतराज
गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के राप्तीनगर निवासी अमृतराज गोरखपुर यूनिवर्सिटी में बीए तृतीय वर्ष के छात्र थे। अमृतराज के पिता संजय सिंह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सेवा दल के पूर्व राष्ट्रीय संगठक हैं। बड़े भाई पुष्पराज सिंह, माता सत्या सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं। इन लोगों के विलाप से सबकी आंखें नम हो गई थीं।
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भाजपा नेताओं और रिश्तेदारों का लगा तांता
पूर्वांचल की राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक स्व. वीरेंद्र प्रताप शाही की जिले में आधा दर्जन से अधिक रिश्तेदारियां हैं। मौत की जानकारी होते ही कलवारी थाने पर रिश्तेदारों के अलावा कई भाजपा नेता भी पहुंच गए। जिसमें अभय पाल, आशुतोष पाल, गोपेश पाल, कबीर तिवारी, लाल वीरेंद्र प्रताप पाल के अलावा सैकड़ों लोग शामिल थे। विवेक के ससुर राजेश्वर बक्स पाल बताते हैं कि विवेक बहुत सलीके से गाड़ी चलाते थे। उनका कभी एक्सीडेंट नहीं हुआ था। विवेक की मौत के बाद घर में माता गिरजेश पाल (65), पत्नी शेफाली (28) और साढ़े तीन साल की बेटी पीहू ही बचे हैं।
अंधे मोड़ पर कई की जा चुकी है जान
कलवारी थानाक्षेत्र के रामजानकी मार्ग स्थित पाऊ के अंधे नर्सरी मोड़ पर दुर्घटना में दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जबकि आए दिन तमाम दुर्घटनाओं से लोग चोटहिल होते रहते है। अंधे मोड़ के किनारे लगे पेड़ों को न तो काटा गया और न ही संकेतक ही लगाए गए।
राम जानकी मार्ग
घटनास्थल पर जुटे लोगों के बीच राम जानकी मार्ग से होकर लखनऊ के रास्ते को लेकर तमाम चर्चाएं होती रहीं। लोगों का कहना था कि गोरखपुर से लखनऊ फोरलेन है लेकिन राम जानकी मार्ग से निकलने की वजह समझ नहीं आ रही। विवेक के ससुर राजेश्वर बक्स पाल का कहना है कि शुक्रवार को गाड़ी खरीदकर रात नौ बजे रोडवेज बस से मैं तो घर आ गया लेकिन विवेक मेरे घर नहीं आए थे। ऐसे में इस मार्ग को क्यों चुना, यह बात समझ में नहीं आई। लोगों के मुताबिक विवेक प्रताप शाही गोलघर गोरखपुर स्थित पेट्रोल पंप के साथ गांव महुआपार में स्थापित इंटर कॉलेज के संचालन के अलावा ठेकेदारी का काम करते थे। इस काम में संतकबीरनगर के रामजानकी मार्ग स्थित रामपुर के सुशील पाल उकनी मदद करते थे।