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घोटाले में सेक्रेटरी निलंबित
अमर उजाला/बस्ती
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:47 PM IST
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विकास खंड रामनगर के ग्राम पंचायत परसोहिया में शौचालय निर्माण के नाम पर आए धन का दुरुपयोग करने के मामले में डीएम के आदेश पर डीपीआरओ ने गांव के पंचायत सेक्रेटरी बीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। डीएम के निर्देश पर इसकी जांच जिला परियोजना समन्वयक आरएस सिंह ने की थी।
सेक्रेटरी पर आरोप है कि जो 102 शौचालयों के निर्माण के मद में इस गांव के लाभार्थियों को 12.24 लाख रुपये दो साल पहले ही दिया गया था, उसका सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया।
जिसके चलते शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका। पहली किस्त देने में भी लाभार्थियों से सुविधा शुल्क ली गई। इसकी पुष्टि जांच के दौरान लाभार्थियों ने जांच अधिकारी के सामने की।
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प्रभारी डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने बताया कि सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत को पहले नोटिस जारी किया गया। उसके बाद डीएम के आदेश पर निलंबित कर दिया गया। बताया कि यह मामला दो साल पहले का है।
इसमें शिविर लगाकर 102 लोंगों को शौचालय निर्माण के लिए धन जारी किया गया था। लेकिन जब धन व्यय करने की जब कार्यपूर्ति सेक्रेटरी से मांगी गई तो नहीं दिया गया।
जांच में 84 लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें आज तक पूरा धन दिया ही नहीं गया, जिसके चलते शौचालय अपूर्ण हैं। 18 ऐसे लाभार्थी सामने आए जिन्हें एक भी किस्त नहीं दिया गया। इसके बाद जब स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के शौचालयों की जांच की गई तो पता चला कि मरम्मत और साफ सफाई के अभाव में शौचालय प्रयोग ही करने लायक नहीं हैं।
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सेक्रेटरी पर आरोप है कि जो 102 शौचालयों के निर्माण के मद में इस गांव के लाभार्थियों को 12.24 लाख रुपये दो साल पहले ही दिया गया था, उसका सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया।
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जिसके चलते शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका। पहली किस्त देने में भी लाभार्थियों से सुविधा शुल्क ली गई। इसकी पुष्टि जांच के दौरान लाभार्थियों ने जांच अधिकारी के सामने की।
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प्रभारी डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने बताया कि सेक्रेटरी और एडीओ पंचायत को पहले नोटिस जारी किया गया। उसके बाद डीएम के आदेश पर निलंबित कर दिया गया। बताया कि यह मामला दो साल पहले का है।
इसमें शिविर लगाकर 102 लोंगों को शौचालय निर्माण के लिए धन जारी किया गया था। लेकिन जब धन व्यय करने की जब कार्यपूर्ति सेक्रेटरी से मांगी गई तो नहीं दिया गया।
जांच में 84 लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें आज तक पूरा धन दिया ही नहीं गया, जिसके चलते शौचालय अपूर्ण हैं। 18 ऐसे लाभार्थी सामने आए जिन्हें एक भी किस्त नहीं दिया गया। इसके बाद जब स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के शौचालयों की जांच की गई तो पता चला कि मरम्मत और साफ सफाई के अभाव में शौचालय प्रयोग ही करने लायक नहीं हैं।