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सरकारी जमीन को दर्ज किया स्वयं और दूसरों के नाम

Sun, 18 Nov 2018 12:10 AM IST
basti
basti Updated Sun, 18 Nov 2018 12:10 AM IST
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lekhpal taken goverment jamin by fraud
crime - फोटो : pexels.com
बस्ती। कागज में हेरफेर कर जमीन हड़पने के यूं तो तमाम मामले आते हैं, मगर शहर में स्थित सरकारी जमीन का एक बड़ा घोटाला प्रकाश में आया है। इस मामले में राजस्व परिषद के अध्यक्ष से भी शिकायत की गई है। प्रकरण में पिछले दो साल से जांच भी लंबित है। शहर में तैनाती के दौरान एक लेखपाल ने दो स्थानों की सरकारी जमीन को स्वयं के अलावा अलग-अलग नामों से दर्ज कर दिया है। हालांकि, प्रकरण की जांच दो साल से चल रही है, मगर अब तक इसका कोई परिणाम नहीं आया है। जांच अधिकारी एएसडीएम रमेश कुमार ने प्रकरण में जांच की बात कहकर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। 
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राजस्व परिषद लखनऊ को की गई शिकायत में कहा गया है कि शहर में कटरा एवं सिविल लाइंस में नियुक्ति के दौरान करोड़ों की सरकारी जमीन की हेराफेरी की गई है। कटरा पानी टंकी के सामने स्थित पालिका का कांजी हाउस गाटा संख्या 20, खाता संख्या 52 की एक बीघा, पांच बिस्वा, छह धुर जमीन पर कई के नाम गलत तरीके से दर्ज कर दिए गए हैं। यही नहीं इस जमीन पर तत्कालीन लेखपाल ने कब्जा भी करा दिया। इसके अलावा कलेक्ट्री कचहरी गाटा संख्या 177 खाता संख्या 51 की जमीन 26 बीघा, दो बिस्वा 12 धुर का आवासीय पट्टा कर दिया गया है। लेखपाल ने स्वयं के नाम से गाटा संख्या 74/11 जिसका रकबा एक बिस्वा 10 धुर है को भी अपने नाम से करा लिया है। यही नहीं तैनाती स्थल महुड़र में भी जमीन का खेल किया गया। यहां तो जमीन मालिक को मृतक दिखाकर उनके नाम पर दूसरों का नाम दर्ज किया गया है। इसकी भनक लगने के बाद जमीन के मालिकों ने शिकायत की। इस पर कानूनगो ने फिर से उनका नाम दर्ज कर दिया। जबकि यह दुरुस्तीकरण नियमानुसार 229बी में मुकदमा दर्ज होने के बाद किया जाता है। लेखपाल पर आरोप है कि पटखौली में तैनाती के दौरान उन्होंने 12 नवंबर 91 को एक बिस्वा दस धुर जमीन में भी हेराफेरी की है।
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डीएम बोले 
शहरी क्षेत्र में स्थित कांजी हाउस व कलेक्ट्रेट के जमीन घोटाले मामले को डीएम डॉ. राजशेखर ने गंभीरता से लिया है। कहा कि यह प्रकरण संज्ञान में आ गया है। इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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