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मुंडेरवा थानेदार की जांच का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 May 2016 12:08 AM IST
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- फोटो : amarujala
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बस्ती। लूट के मुकदमे का अल्पीकरण करने के मामले में आईजी ने मुंडेरवा (बस्ती) के थानेदार की जांच करने का एसपी को निर्देश दिया है। सोमवार को क्षेत्र में हुई 10 हजार की लूट के मामले में एसओ ने छिनैती का मुकदमा दर्ज किया था। दिनदहाड़े हुई इस घटना को गंभीरता से न लेने वाले थानेदार की कार्यप्रणाली को आईजी ने बदमाशों का हौसला बढ़ाने वाला कदम बताया है। उन्होंने 15 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट जोन आफिस भेजने को कहा है।
मुंडेरवा, हुसेमऊ के रहने वाले रामचंद्र चौधरी सोमवार की दोपहर बैंक से 10 हजार रुपये निकालकर बाइक से घर लौट रहे थे। तुर्कवलिया के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने धक्का देकर गिराने के साथ ही उनका झोला लूट लिया था। एसओ ने लूट की जगह छिनैती का मामला दर्ज किया। मंगलवार को मामले की जानकारी होने पर आईजी ने एसपी बस्ती कृपाशंकर सिंह से इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। उन्होंने अपराध का अल्पीकरण करने वाले एसओ मुंडेरवा की कार्यप्रणाली की जांच कराके 15 दिन के भीतर जोन आफिस को अवगत कराने का निर्देश दिया।
लूट और छिनैती में अंतर
लूट के मुकदमे में आईपीसी की धारा 392 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। इसमें दस साल के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। घटना अगर सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच होती है तो 14 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि छिनैती के मुकदमे में आईपीसी की धारा 356 के तहत केस दर्ज होता है। इस मामले में दो साल की सजा का प्रावधान है।
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मुंडेरवा, हुसेमऊ के रहने वाले रामचंद्र चौधरी सोमवार की दोपहर बैंक से 10 हजार रुपये निकालकर बाइक से घर लौट रहे थे। तुर्कवलिया के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने धक्का देकर गिराने के साथ ही उनका झोला लूट लिया था। एसओ ने लूट की जगह छिनैती का मामला दर्ज किया। मंगलवार को मामले की जानकारी होने पर आईजी ने एसपी बस्ती कृपाशंकर सिंह से इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। उन्होंने अपराध का अल्पीकरण करने वाले एसओ मुंडेरवा की कार्यप्रणाली की जांच कराके 15 दिन के भीतर जोन आफिस को अवगत कराने का निर्देश दिया।
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लूट और छिनैती में अंतर
लूट के मुकदमे में आईपीसी की धारा 392 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। इसमें दस साल के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। घटना अगर सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच होती है तो 14 साल तक की सजा हो सकती है, जबकि छिनैती के मुकदमे में आईपीसी की धारा 356 के तहत केस दर्ज होता है। इस मामले में दो साल की सजा का प्रावधान है।
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