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खुशी के पटाखे से जल गईं खुशियां
अमर उजाला बस्ती
Updated Sat, 30 Apr 2016 12:38 AM IST
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अाग बुझाने के लिए पानी लेते लाेग।
- फोटो : अमर उजाला
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तुर्कीपुर गांव में खुशी के मौके पर छूटे पटाखों ने गांववालों की खुशियां जला डालीं।
आग में फंसकर दो बच्चियां जिंदा जलने और एक युवक गंभीर रूप से झुलसने से पूरे गांव में मातम छा गया। आग ने मायके में चचेरी बहन की शादी में व्यस्त मिश्री उर्फ सीमा की गोद उजाड़ डाली। हादसे के बाद वह रह-रहकर बेहोश हो जा रही है।
सीमा की शादी गौर थाना के रामापुर गांव में सुनील से आठ वर्ष पहले शादी हुई थी। वह डेढ़ माह पहले मायके में मां माया देवी (60)की मौत के बाद घर पर भाइयों की देखभाल करने आई थी। सीमा रो-रोकर अपनों से यही पूछ रही है कि परदेस से लौटने के बाद वह पति को क्या जवाब देगी। पति से दूर रहते हुए यही बच्चियां उसके जीने का सहारा थीं। लेकिन खुशियों के ‘शोर’ ने उसे पूरे जीवन भर का शोक दे दिया।
गुरुवार को चाचा राम लखन के लड़की की शादी समारोह में शामिल होने गई थी। सीमा के पिता रामराज व राम लखन दोनों भाइयों का घर सटे ही है। जब सीमा शादी समारोह में व्यस्त थी। उसी बीच बच्चियां घर जाकर सो गई। इससे आग लगने के समय मासूमों का पता नहीं चला। जब आग की चपेट में आकर बच्चियों ने चीखना शुरू किया तब लोग जान पाए।
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गांव के धर्मेन्द्र कुमार पहले टीनशेड हटाकर दोनों मासूमों को बाहर निकाला। उसके बाद अपनी भैंस को बचाते वक्त धर्मेन्द्र भी झुलस गए। खुशी के इजहार में हुई आतिशबाजी ने पूरे गांव का माहौल गमगीन कर दिया।
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आग में फंसकर दो बच्चियां जिंदा जलने और एक युवक गंभीर रूप से झुलसने से पूरे गांव में मातम छा गया। आग ने मायके में चचेरी बहन की शादी में व्यस्त मिश्री उर्फ सीमा की गोद उजाड़ डाली। हादसे के बाद वह रह-रहकर बेहोश हो जा रही है।
सीमा की शादी गौर थाना के रामापुर गांव में सुनील से आठ वर्ष पहले शादी हुई थी। वह डेढ़ माह पहले मायके में मां माया देवी (60)की मौत के बाद घर पर भाइयों की देखभाल करने आई थी। सीमा रो-रोकर अपनों से यही पूछ रही है कि परदेस से लौटने के बाद वह पति को क्या जवाब देगी। पति से दूर रहते हुए यही बच्चियां उसके जीने का सहारा थीं। लेकिन खुशियों के ‘शोर’ ने उसे पूरे जीवन भर का शोक दे दिया।
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गुरुवार को चाचा राम लखन के लड़की की शादी समारोह में शामिल होने गई थी। सीमा के पिता रामराज व राम लखन दोनों भाइयों का घर सटे ही है। जब सीमा शादी समारोह में व्यस्त थी। उसी बीच बच्चियां घर जाकर सो गई। इससे आग लगने के समय मासूमों का पता नहीं चला। जब आग की चपेट में आकर बच्चियों ने चीखना शुरू किया तब लोग जान पाए।
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गांव के धर्मेन्द्र कुमार पहले टीनशेड हटाकर दोनों मासूमों को बाहर निकाला। उसके बाद अपनी भैंस को बचाते वक्त धर्मेन्द्र भी झुलस गए। खुशी के इजहार में हुई आतिशबाजी ने पूरे गांव का माहौल गमगीन कर दिया।