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सरकारी भूमि पर इमारत, प्रशासन बेखबर

Tue, 18 Sep 2018 12:14 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:14 AM IST
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सरकारी भूमि पर इमारत, प्रशासन बेखबर
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सरकारी भूमि पर भवन, प्रशासन बेखबर
नगर पंचायत हर्रैया की जमीन कब्जाने की होड़
जानकारी होते ही निमार्ण कार्य रोका गया : ईओ
अमर उजाला ब्यूरो
हर्रैया। भूमाफिया पर नकेल का फरमान कागज तक सीमित होकर रह गया है। हर्रैया तहसील प्रशासन के नाक के नीचे नगर पंचायत की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे की होड़ है। एक ने तो पक्का मकान तक बना लिया। अब अधिशाषी अधिकारी कह रहे हैं कि निर्माण ढहाने के लिए कानूनी सहायता ली जा रही है।

योगी सरकार के भूमाफिया पर नकेल कसने के फरमान को प्रशासनिक अमला ही नजरअंदाज करने में लगा है। सरकारी जमीन पर कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। अब जब मामला उजागर हुआ तो नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी निर्माण ढहाने के लिए कानूनी सहायता ले रहे हैं। ताजा मामला हर्रैया तहसील कार्यालय से सटे राजस्व ग्राम अटवा कोहले के गांधी नगर वार्ड का है। मनोरमा नदी के समीप गाटा संख्या 341 जिसका रकबा करीब 16 बीघा है, अभिलेखों में नदी शिकस्त के रूप में दर्ज है। वर्ष 1994 में तत्कालीन एसडीएम ने कुम्हारी कला प्रोत्साहन नीति के तहत कोहले गांव के राम संवारे, तुलसीराम, गादुर सहित अन्य को पट्टे पर आवंटित किया था। शर्तों के मुताबिक पट्टाधारक उक्त जमीन की मिट्टी तीन वर्ष तक निकालकर बर्तन बनाने में उपयोग कर सकता है। निर्धारित समय के बाद स्वत: ही पट्टा निरस्त हो जाता है। मगर 24 वर्ष बाद भी पट्टाधारकों ने आवंटन के आधार पर कब्जा कायम रखने का दावा करते हुए नगर पंचायत की इस जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया। गांव के जागरूक लोगों ने नगर पंचायत के जिम्मेदारों को मौखिक रूप से सूचित भी किया था। एक ने पक्का मकान बना लिया। उसकी देखादेखी गांव के करीब पांच-छह अन्य लोगों ने भी खाली जमीन की सफाई कराकर नींव डाल दी। मामला एसडीएम के संज्ञान में आने के बाद तूल पकड़ने लगा तो नगर पंचायत के जिम्मेदार भी हरकत में आ गए। ईओ गणेश कन्नौजिया अवैध निर्माण की बाबत कहते हैं कि मेरी ज्वाइनिंग से पहले का मामला है। जानकारी मिलने पर कार्य बंद करा दिया गया है। बन चुके पक्के निर्माण को ढहाने के लिए कानूनी सहायता लेकर आगे कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार नगर पंचायत मेें नक्शा स्वीकृत होने के बाद ही कोई नगर पंचायत सीमा में निर्माण करा सकता है। तब करीब डेढ़ हजार स्क्वायर फुट सरकारी जमीन में महीनों अवैध निर्माण होता रहा और जिम्मेदारों को भनक तक नहीं लगी। सूत्रों की मानें तो अंदरखाने तक सेटिंग होने के बाद ही निर्माण हुआ है।
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