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जिला अस्पताल में मरीज की मौत से हंगामा
Updated Tue, 08 May 2018 11:17 PM IST
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बस्ती। जिला अस्पताल में मंगलवार को इमरजेंसी में मरीज की मौत के बाद परिवार के लोगों ने जमकर हंगामा किया। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉ. सरफराज पर मृतक के परिवार के एक सदस्य ने हाथ भी उठा दिया। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को देख कर हंगामा कर रहे लोग वहां से हट गए। जानकारी होते ही ओपीडी का काम बंद कर सभी डॉक्टर इमरजेंसी के ट्रामा सेंटर में पहुंच गए। एसआईसी के हस्तक्षेप पर समझौता हो गया।
सुबह करीब 10.24 बजे हर्रैया थाना क्षेत्र के भैंसा चौबे निवासी 60 वर्षीय सुशील को गंभीर हालत में उनकी पुत्री लेकर पहुंची। जांच पड़ताल के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉ. सरफराज ने तत्काल फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी को कॉल भेज दी। सूचना मिलते ही डॉ. रामजी सोनी इमरजेंसी में पहुंच गए, मगर तब तक मरीज की मौत हो चुकी थी। यह सब कुछ पांच मिनट के भीतर ही हुआ। डॉ. सरफराज का कहना है कि मौत होने के बाद उन्होंने सुशील का ऑक्सीजन हटा दिया। इसकी जानकारी होते ही मरीज के बेटे मनीष ने डॉक्टर को मारने के लिए हाथ उठाया, मगर डॉ. सरफराज ने उसका हाथ पकड़ लिया। हंगामा होते ही वहां भीड़ जुट गई। भीड़ को देखते हुए डॉ. सरफराज ने तत्काल कोतवाल बृजेेंद्र सिंह को घटना की सूचना दी। जानकारी मिलते ही चौकी प्रभारी जय प्रकाश दुबे पुलिस बल के साथ पहुंच गए। इसी बीच कोतवाल बृजेंद्र सिंह भी दलबल के साथ आ धमके। पुलिस को देखते ही हंगामा कर रहे लोग वहां से खिसक लिए।
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डॉ. सरफराज ने बताया कि मरीज को गंभीर अटैक था। 10.24 बजे वह यहां पहुंचे और मात्र पांच मिनट में ही उन्हें जरूरी दवाइयां देने के अलावा फिजीशियन को भी बुुला लिया गया था, मगर मरीज की हालत नाजुक हो गई थी। ऐसे में उसने दम तोड़ दिया।
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इधर मरीज के परिवार की ओर से भाजपा नेता पुष्कर मिश्र वहीं मौजूद थे। उन्होंने स्थिति को संभाला। डॉक्टरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव व सीओ सिटी आलोक ने बातचीत कर मामले में समझौता करा दिया। इसके बाद डॉक्टर काम पर लौट गए।
दो घंटे मची रही अफरा-तफरी
मरीज की मौत के बाद हंगामा के चलते दो घंटे तक जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक में अफरा-तफरी मची रही। डॉक्टर पर हाथ उठाने की घटना की जानकारी होने के साथ ही डॉक्टरों ने ओपीडी में काम बंद कर दिया। सभी डॉक्टर एक साथ एसआईसी के पास पहुंचे। यहां करीब एक बजे तक बातचीत हुई। इस दौरान मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों किसी ने देखा नहीं।
एसआईसी बोले
एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि मरीज की मौत के बाद डॉक्टर के साथ जो भी हुआ। उसके लिए परिवार के लोगों ने गलती मानते हुए माफी मांग ली। जिसे डॉक्टर ने भी स्वीकार कर लिया। इस मामले में डॉक्टर की लापरवाही कहीं नहीं है। सुशील की मौत के बाद ही ऑक्सीजन हटाया गया था, मगर परिवार के लोगों को गलतफहमी हो गई। फिलहाल बातचीत के बाद डॉक्टर मान गए और काम पर वापस लौट गए।