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कागज पर लिखा तीन तलाक,पशोपेश में पुलिस
Updated Tue, 19 Sep 2017 12:04 AM IST
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कागज पर लिखा तीन तलाक,पशोपेश में पुलिस
हर्रैया। जमीन बेचने पर आमादा पति जब पत्नी से पार नहीं पाया तो तलाक का फैसला कर लिया। बेटी के हाथों पति ने तलाक-तलाक-तलाक लिखकर भेज दिया। 10 बच्चों की मां सोमवार को हर्रैया थाने पहुंची और पुलिस से हस्तक्षेप की गुहार की। पुलिस भी पशोपेश में है कि इस प्रकरण में कानूनी हल कैसे निकाले। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि शरीयत में तलाक की व्यवस्था थी लेकिन हाल में ही सुप्रीम कोर्ट की नई गाइड लाइन से बाद हालात बदल गए हैं।
सीओ सतीश चंद्र शुक्ला के कार्यालय में पहुंची पीडिता आपबीती सुनाते हुए फफक पड़ी। सीओ का कहना है कि तीन तलाक के मामले में संवैधानिक व्यवस्था अभी नहीं बन पाई है। ऐसे में पुलिस के पास कार्रवाई के लिए एक्ट जरूरी है। सीओ के अनुसार सीआरपीसी में विवाहित महिला के भरण पोषण का कानून है,जिसके अनुसार इसकी मदद की जा सकती है। मगर पति पर तलाक के मामले में फिलहाल पुलिस के हाथ बंधे हैं।
बरहपुर का निवासी मोहम्मद नसीम की पत्नी आसमां खातून ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है,जिसमें बताया गया है कि उसके 10 बच्चे पैदा हुए जिनमें सात जिंदा हैं। चार बीघा पुस्तैनी जमीन में से दो बीघा उसके शौहर पहले ही बेच चुके हैं। अब बची जमीन बेचने की जिद कर हैं। उसने बच्चों का पेट भरने के लिए जमीन बेचने पर ऐतराज किया तो उसे पति ने जमकर मारापीटा और 27 अगस्त को बेटी के हाथों एक पन्ने पर तीन बार तलाक लिखकर भेज दिया।
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परिवार न्यायालय में दे सकती है अर्जी
- ऐसे प्रकरण में विधि विशेषज्ञ अवधेश प्रताप सिंह एवं रविशरण सिंह आदि का कहना है कि फैमिली कोर्ट में ऐसे मामलों की अर्जी दी जानी चाहिए। वहां सक्षम न्यायालय मामले की सुनवाई करके व्यवस्था दे सकता है। जो उभय पक्ष को मंजूर न हो तो ऊपरी अदालत में अपील हो सकेगी।
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एसपी बोले, हर संभप मदद होगी
- एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि विवाहित महिला को ससुराल में प्रताड़ित करने की शिकायत हो तो पुलिस के लिए कार्रवाई मुश्किल नहीं है। मगर तलाक और शरीयत के मामलों में विधि व्यवस्था के अनुसार समुचित कार्रवाई की जाएगी। मुस्लिम महिला के कानूनी अधिकारों की पुलिस रक्षा करेगी।
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वीरेद्र
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हर्रैया। जमीन बेचने पर आमादा पति जब पत्नी से पार नहीं पाया तो तलाक का फैसला कर लिया। बेटी के हाथों पति ने तलाक-तलाक-तलाक लिखकर भेज दिया। 10 बच्चों की मां सोमवार को हर्रैया थाने पहुंची और पुलिस से हस्तक्षेप की गुहार की। पुलिस भी पशोपेश में है कि इस प्रकरण में कानूनी हल कैसे निकाले। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि शरीयत में तलाक की व्यवस्था थी लेकिन हाल में ही सुप्रीम कोर्ट की नई गाइड लाइन से बाद हालात बदल गए हैं।
सीओ सतीश चंद्र शुक्ला के कार्यालय में पहुंची पीडिता आपबीती सुनाते हुए फफक पड़ी। सीओ का कहना है कि तीन तलाक के मामले में संवैधानिक व्यवस्था अभी नहीं बन पाई है। ऐसे में पुलिस के पास कार्रवाई के लिए एक्ट जरूरी है। सीओ के अनुसार सीआरपीसी में विवाहित महिला के भरण पोषण का कानून है,जिसके अनुसार इसकी मदद की जा सकती है। मगर पति पर तलाक के मामले में फिलहाल पुलिस के हाथ बंधे हैं।
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बरहपुर का निवासी मोहम्मद नसीम की पत्नी आसमां खातून ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है,जिसमें बताया गया है कि उसके 10 बच्चे पैदा हुए जिनमें सात जिंदा हैं। चार बीघा पुस्तैनी जमीन में से दो बीघा उसके शौहर पहले ही बेच चुके हैं। अब बची जमीन बेचने की जिद कर हैं। उसने बच्चों का पेट भरने के लिए जमीन बेचने पर ऐतराज किया तो उसे पति ने जमकर मारापीटा और 27 अगस्त को बेटी के हाथों एक पन्ने पर तीन बार तलाक लिखकर भेज दिया।
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परिवार न्यायालय में दे सकती है अर्जी
- ऐसे प्रकरण में विधि विशेषज्ञ अवधेश प्रताप सिंह एवं रविशरण सिंह आदि का कहना है कि फैमिली कोर्ट में ऐसे मामलों की अर्जी दी जानी चाहिए। वहां सक्षम न्यायालय मामले की सुनवाई करके व्यवस्था दे सकता है। जो उभय पक्ष को मंजूर न हो तो ऊपरी अदालत में अपील हो सकेगी।
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एसपी बोले, हर संभप मदद होगी
- एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि विवाहित महिला को ससुराल में प्रताड़ित करने की शिकायत हो तो पुलिस के लिए कार्रवाई मुश्किल नहीं है। मगर तलाक और शरीयत के मामलों में विधि व्यवस्था के अनुसार समुचित कार्रवाई की जाएगी। मुस्लिम महिला के कानूनी अधिकारों की पुलिस रक्षा करेगी।
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वीरेद्र