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अपराधी बाइज्जत बरी, निर्दोष जेल में

Tue, 20 Jun 2017 07:07 PM IST
Updated Tue, 20 Jun 2017 07:07 PM IST
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अपराधी बाइज्जत बरी, निर्दोष जेल में
बर्बरतापूर्ण कृत्य करने वाले अपराधी बाइज्जत बरी हो रहे हैं, निर्दोष जेल की चक्की पीस रहे हैं। तमाम तो जिंदगी के ज्यादातर दिन सलाखों के पीछे गुजारने के बाद निर्दोश साबित हो रहे हैं। इस विसंगति और न्यायिक व्यवस्था से खिलवाड़ करने के पीछे पुलिस की लचर तफ्तीश बड़ी वजह है। कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस झूठ की बुनियाद पर इंसाफ की इमारत खड़ा करती है तो न्याय की उम्मीद बेकार है।
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हाल में ही लूट, हत्या, बलात्कार के बहुचर्चित मुकदमों में दोषियों को रिहाई मिलने की आम लोगों में खूब चर्चा हुई। अधिवक्ताओं ने जब तह तक जाकर इसकी वजह तलाश की तो पाया गया कि पुलिस ने जिस जगह उसकी गिरफ्तारी दिखाई थी, वहां वे कभी गए ही नहीं थे। इसके अलावा आरोपियों के पास से दिखाई गई बरामदगी भी अदालत में साबित नहीं हो पाई, जिसके कारण मुलजिम को लाभ मिला।
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ऐसे तमाम उदाहरण रोज सामने आ रहे हैं, जिसमें पुलिस की मनमानी से न्याय की उम्मीद दम तोड़ रही है। फौजदारी अधिवक्ता विद्या निवास तिवारी का कहना है कि अगर पुलिस तथ्यों से छेड़छाड़ न करे तो ऐसी कोई वजह नहीं है कि मुलजिम को सजा हो। लेकिन विवेचक वादी और प्रतिवादी पक्ष की शोहरत और दौलत के मद्देनजर विवेचना करके अपनी बला टाल देता है। अदालत भी पुलिस का रवैया जानते हुए कम भरोसा करने लगी है। जिससे पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है और पुलिस अपने में मस्त है।
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विवेचना ही मुकदमे का मूल
विधि विशेषज्ञों के अनुसार प्रथम सूचना (तहरीर) में शिकायतकर्ता मूल घटना में जोड़-घटाकर आरोप लगाता हैं। जिसकी विवेचक पुष्टि करता है, कि इस पर लगाए गए आरोप सही हैं अथवा गलत। सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी आनंद तिवारी कहते हैं कि फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट यानी एफआईआर दर्ज करने के बाद निरीक्षक, उप निरीक्षक अथवा सर्किल आफिसर (सीओ) तफ्तीश करे। विवेचना पूरी होने पर पूरी केस डायरी समेत निष्कर्ष न्यायालय में प्रस्तुत करे, जिसके आधार पर अदालत सही गलत का ट्रायल करती है।


बचाव का छेद बनाता है विवेचक
यदि विवेचक ने सटीक पूछताछ , मजबूत सुबूत-तथ्य और गवाहों का सही प्रकार से बयान दर्ज किया है तो अभियुक्त को सजा और निर्दोश को रिहाई मिलती है। बचाव पक्ष इसी बीच कोई न कोई छेद तलाश करता है ताकि विरोधी पक्ष को कमजोर कर सके। इसमें विवेचक की भूमिका असीम हैं। जिसे कई बार जानबूझकर कमजोर किया जाता है।
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