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भतीजे की हत्या में चाचा को उम्र कैद
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:04 AM IST
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भतीजे की हत्या में चाचा को उम्र कैद
बस्ती।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विद्याशंकर पटेल ने तीन साल पूर्व आग से जलकर हुए भतीजे की मौत के मामले में चाचा को दोषी करार दिया है। इस मामले में न्यायालय ने आरोपी चाचा को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न किए जाने पर नौ माह की अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा। जुर्माने से प्राप्त धनराशि में से 10 हजार रुपये मृतक की मां को दिए जाएंगे।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि रुधौली थाना क्षेत्र की नरही निवासी सुनीता पत्नी स्व. रामवृक्ष ने 20 सितंबर 2014 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पति की तीन वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। वह गांव में झोपड़ी डालकर तीन बच्चों के साथ रहती है। उसके देवर लालू की नजर उसके संपत्ति पर थी। इसी के चलते 19 सितंबर 2014 को ढाई बजे रात में जब पूरा परिवार सो रहा था झोपड़ी जला डाली। इस घटना में एकमात्र पुत्र शैलेष की झुलसने से मौत हो गई। किसी तरह आग की लपटों से स्वयं और अपने दो पुत्रियों रूपा और महिमा को बचा लिया। घटना को अंजाम देकर भाग रहे देवर लालू को आग की रोशनी में देखा। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया। 10 नवंबर 2014 को हत्या और आगजनी के मामले में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने हत्या और आगजनी में लालू पर आरोप तय किया। अभियोजन की ओर से वादी सुनीता सहित आठ गवाहों के बयान हुए, जबकि बचाव पक्ष से मामले को झूठा करार दिया गया। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने सजा सुनाई है।
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बस्ती।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विद्याशंकर पटेल ने तीन साल पूर्व आग से जलकर हुए भतीजे की मौत के मामले में चाचा को दोषी करार दिया है। इस मामले में न्यायालय ने आरोपी चाचा को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न किए जाने पर नौ माह की अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा। जुर्माने से प्राप्त धनराशि में से 10 हजार रुपये मृतक की मां को दिए जाएंगे।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि रुधौली थाना क्षेत्र की नरही निवासी सुनीता पत्नी स्व. रामवृक्ष ने 20 सितंबर 2014 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पति की तीन वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। वह गांव में झोपड़ी डालकर तीन बच्चों के साथ रहती है। उसके देवर लालू की नजर उसके संपत्ति पर थी। इसी के चलते 19 सितंबर 2014 को ढाई बजे रात में जब पूरा परिवार सो रहा था झोपड़ी जला डाली। इस घटना में एकमात्र पुत्र शैलेष की झुलसने से मौत हो गई। किसी तरह आग की लपटों से स्वयं और अपने दो पुत्रियों रूपा और महिमा को बचा लिया। घटना को अंजाम देकर भाग रहे देवर लालू को आग की रोशनी में देखा। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया। 10 नवंबर 2014 को हत्या और आगजनी के मामले में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने हत्या और आगजनी में लालू पर आरोप तय किया। अभियोजन की ओर से वादी सुनीता सहित आठ गवाहों के बयान हुए, जबकि बचाव पक्ष से मामले को झूठा करार दिया गया। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने सजा सुनाई है।
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