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शासनादेश की ताक पर रख बेंच दिए गए चुंगी चौकियां
Updated Wed, 05 Sep 2018 11:54 PM IST
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शासनादेश को ताक पर रख बेच दी चुंगी चौकियां
संपत्ति रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं चुंगीघर
बगैर शासन की सहमति कैसे रसूखदारों के कब्जे में हो गए चुंगीघर
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। नगर पालिका परिषद की संपत्ति में शामिल शहरी क्षेत्र के चुंगीघरों को शासनादेश को ताक पर रख कर रसूखदारों के हवाले कर दिया गया। गुपचुप ढंग से हुए इस खेल पर वर्षों तक किसी की नजर नहीं पड़ी, मगर मामला तब खुला जब अस्पताल चुंगी का कब्जेदार इसे अपना बताते हुए न्यायालय पहुंच गया। जब इसकी पड़ताल पालिका के संपत्ति रजिस्टर में की जाने लगी तो पता चला कि वहां तो यह दर्ज ही नहीं है। अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन इसके लिए जिम्मेदार है।
शासन ने वर्ष 1990 में नगर पालिका क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों अथवा माल से चुंगी वसूलने पर रोक लगा दी। इसके बाद यह चुंगीघर खाली करा दिए गए। शुरुआती दौर में चुंगीघर के कर्मी इसमें रहते थे, मगर बाद में वे भी इसे छोड़ कर चले गए। वर्ष 1994 में शासन ने इन चुंगीघरों को किराए पर उठाने के निर्देश जारी कि ए, तब इसमें किसी की रुचि नहीं थी। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं तो इन चुंगीघरों के दिन भी बहुरने लगे। कारण सभी चुंगीघर चौराहों पर थे। वर्ष 1995 में तत्कालीन सचिव इं. नवीन चंद्र वाजपेयी ने शासनादेश जारी किया कि पालिका के ऐसे चुंगी चौकियों को किराए पर उठा दिया जाए। इसका किराया स्थानीय सर्किल रेट पर तय करने के निर्देश भी साथ में प्राप्त हो गए। इसकी वसूली की जिम्मेदारी पालिका को मिल गई। कहा गया कि इसके लिए वे अपनी संस्तुति डीएम को भेजेंगे इसके बाद शासन इसके आवंटन की कार्रवाई होगी। इन चुंगी चौकियों को वरीयता के क्रम में पुलिस विभाग को किराए पर दिए जाए। यदि पुलिस विभाग इसे मना करे तो फिर अन्य को किराए पर देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाए। शासन के इस निर्देश के बावजूद शहरी क्षेत्र के अमहट, कटरा, रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा, बांसी रोड पांडेय बाजार, मेंहदावल रोड व डुमरियागंज रोड की चुंगी चौकियों को पालिका ने रसूखदारों को सौंप दिया। खबर तो यह भी है कि इन चौकियों से अब किराया मिलना तो दूर इस भवन को बचा पाने में भी पालिका को नाकों चने चबाना पड़ रहा है। पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। यह मेरे भी संज्ञान में है कि पालिका की ये चुंगी चौकियां पालिका की संपत्ति अभिलेखों से गायब हो गए हैं। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।
फोटो
आप ने पालिका के खिलाफ खोला मोर्चा, धरना
पालिकाध्यक्ष सहित अधिकारियों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। आम आदमी पार्टी ने नगर पालिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पालिका के जिम्मेदारों पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बुुुधवार को कार्यकर्ताओं ने पालिका कार्यालय परिसर में धरना दिया।
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जिलाध्यक्ष कुुलदीप जायसवाल ने कहा कि इस कार्यकाल व पुराने पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में कोई अंतर नहीं है। केवल चेहरा बदल गया है। 1.24 करोड़ के कार्यों को बिना टेंडर कराए ही किया गया है। इसकी पोल तो प्रशासन ने खोल दी है। आमजन की सोच के विपरीत पालिका में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया है। वीरेंद्र गुप्ता ने पालिकाध्यक्ष और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप लगाया। कहा कि भ्रष्टाचार के चलते आमजन की समस्याएं इन्हें नजर नहीं आ रही हैं। पटेल चौराहे से पचपेड़िया मार्ग का उल्लेख करना आप नेता नहीं भूले। इस मौके पर शैलेंद्र गुप्ता, डीसी दूूबे, अमानुल्लाह एराकी, मंजूर अली, राम स्वारथ यादव, नरेंद्र प्रताप सिह, गोविंद, अजय यादव आदि मौजूद रहे।
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संपत्ति रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं चुंगीघर
बगैर शासन की सहमति कैसे रसूखदारों के कब्जे में हो गए चुंगीघर
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। नगर पालिका परिषद की संपत्ति में शामिल शहरी क्षेत्र के चुंगीघरों को शासनादेश को ताक पर रख कर रसूखदारों के हवाले कर दिया गया। गुपचुप ढंग से हुए इस खेल पर वर्षों तक किसी की नजर नहीं पड़ी, मगर मामला तब खुला जब अस्पताल चुंगी का कब्जेदार इसे अपना बताते हुए न्यायालय पहुंच गया। जब इसकी पड़ताल पालिका के संपत्ति रजिस्टर में की जाने लगी तो पता चला कि वहां तो यह दर्ज ही नहीं है। अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन इसके लिए जिम्मेदार है।
शासन ने वर्ष 1990 में नगर पालिका क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों अथवा माल से चुंगी वसूलने पर रोक लगा दी। इसके बाद यह चुंगीघर खाली करा दिए गए। शुरुआती दौर में चुंगीघर के कर्मी इसमें रहते थे, मगर बाद में वे भी इसे छोड़ कर चले गए। वर्ष 1994 में शासन ने इन चुंगीघरों को किराए पर उठाने के निर्देश जारी कि ए, तब इसमें किसी की रुचि नहीं थी। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं तो इन चुंगीघरों के दिन भी बहुरने लगे। कारण सभी चुंगीघर चौराहों पर थे। वर्ष 1995 में तत्कालीन सचिव इं. नवीन चंद्र वाजपेयी ने शासनादेश जारी किया कि पालिका के ऐसे चुंगी चौकियों को किराए पर उठा दिया जाए। इसका किराया स्थानीय सर्किल रेट पर तय करने के निर्देश भी साथ में प्राप्त हो गए। इसकी वसूली की जिम्मेदारी पालिका को मिल गई। कहा गया कि इसके लिए वे अपनी संस्तुति डीएम को भेजेंगे इसके बाद शासन इसके आवंटन की कार्रवाई होगी। इन चुंगी चौकियों को वरीयता के क्रम में पुलिस विभाग को किराए पर दिए जाए। यदि पुलिस विभाग इसे मना करे तो फिर अन्य को किराए पर देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाए। शासन के इस निर्देश के बावजूद शहरी क्षेत्र के अमहट, कटरा, रौता चौराहा, अस्पताल चौराहा, बांसी रोड पांडेय बाजार, मेंहदावल रोड व डुमरियागंज रोड की चुंगी चौकियों को पालिका ने रसूखदारों को सौंप दिया। खबर तो यह भी है कि इन चौकियों से अब किराया मिलना तो दूर इस भवन को बचा पाने में भी पालिका को नाकों चने चबाना पड़ रहा है। पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। यह मेरे भी संज्ञान में है कि पालिका की ये चुंगी चौकियां पालिका की संपत्ति अभिलेखों से गायब हो गए हैं। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।
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आप ने पालिका के खिलाफ खोला मोर्चा, धरना
पालिकाध्यक्ष सहित अधिकारियों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। आम आदमी पार्टी ने नगर पालिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पालिका के जिम्मेदारों पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बुुुधवार को कार्यकर्ताओं ने पालिका कार्यालय परिसर में धरना दिया।
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जिलाध्यक्ष कुुलदीप जायसवाल ने कहा कि इस कार्यकाल व पुराने पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में कोई अंतर नहीं है। केवल चेहरा बदल गया है। 1.24 करोड़ के कार्यों को बिना टेंडर कराए ही किया गया है। इसकी पोल तो प्रशासन ने खोल दी है। आमजन की सोच के विपरीत पालिका में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया है। वीरेंद्र गुप्ता ने पालिकाध्यक्ष और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप लगाया। कहा कि भ्रष्टाचार के चलते आमजन की समस्याएं इन्हें नजर नहीं आ रही हैं। पटेल चौराहे से पचपेड़िया मार्ग का उल्लेख करना आप नेता नहीं भूले। इस मौके पर शैलेंद्र गुप्ता, डीसी दूूबे, अमानुल्लाह एराकी, मंजूर अली, राम स्वारथ यादव, नरेंद्र प्रताप सिह, गोविंद, अजय यादव आदि मौजूद रहे।