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26 वर्ष पुराने मामले में दो को सजा
Updated Wed, 04 Oct 2017 11:11 PM IST
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26 वर्ष पुराने मामले में दो को सजा
बस्ती।
अपर मुख्य दंडाधिकारी तृतीय सौरभ द्विवेदी ने मेंहदावल थाना क्षेत्र के जब्बार गांव में हुई मारपीट और धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को सजा सुनाई है। यह मामला 26 वर्ष से कोर्ट में लंबित था। दोनों को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा कोर्ट ने दी है।
अभियोजन अधिकारी मशींद्र प्रसाद चौहान ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल थाना क्षेत्र के जब्बार गांव में 20 जनवरी 1991 को सुबह नौ बजे विक्रम यादव और जगरूप मृतक लालसा के पुत्र राजदेव के दरवाजे पर लाठी-डंडा लेकर चढ़ गए। अपशब्द कहते हुए पिता की हत्या के मुकदमा में गवाहों को जान से मारने की धमकी देते हुए मारने के लिए दौड़ाया। राजदेव ने किसी तरह छिपकर जान बचाई। इस मामले की रिपोर्ट राजदेव ने मेंहदावल थाने में दर्ज कराई। अभियोजन अधिकारी के मुताबिक इसी मामले में उक्त आरोपियों ने ढाई माह पूर्व भी राजदेव और एक अन्य गवाह पर हमला बोल कर मारापीटा था। इससे राजदेव और दूसरे अन्य गवाह को चोट आई थी। आरोपी लालसा हत्याकांड में गवाहों को धमकाने के लिए दबाव बना रहे थे। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से वादी सहित तीन गवाहों का बयान हुआ। बचाव पक्ष से घटना को गलत करार दिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने उक्त सजा सुनाई है।
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बस्ती।
अपर मुख्य दंडाधिकारी तृतीय सौरभ द्विवेदी ने मेंहदावल थाना क्षेत्र के जब्बार गांव में हुई मारपीट और धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को सजा सुनाई है। यह मामला 26 वर्ष से कोर्ट में लंबित था। दोनों को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा कोर्ट ने दी है।
अभियोजन अधिकारी मशींद्र प्रसाद चौहान ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल थाना क्षेत्र के जब्बार गांव में 20 जनवरी 1991 को सुबह नौ बजे विक्रम यादव और जगरूप मृतक लालसा के पुत्र राजदेव के दरवाजे पर लाठी-डंडा लेकर चढ़ गए। अपशब्द कहते हुए पिता की हत्या के मुकदमा में गवाहों को जान से मारने की धमकी देते हुए मारने के लिए दौड़ाया। राजदेव ने किसी तरह छिपकर जान बचाई। इस मामले की रिपोर्ट राजदेव ने मेंहदावल थाने में दर्ज कराई। अभियोजन अधिकारी के मुताबिक इसी मामले में उक्त आरोपियों ने ढाई माह पूर्व भी राजदेव और एक अन्य गवाह पर हमला बोल कर मारापीटा था। इससे राजदेव और दूसरे अन्य गवाह को चोट आई थी। आरोपी लालसा हत्याकांड में गवाहों को धमकाने के लिए दबाव बना रहे थे। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से वादी सहित तीन गवाहों का बयान हुआ। बचाव पक्ष से घटना को गलत करार दिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने उक्त सजा सुनाई है।
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