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तबादले की ‘सुनामी’ व्यवस्था लड़खड़ाई

Thu, 06 Jul 2017 06:59 PM IST
Updated Thu, 06 Jul 2017 06:59 PM IST
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तबादले की ‘सुनामी’ व्यवस्था लड़खड़ाई
बस्ती। पुलिस महकमे में थोक के भाव हुए तबादलों के चलते अजीबो-गरीब विसंगति उत्पन्न हो गई है। एक साथ भारी तादाद में फेरबदल कर देने से जवान आमद-रवानगी में व्यस्त हैं। थानों पर मुशी-दीवान और बीट आरक्षी तक नए तैनात कर दिए गए। जिन्हें न तो क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी है, न ही सामाजिक ताने-बाने का अंदाजा है। इस आपाधापी में पुलिस की जरूरत पड़ गई तो वह ढूंढे नहीं मिलेगी। विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के निर्देश पर भी थोक के भाव तबादले किए गए। मगर कई पुलिस अधिकारियों ने आयोग की आंख में धूल झोंककर मनमाने ढंग से चहेतों को मनचाही पोस्टिंग पर रखा। कई अयोग्य मोहरों को महत्वपूर्ण जिम्मा देकर अपनी दबंगई भी दिखाई लेकिन सूबे की सियासत में भूचाल आने के बाद उनके होश ठिकाने आ गए।
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इस बार शासन की ओर से जब तबादला नीति का चर्खा चलाया तो हड़बड़ी में थोक के भाव तबादले होने लगे। जिला पुलिस में पांच सौ से ज्यादा आरक्षी, मुख्य आरक्षी, दारोगा आदि इधर से उधर कर दिए गए। उनकी जगह नई तैनाती तो दी गई लेकिन नई जगह आमद करने और अन्य इंतजाम करने में उनके छक्के छूट जा रहे हैं। थाने पर जब कोई फरियादी पहुंचता है तो अटेंड करने वाला कोई नहीं मिलता है। बीट आरक्षी व दारोगा को अपने ही क्षेत्र के रास्तों की जानकारी नहीं है। अचानक सूचना पर कितनी तत्परता से वे पहुंचेंगे, समझना आसान है। अधिकारियों का कहना है कि दो-चार दिन में सब सामान्य हो जाएगा।
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सीओ की पेशियां खाली
एसपी दफ्तर में भी तबादले के चलते सन्नाटा है। एक साथ चार सीओ हटाए जाने से सर्किल कार्यालय पर काम काज ठप है। सिर्फ दो सीओ के जिम्मे चार सर्किल और पूरे जिले की कानून व्यवस्था का जिम्मा है। वहां के मुंशी-दीवान भी बदल दिए गए हैं, इसलिए उनके कामकाज ठप हैं। विवेचनाओं का कोई पुरसाहाल नहीं है।
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