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फोटो... पिता की सौदेबाजी में बेटे की हत्या,आरोपी पकड़ा गया
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:38 AM IST
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पिता की सौदेबाजी में बेटे की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
वीरेंद्र हत्याकांड : जमीन के रुपये हड़पने पर हुई वीरेंद्र की हत्या
लालगंज के बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा
मुख्य अभियुक्त इंद्रजीत आला कत्ल के साथ गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। लालगंज थाने के बहुचर्चित वीरेंद्र उपाध्याय हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा करते हुए मुख्य अभियुक्त को आला कत्ल के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का दावा और आरोपी के बयान के आधार पर तथ्य सामने आया कि जमीन खरीदने के लिए आरोपी इंद्रजीत चौधरी पुत्र राजेंद्र चौधरी निवासी गौरा उपाध्याय ने 24 अक्तूबर से लापता वीरेंद्र उपाध्याय को मौत के घाट उतार दिया। आला कत्ल बरामद के अलावा हत्या में प्रयुक्त बाइक व अन्य सुबूत भी पुलिस ने बरामद किया है।
एसपी दिलीप कुमार ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि एएसपी पंकज और सीओ रुधौली एसएन सिंह की अगुवाई में 31 अक्तूबर को थाना पुरानी बस्ती के कड़र खास गांव के पास गन्ने के खेत में मिले अज्ञात शव के बारे में टास्क सौंपा गया। शव की शिनाख्त मृतक वीरेंद्र के भाई बलराम उपाध्याय ने की। अभियुक्त ने बताया कि बोकनार के पास गौरा उपाध्याय निवासी वीरेंद्र का खेत है, जिनके पिता मनोरमा उपाध्याय ने चार साल पूर्व चार लाख में सौदा किया। इसके बाद दो लाख रुपये एडवांस भी लिया लेकिन मनोरमा उपाध्याय की मृत्यु हो गई। इसके बाद वीरेंद्र ने बैनामा से इनकार कर दिया। एसपी ने बताया कि दो नवंबर को थाने पर शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसकी लालगंज में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसे लेकर परिवार के लोगों ने पहले पुलिस कार्यालय और फिर महुली मार्ग जाम कर दिया था। पुलिस की काफी किरकिरी होती रही लेकिन रविवार को आखिरकार इंद्रजीत गिरफ्त में आ गया। इंस्पेक्टर राजेंद्र कुमार राय प्रभारी निरीक्षक के अलावा, एसआई ललित कान्त यादव, योगेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र यादव, कृष्ण कुमार पांडेय, प्रारध्वज प्रताप सिंह शामिल रहे।
पेशाब करते समय रेता गला
बस्ती। एसपी के अनुसार पहले 22 और दूसरी बार 24 अक्तूबर को मोबाइल नंबर-7052831917 से इंद्रजीत ने मृतक के मोबाइल 7388215639 पर कॉल किया। 24 को उसने वीरेंद्र को महसों मार्ग पर स्थित बोकनार पुलिया के पास बुलाया। अपनी विक्रांत बाइक पर वीरेंद्र को बैठाकर कड़र खास ले गया। वहां पेशाब करने के बहाने रुका और मौका पाकर पीछे से गले पर चाकू रेत दिया। बकौल इंद्रजीत पहली वार में चाकू टूट गया और गला नहीं कटा तो वीरेंद्र पलटवार करते हुए इंद्रजीत को पास के गन्ने के खेत में लेकर चला गया। इंद्रजीत ने बताया कि वहां उसने जेब में रखे दूसरी चाकू से मौत के घाट उतार दिया।
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कुलबुलाते सवालों से फेर रहे मुंह
गांधीगीरी देख ठनका पुलिस का माथा, तब मिले सुराग
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। बेहद उलझी वीरेंद्र उपाध्याय मर्डर मिस्ट्री के सनसनीखेज खुलासे में ऐसे छेद हैं, जिनसे वर्कआउट के कई सवाल उठ रहे हैं। उत्तर ढूंढकर थक चुकी पुलिस तफ्तीश की तसल्ली देकर अभी मामले को टालने में कामयाब रही लेकिन आगे की तफ्तीश के दौरान विवेचक को ऐसे निरुत्तर सवालों का जवाब ढूंढना होगा।
आरोपी इंद्रजीत ने मीडिया के सामने कबूला कि उसने खेत खरीदने के नाम पर हड़पी रकम के लिए हत्या को अंजाम दिया। पुलिस की दलील है कि इंद्रजीत ने सब्जी काटने वाले चाकू से वीरेंद्र को मौत के घाट उतार दिया। कहा जा रहा है कि पेशाब करते समय पीछे से इंद्रजीत ने वीरेंद्र के गले पर चाकू चला दिया, मगर वह टूट गया। बाद में दूसरा चाकू निकाला और गला रेत डाला। कानून के जानकार और अनुभवी पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कोई भी योजनाबद्ध ढंग से मर्डर करने सड़क छाप चाकू लेकर नहीं जाएगा। पुलिस कहती है कि पहले ही वार में चाकू टूट गया, लेकिन गला नहीं कटा। पलटवार करके वीरेंद्र इंद्रजीत को घसीटकर गन्ने के खेत में ले जाने की बात बता रही है। जहां फिर पासा पलटता है और फाइनली इंद्रजीत ने दूसरा चाकू इस्तेमाल करते हुए वीरेंद्र का गला रेत दिया। दोनों में गुत्थम-गुत्थी भी हुई लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से इंद्रजीत फिर भारी पड़ गया। यद्यपि पूछताछ में सामने आए तथ्य के माध्यम से पुलिस सिर्फ इंद्रजीत को मुलजिम करार देकर अदालत में पेश कर चुकी है।
भाई का राजफाश, सर्विलांस का मार्गदर्शन
गुमशुदगी के बाद हत्या के मामले में मृतक के परिवार व सगे-सम्बंधियों ने जब सड़क जाम और एसपी दफ्तर में प्रदर्शन जैसी गांधीगीरी के बाद पुलिस का माथा ठनका। बकौल एसपी वादी पर भी दबाव बढ़ाते ही राज खुद-ब-खुद सामने आने लगा। शिनाख्त करने गए भाई से पूछताछ में पुलिस ने काफी मजबूत सुराग हासिल कर लिया था, जिसके बल पर आरोपी हत्थे चढ़ा।
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पिता की सौदेबाजी में बेटे की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
वीरेंद्र हत्याकांड : जमीन के रुपये हड़पने पर हुई वीरेंद्र की हत्या
लालगंज के बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा
मुख्य अभियुक्त इंद्रजीत आला कत्ल के साथ गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। लालगंज थाने के बहुचर्चित वीरेंद्र उपाध्याय हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा करते हुए मुख्य अभियुक्त को आला कत्ल के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का दावा और आरोपी के बयान के आधार पर तथ्य सामने आया कि जमीन खरीदने के लिए आरोपी इंद्रजीत चौधरी पुत्र राजेंद्र चौधरी निवासी गौरा उपाध्याय ने 24 अक्तूबर से लापता वीरेंद्र उपाध्याय को मौत के घाट उतार दिया। आला कत्ल बरामद के अलावा हत्या में प्रयुक्त बाइक व अन्य सुबूत भी पुलिस ने बरामद किया है।
एसपी दिलीप कुमार ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि एएसपी पंकज और सीओ रुधौली एसएन सिंह की अगुवाई में 31 अक्तूबर को थाना पुरानी बस्ती के कड़र खास गांव के पास गन्ने के खेत में मिले अज्ञात शव के बारे में टास्क सौंपा गया। शव की शिनाख्त मृतक वीरेंद्र के भाई बलराम उपाध्याय ने की। अभियुक्त ने बताया कि बोकनार के पास गौरा उपाध्याय निवासी वीरेंद्र का खेत है, जिनके पिता मनोरमा उपाध्याय ने चार साल पूर्व चार लाख में सौदा किया। इसके बाद दो लाख रुपये एडवांस भी लिया लेकिन मनोरमा उपाध्याय की मृत्यु हो गई। इसके बाद वीरेंद्र ने बैनामा से इनकार कर दिया। एसपी ने बताया कि दो नवंबर को थाने पर शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसकी लालगंज में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसे लेकर परिवार के लोगों ने पहले पुलिस कार्यालय और फिर महुली मार्ग जाम कर दिया था। पुलिस की काफी किरकिरी होती रही लेकिन रविवार को आखिरकार इंद्रजीत गिरफ्त में आ गया। इंस्पेक्टर राजेंद्र कुमार राय प्रभारी निरीक्षक के अलावा, एसआई ललित कान्त यादव, योगेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र यादव, कृष्ण कुमार पांडेय, प्रारध्वज प्रताप सिंह शामिल रहे।
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पेशाब करते समय रेता गला
बस्ती। एसपी के अनुसार पहले 22 और दूसरी बार 24 अक्तूबर को मोबाइल नंबर-7052831917 से इंद्रजीत ने मृतक के मोबाइल 7388215639 पर कॉल किया। 24 को उसने वीरेंद्र को महसों मार्ग पर स्थित बोकनार पुलिया के पास बुलाया। अपनी विक्रांत बाइक पर वीरेंद्र को बैठाकर कड़र खास ले गया। वहां पेशाब करने के बहाने रुका और मौका पाकर पीछे से गले पर चाकू रेत दिया। बकौल इंद्रजीत पहली वार में चाकू टूट गया और गला नहीं कटा तो वीरेंद्र पलटवार करते हुए इंद्रजीत को पास के गन्ने के खेत में लेकर चला गया। इंद्रजीत ने बताया कि वहां उसने जेब में रखे दूसरी चाकू से मौत के घाट उतार दिया।
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गांधीगीरी देख ठनका पुलिस का माथा, तब मिले सुराग
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। बेहद उलझी वीरेंद्र उपाध्याय मर्डर मिस्ट्री के सनसनीखेज खुलासे में ऐसे छेद हैं, जिनसे वर्कआउट के कई सवाल उठ रहे हैं। उत्तर ढूंढकर थक चुकी पुलिस तफ्तीश की तसल्ली देकर अभी मामले को टालने में कामयाब रही लेकिन आगे की तफ्तीश के दौरान विवेचक को ऐसे निरुत्तर सवालों का जवाब ढूंढना होगा।
आरोपी इंद्रजीत ने मीडिया के सामने कबूला कि उसने खेत खरीदने के नाम पर हड़पी रकम के लिए हत्या को अंजाम दिया। पुलिस की दलील है कि इंद्रजीत ने सब्जी काटने वाले चाकू से वीरेंद्र को मौत के घाट उतार दिया। कहा जा रहा है कि पेशाब करते समय पीछे से इंद्रजीत ने वीरेंद्र के गले पर चाकू चला दिया, मगर वह टूट गया। बाद में दूसरा चाकू निकाला और गला रेत डाला। कानून के जानकार और अनुभवी पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कोई भी योजनाबद्ध ढंग से मर्डर करने सड़क छाप चाकू लेकर नहीं जाएगा। पुलिस कहती है कि पहले ही वार में चाकू टूट गया, लेकिन गला नहीं कटा। पलटवार करके वीरेंद्र इंद्रजीत को घसीटकर गन्ने के खेत में ले जाने की बात बता रही है। जहां फिर पासा पलटता है और फाइनली इंद्रजीत ने दूसरा चाकू इस्तेमाल करते हुए वीरेंद्र का गला रेत दिया। दोनों में गुत्थम-गुत्थी भी हुई लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से इंद्रजीत फिर भारी पड़ गया। यद्यपि पूछताछ में सामने आए तथ्य के माध्यम से पुलिस सिर्फ इंद्रजीत को मुलजिम करार देकर अदालत में पेश कर चुकी है।
भाई का राजफाश, सर्विलांस का मार्गदर्शन
गुमशुदगी के बाद हत्या के मामले में मृतक के परिवार व सगे-सम्बंधियों ने जब सड़क जाम और एसपी दफ्तर में प्रदर्शन जैसी गांधीगीरी के बाद पुलिस का माथा ठनका। बकौल एसपी वादी पर भी दबाव बढ़ाते ही राज खुद-ब-खुद सामने आने लगा। शिनाख्त करने गए भाई से पूछताछ में पुलिस ने काफी मजबूत सुराग हासिल कर लिया था, जिसके बल पर आरोपी हत्थे चढ़ा।