फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   मनरेगा के 34 योजनाओं में गड़बड़ी की जांच शुरू

मनरेगा के 34 योजनाओं में गड़बड़ी की जांच शुरू

Thu, 25 Oct 2018 11:37 PM IST
Updated Thu, 25 Oct 2018 11:37 PM IST
विज्ञापन
मनरेगा के 34 योजनाओं में गड़बड़ी की जांच शुरू
मनरेगा की 34 योजनाओं में गड़बड़ी की जांच शुरू
विज्ञापन

विधायक निधि से हुए इंटरलाकिंग कार्य का मनरेगा से भुगतान का मामला भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
कुदरहा। मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ब्लॉक क्षेत्र के परसांव ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत प्रस्तावित 34 कार्यों को पूरा कराए बगैर लाखों रुपये के भुगतान की शिकायत हुई है। शिकायत पर डीएम डॉ. राजशेखर ने जांच शुरू करा दी है। बृहस्पतिवार को डीएसओ रमन मिश्र की अगुवाई में चार सदस्यीय दल ने जांच की। देर शाम तक अधिकांश परियोजनाओं की जांच पूरी नहीं हो सकी थी, जिससे टीम वापस लौट गई।
परसांव निवासी ग्राम पंचायत सदस्य सत्येंद्र पाल ने डीएम से शिकायत की है कि गांव में विकास के नाम पर मनरेगा के तहत तमाम कार्य कागजों पर करा कर भुगतान मजदूरों के खाते में कर दिए गए। शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व विधायक दूधराम की निधि से बने मेनरोड से अभय पाल के घर तक के इंटरलाकिंग कार्य को भी मनरेगा में दिखाकर 4.33 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया है। इसके अलावा एक ही पोखरे का अलग-अलग नाम रखकर भुगतान कराया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विशनुपुरा गांव के पूरब नाला की खुदाई, काली मंदिर के बगल तालाब की खुदाई नहीं कराई गई और इसका भी भुगतान करा लिया गया। गांव में वंशराज, शैलेंद्र पाल, उग्रसेन पाल, सुक्खू, खुडबुड़, राजदेव, रामनैन व श्यामजीत के घूर गड्ढे के निर्माण के बगैर एक लाख से अधिक का गोलमाल किया गया है। इसी तरह राम स्वरूप यादव का चरन बनाए बगैर भुगतान कराया गया है। इसी तरह अन्य परियोजनाओं में नामकरण तो हुए, मगर न तो वहां कोई स्थान है और न कहीं कोई काम नजर आ रहा है। जांच टीम उस समय सकते में आ गई जब विशुनपुरा के पश्चिम खोदे गए तालाब को खोजने लगी, मगर वहां तालाब के स्थान पर रसूलपुर गांव का नाला दिखाकर संतुष्ट करने का प्रयास किया गया। जबकि इस तालाब पर 3.34 लाख रुपये भुगतान कराया गया है। यही नहीं, इस गांव में वर्ष 2016 में 14 दिनों तक मजदूर झारखंडे से काम कराया गया है, जबकि चार वर्ष पहले ही उसकी मौत हो चुकी है।
विज्ञापन

जांच टीम के अगुवा डीएसओ रमन मिश्र ने कहा कि शिकायत की जांच की जा रही है। जो भी वास्तविकता है उसे जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसकी आख्या डीएम को दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed