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Basti News: नागवार लग रही रोक-टोक, जरा सी बात पर घर छोड़ रहे बच्चे
Mon, 11 Sep 2023 01:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 11 Sep 2023 01:28 AM IST
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बस्ती। बच्चों व किशोरों को माता-पिता या अभिभावक की डांट फटकार और बंदिश अब नागवार गुजरने लगी हैं। गुस्सा होकर घर छोड़ने के आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे खेलने, होमवर्क न करने, वीडियो गेम खेलने से रोकने पर वे घर छोड़ने में जरा भी देर नहीं लगाते। 15 दिन में दो और आठ महीने में ऐसे 19 मामले सामने आए। इनमें कुछ को पुलिस ढूंढकर लाई ताे ज्यादातर खुद चार-छह दिन बाद लौटकर घर आए।
जानकर बताते हैं कि ऐसे कदम न उठाएं इसके लिए बच्चों के मन की बात सुनने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए और उनसे मित्रवत व्यवहार करने की आवश्यकता है। समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मनो स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी परिवर्तन दिखता है।
इन पर अभिभावकों की रोकटोक उन्हें बंदिश सी लगने लगती हैं। बार-बार टोकने से बच्चे चिढ़ चिढ़े होने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनसे दूरी बनाने के बजाए मेलजोल बढ़ाएं। उनके मन में हो रही हलचल भांप कर उसी अनुरूप व्यवहार करने की आवश्यकता है।
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केस एक
चाचा के टोकने पर छोड़ दिया था घर
शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। खेल, पढ़ाई, मित्रों संग घूमने, कपड़े खरीदने जैसी बातों पर वह टीका-टिप्पणी करते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया। इसके बाद वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।
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केस दो
शहर के एक मुहल्ले के निवासी व्यवसायी की पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के अंतर्गत फोरलेन पर धर्मकांटा है। 26 जुलाई काे उनके 10 वर्षीय बेटे को पढ़ाई के लिए उनकी पत्नी ने डांट दिया। जिससे नाराज होकर बालक घर से स्कूल जाने के लिए निकला मगर लौटकर नहीं आया। इस संबंध में थाने में केस दर्ज कराया गया। 10 दिन बाद सोनहा थाने की पुलिस को वह बालक भानपुर में भटकते मिला।
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केस तीन
मुण्डेरवा थाना क्षेत्र के ओड़वारा से 12 वर्षीय बालक गायब होने का मामला पुलिस ने चार दिन पहले दर्ज किया है। उसके मामा ने मुंडेरवा थाने में तहरीर दी। जिसमें बताया कि उसके पिता ने पढ़ाई के लिए बेटे को डांट दिया था। इस पर वह बिना बताए घर से कहीं चला गया। पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर गुमशुदा बच्चे की तलाश शुरु कर दी है।
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सजा और इनाम दोनों जरूरी
- मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घरेलू स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और बुरे बर्ताव के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा का तात्पर्य शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि उनको मिलने वाली छूट व सुविधा में कटौती है।
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बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय
- आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। सबसे जरूरी है संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। बच्चे से परस्पर संवाद बनाए रखने से इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
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जानकर बताते हैं कि ऐसे कदम न उठाएं इसके लिए बच्चों के मन की बात सुनने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए और उनसे मित्रवत व्यवहार करने की आवश्यकता है। समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मनो स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी परिवर्तन दिखता है।
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इन पर अभिभावकों की रोकटोक उन्हें बंदिश सी लगने लगती हैं। बार-बार टोकने से बच्चे चिढ़ चिढ़े होने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनसे दूरी बनाने के बजाए मेलजोल बढ़ाएं। उनके मन में हो रही हलचल भांप कर उसी अनुरूप व्यवहार करने की आवश्यकता है।
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केस एक
चाचा के टोकने पर छोड़ दिया था घर
शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। खेल, पढ़ाई, मित्रों संग घूमने, कपड़े खरीदने जैसी बातों पर वह टीका-टिप्पणी करते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया। इसके बाद वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।
केस दो
शहर के एक मुहल्ले के निवासी व्यवसायी की पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के अंतर्गत फोरलेन पर धर्मकांटा है। 26 जुलाई काे उनके 10 वर्षीय बेटे को पढ़ाई के लिए उनकी पत्नी ने डांट दिया। जिससे नाराज होकर बालक घर से स्कूल जाने के लिए निकला मगर लौटकर नहीं आया। इस संबंध में थाने में केस दर्ज कराया गया। 10 दिन बाद सोनहा थाने की पुलिस को वह बालक भानपुर में भटकते मिला।
केस तीन
मुण्डेरवा थाना क्षेत्र के ओड़वारा से 12 वर्षीय बालक गायब होने का मामला पुलिस ने चार दिन पहले दर्ज किया है। उसके मामा ने मुंडेरवा थाने में तहरीर दी। जिसमें बताया कि उसके पिता ने पढ़ाई के लिए बेटे को डांट दिया था। इस पर वह बिना बताए घर से कहीं चला गया। पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर गुमशुदा बच्चे की तलाश शुरु कर दी है।
सजा और इनाम दोनों जरूरी
- मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घरेलू स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और बुरे बर्ताव के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा का तात्पर्य शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि उनको मिलने वाली छूट व सुविधा में कटौती है।
बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय
- आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। सबसे जरूरी है संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। बच्चे से परस्पर संवाद बनाए रखने से इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है।