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रिबोर और मरम्मत के नाम पर धन की बंदरबांट
Sun, 26 May 2019 11:48 PM IST
राकेश पांडेय
basti
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 26 May 2019 11:48 PM IST
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खराब हैंडपंप
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विक्रमजोत। क्षेत्र में इंडिया मार्का हैंडपंप की रिबोर व मरम्मत के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। पिछले दो वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कुल 564 पंपों की मरम्मत व रिबोर कराकर 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, मगर हालात जस के तस हैं। आज भी ग्रामीण दूषित जल पीने को मजबूर हैं।
पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार पुराने इंडिया मार्क हैंडपंपों का रिबोर और मरम्मत ग्राम पंचायतों के माध्यम से करा रही है, मगर ब्लाक के इमिलिया, नेतवरपट्टी, रिक्खीपुर, बस्थनवा, करमिया, अकला, केनौना, माझाकिता अवव्ल, रानीगांव, पावड, बछईपुर में पर्याप्त धन खर्च करने के बाद ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार ग्रामीणांचल में पहले से स्थापित इंडिया मार्क हैंडपंप में मामूली खराबी पर पांच हजार से 28 हजार रुपये व उसका चबूतरा के उच्चीकरण के नाम पर 34 हजार का खर्च दिखाकर बडे़ पैमाने पर भुगतान करा लिया गया है। वास्तविक खर्च से तीन से चार गुना बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। दर्जनों ग्रामीणों की आनलाइन शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
ब्लाक क्षेत्र के 79 ग्राम सभाओं के 321 राजस्व गांवों में कुल 2254 इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित है। वित्तीय वर्ष 18-19 मे ब्लाक के 79 ग्राम पंचायतों में 225 नल रिबोर तथा 338 नलों का मरम्मत कराया गया है। केवल विक्रमजोत ब्लाक में मात्र दो वर्षों मे कुल 564 इडिया मार्क नलो की मरम्मत और रिबोर कराने के मद में अभी लगभग दस करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने कहा कि इडिया मार्क हैंडपंप के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता। मरम्मत, दूषित पानी देने की आनलाइन शिकायत आती हैं तो जांच कर उनकी मरम्मत कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराती है। अगर गड़बड़ हुई है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार पुराने इंडिया मार्क हैंडपंपों का रिबोर और मरम्मत ग्राम पंचायतों के माध्यम से करा रही है, मगर ब्लाक के इमिलिया, नेतवरपट्टी, रिक्खीपुर, बस्थनवा, करमिया, अकला, केनौना, माझाकिता अवव्ल, रानीगांव, पावड, बछईपुर में पर्याप्त धन खर्च करने के बाद ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार ग्रामीणांचल में पहले से स्थापित इंडिया मार्क हैंडपंप में मामूली खराबी पर पांच हजार से 28 हजार रुपये व उसका चबूतरा के उच्चीकरण के नाम पर 34 हजार का खर्च दिखाकर बडे़ पैमाने पर भुगतान करा लिया गया है। वास्तविक खर्च से तीन से चार गुना बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। दर्जनों ग्रामीणों की आनलाइन शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
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ब्लाक क्षेत्र के 79 ग्राम सभाओं के 321 राजस्व गांवों में कुल 2254 इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित है। वित्तीय वर्ष 18-19 मे ब्लाक के 79 ग्राम पंचायतों में 225 नल रिबोर तथा 338 नलों का मरम्मत कराया गया है। केवल विक्रमजोत ब्लाक में मात्र दो वर्षों मे कुल 564 इडिया मार्क नलो की मरम्मत और रिबोर कराने के मद में अभी लगभग दस करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने कहा कि इडिया मार्क हैंडपंप के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता। मरम्मत, दूषित पानी देने की आनलाइन शिकायत आती हैं तो जांच कर उनकी मरम्मत कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराती है। अगर गड़बड़ हुई है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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