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Basti News: पॉलिटेक्निक चौराहे पर नहीं बना पाए फ्लाईओवर... हाईवे पर लाल धब्बा
Fri, 08 Sep 2023 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 08 Sep 2023 12:27 AM IST
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बस्ती। पॉलिटेक्निक चौराहे पर हाईवे की काली सड़क किसी का दिन तो किसी की रात काली कर दे रही है। फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई की हुई चूक का खामियाजा एक दशक से भुगतना पड़ रहा है। यहां प्रस्तावित फलाईओवर रसूखदारों के बड़े प्रतिष्ठान होने के नाते नहीं बन सका। आवागमन का दबाव बढ़ा तो शहरी सीमा से जुड़ा यह चौराहा दुर्घटना जोन की श्रेणी में आ गया। अक्सर कोई न कोई राहगीर हाईवे पार करते समय भारी वाहनों की चपेट में आकर रक्त रंजित हो रहे हैं।
यहां हाईवे पर लाल धब्बा मिट नहीं पा रहा है। दरअसल आवागमन की दृष्टि से यह काफी व्यस्त चौराहा है। पुरानी बस्ती क्षेत्र का प्रवेश मार्ग इसी चौराहे से जुड़ता है। वहीं मंडी समिति, पॉलिटेक्निक कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एक निजी महाविद्यालय, कुष्ठ सेवा आश्रम के अलावा होटल, मैरेज, पेट्रोल पंप एवं व्यवसायिक गोदाम भी इस चौराहे से पांच सौ मीटर की परिधि में स्थित है। इसलिए लोकल आवागमन यहां ज्यादा रहता है। हाईवे पर चलने वाले भारी वाहनों का इसका भान नहीं रहता है। दिन में सड़क पार करने वालों की लाइन लगी रहती है। भागदौड़ की जिंदगी में यदि जरा सा ध्यान किसी का भटका तो भारी वाहन की चपेट में आना तय है। महीना भी नहीं बीतता यहां हाईवे की सड़क लाल हो जा रही है। तीन साल पहले स्थानीय लोगों की मांग पर यहां फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार हुआ। मगर एनएचएआई ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब जान हथेली पर रखकर हाईवे को पार करना राहगीरों की विवशता बन गई है।
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फ्लाईओवर के निर्माण में प्रस्तावित छह लेन की सड़क अड़चन
पॉलिटेक्निक चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाईओवर के डीपीआर का जिम्मा तीन साल पहले मुंबई की दो निर्माण कंपनियों को सौंपा गया था। इसी बीच छह लेन सड़क का प्रस्ताव स्वीकृति हो गया। यह फ्लाईओवर के निर्माण में अड़चन बन गई है। फ्लाईओवर का डीपीआर नहीं बन सका और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण से फिलहाल मुंह मोड़ लिया है।
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केस- एक
तीन साल पहले राजकीय पॉलिटेक्निक की एक छात्रा की इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय भारी वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बाद पॉलिटेक्निक छात्र और स्थानीय नागरिक आंदोलनरत होकर हाईवे जाम कर दिए थे। जिले के आला अफसरों को कमान संभालनी पड़ी थी। इसी के बाद यहां फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रस्ताव हुआ था।
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केस- दो
दो दिन पहले मंडी से खरीदारी करके मोटरसाइकिल से शहर की ओर लौट रहा एक व्यक्ति इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय एक कार की चपेट में आ गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की मदद से उसे अस्पताल भेजवाया।
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केस- तीन
सितंबर माह में बासी की तरफ से कार से आ रहा एक परिवार पाॅलिटेक्निक चौराहे पर हाईवे पार कर गोरखपुर-लखनऊ लेन पर आना चाह रहा था। इसी बीच एक भारी वाहन आकर कार से भिड़ गया। घंटों जाम लगा रहा। कार में सवार यात्री घायल भी हुए। गनीमत कि कोई जनहानि नहीं हुई। सिर्फ कार सवारों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी।
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केस- चार
सितंबर माह में ही दुर्घटना की दूसरी घटना यहां देखने को मिली थी। पॉलिटेक्निक कॉलेज की ओर से आ रही एक ट्रक यहां हाईवे पर जैसे ही पहुंची उसी लेन में अयोध्या की ओर से आ रही टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर भिड़ गई। तेज आवाज होने पर भीड़ जुट गई। बस में सवार यात्रियों को हल्की चोटें भी आई।
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दुर्घटना की दृष्टि से पॉलिटेक्निक चौराहा काफी संवेदनशील है। यहां अंडरपास बनाए जाने की नितांत आवश्यकता है। आवागमन का दबाव अधिक है।
शिवम सिंह, पॉलिटेक्निक चौराहा।
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इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय सिहर जाना पड़ता है। भारी वाहनों के गुजरने के दौरान तेज हवा के बीच होने वाली आवाज से सांस अटकी रहती है।
दिनेश सिंह, बड़ेरिया बुजुर्ग।
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जान हथेली पर रखकर यहां हाईवे के एक ओर से दूसरी ओर पहुंच पा रहे हैं। ईश्वर की ही कृपा है कि जान सुरक्षित है। शहर से जुड़ा चौराहा होने के नाते यहां आना मजबूरी है।
प्रमोद श्रीवास्तव, लखनऊरा।
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मंडी समिति में अक्सर जाना होता है। बहुत संभलकर ही पॉलिटेक्निक चौराहा पार करते हैं। फ्लाईओवर न होने से यहां अक्सर दुर्घटना होते देखी जाती है।
नरेंद्र शुक्ल, हर्रैया।
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पॉलिटेक्निक चौराहे पर फ्लाईओवर का प्रस्ताव अभी भेजा नहीं गया है। छह लेन सड़क का निर्धारण होने के बाद ही यह तैयार किया जा सकता है। उम्मीद है कि जल्द ही फ्लाईओवर का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
भावेश अग्रवाल, एक्सईएन, एनएचएआई।
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यहां हाईवे पर लाल धब्बा मिट नहीं पा रहा है। दरअसल आवागमन की दृष्टि से यह काफी व्यस्त चौराहा है। पुरानी बस्ती क्षेत्र का प्रवेश मार्ग इसी चौराहे से जुड़ता है। वहीं मंडी समिति, पॉलिटेक्निक कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एक निजी महाविद्यालय, कुष्ठ सेवा आश्रम के अलावा होटल, मैरेज, पेट्रोल पंप एवं व्यवसायिक गोदाम भी इस चौराहे से पांच सौ मीटर की परिधि में स्थित है। इसलिए लोकल आवागमन यहां ज्यादा रहता है। हाईवे पर चलने वाले भारी वाहनों का इसका भान नहीं रहता है। दिन में सड़क पार करने वालों की लाइन लगी रहती है। भागदौड़ की जिंदगी में यदि जरा सा ध्यान किसी का भटका तो भारी वाहन की चपेट में आना तय है। महीना भी नहीं बीतता यहां हाईवे की सड़क लाल हो जा रही है। तीन साल पहले स्थानीय लोगों की मांग पर यहां फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार हुआ। मगर एनएचएआई ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब जान हथेली पर रखकर हाईवे को पार करना राहगीरों की विवशता बन गई है।
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फ्लाईओवर के निर्माण में प्रस्तावित छह लेन की सड़क अड़चन
पॉलिटेक्निक चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाईओवर के डीपीआर का जिम्मा तीन साल पहले मुंबई की दो निर्माण कंपनियों को सौंपा गया था। इसी बीच छह लेन सड़क का प्रस्ताव स्वीकृति हो गया। यह फ्लाईओवर के निर्माण में अड़चन बन गई है। फ्लाईओवर का डीपीआर नहीं बन सका और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण से फिलहाल मुंह मोड़ लिया है।
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केस- एक
तीन साल पहले राजकीय पॉलिटेक्निक की एक छात्रा की इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय भारी वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बाद पॉलिटेक्निक छात्र और स्थानीय नागरिक आंदोलनरत होकर हाईवे जाम कर दिए थे। जिले के आला अफसरों को कमान संभालनी पड़ी थी। इसी के बाद यहां फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रस्ताव हुआ था।
केस- दो
दो दिन पहले मंडी से खरीदारी करके मोटरसाइकिल से शहर की ओर लौट रहा एक व्यक्ति इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय एक कार की चपेट में आ गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की मदद से उसे अस्पताल भेजवाया।
केस- तीन
सितंबर माह में बासी की तरफ से कार से आ रहा एक परिवार पाॅलिटेक्निक चौराहे पर हाईवे पार कर गोरखपुर-लखनऊ लेन पर आना चाह रहा था। इसी बीच एक भारी वाहन आकर कार से भिड़ गया। घंटों जाम लगा रहा। कार में सवार यात्री घायल भी हुए। गनीमत कि कोई जनहानि नहीं हुई। सिर्फ कार सवारों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी।
केस- चार
सितंबर माह में ही दुर्घटना की दूसरी घटना यहां देखने को मिली थी। पॉलिटेक्निक कॉलेज की ओर से आ रही एक ट्रक यहां हाईवे पर जैसे ही पहुंची उसी लेन में अयोध्या की ओर से आ रही टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर भिड़ गई। तेज आवाज होने पर भीड़ जुट गई। बस में सवार यात्रियों को हल्की चोटें भी आई।
दुर्घटना की दृष्टि से पॉलिटेक्निक चौराहा काफी संवेदनशील है। यहां अंडरपास बनाए जाने की नितांत आवश्यकता है। आवागमन का दबाव अधिक है।
शिवम सिंह, पॉलिटेक्निक चौराहा।
इस चौराहे पर हाईवे पार करते समय सिहर जाना पड़ता है। भारी वाहनों के गुजरने के दौरान तेज हवा के बीच होने वाली आवाज से सांस अटकी रहती है।
दिनेश सिंह, बड़ेरिया बुजुर्ग।
जान हथेली पर रखकर यहां हाईवे के एक ओर से दूसरी ओर पहुंच पा रहे हैं। ईश्वर की ही कृपा है कि जान सुरक्षित है। शहर से जुड़ा चौराहा होने के नाते यहां आना मजबूरी है।
प्रमोद श्रीवास्तव, लखनऊरा।
मंडी समिति में अक्सर जाना होता है। बहुत संभलकर ही पॉलिटेक्निक चौराहा पार करते हैं। फ्लाईओवर न होने से यहां अक्सर दुर्घटना होते देखी जाती है।
नरेंद्र शुक्ल, हर्रैया।
पॉलिटेक्निक चौराहे पर फ्लाईओवर का प्रस्ताव अभी भेजा नहीं गया है। छह लेन सड़क का निर्धारण होने के बाद ही यह तैयार किया जा सकता है। उम्मीद है कि जल्द ही फ्लाईओवर का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
भावेश अग्रवाल, एक्सईएन, एनएचएआई।