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Basti News: हाईवे पर हर पल खतरा, पांच माह में सड़क हादसों ने निगलीं 141 जिंदगियां

Tue, 07 Jul 2026 12:25 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 12:25 AM IST
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Constant danger on the highway: Road accidents claimed 141 lives in five months.
बस्ती। दस से 24 मीटर की चौड़ाई वाली लकदक सड़क पर सतर्कता में चूक हुई तो भारी पड़ सकती है। वाहन चलाते समय आंख की टकटकी बिल्कुल सामने, स्टेयरिंग, ब्रेक और एक्सीलेटर पर नियंत्रण में हल्की सी भी लापरवाही हुई तो जान जोखिम में पड़ सकता है। साल 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से मई के बीच पांच महीने में जनपद में 150 सड़क हादसे हुए हैं, इसमें 141 जिंदगी काल के गाल में समा गईं। इनमें से फोरलेन पर 95 और टू-लेन पर 40 हादसे हुए हैं।
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परिवहन विभाग की रिपोर्ट में ज्यादातर हादसे टू-लेन और फोरलेन हाईवे पर हुआ है। लगभग 135 हादसे लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर कांटे-अयोध्या सीमा के बीच और लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन हाईवे पर कलवारी से रुधौली के बीच हुए हैं। हादसों की जांच में वाहनों की ओवरस्पीड और बिना हेलमेट के दो पहिया वाहन चलाना मुख्य वजह निकलकर सामने आया है। विभागीय जानकारों के अनुसार जनपद को महानगरों से जोड़ने वाला हाईवे हो या जिला स्तरीय सड़क कहीं भी वाहनों की गति का मानक 60 या 80 किमी प्रति घंटा से अधिक का नहीं है। जबकि व्यवहार में यह मानक कहीं पीछे छूट गया है।
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अच्छी सड़कों पर कम समय में दूरी नापने की होड़ रोज मची हुई है। नए सेगमेंट की लग्जरी कार हो या बाइक सड़क पर चलते समय इनके स्पीड का कांटा 80 से ऊपर 100-120 के आसपास होता है। नतीजा राह चलते भीषण हादसे हो रहे हैं। ओवरस्पीड में वाहनों के भिड़ंत के दौरान कल-पुर्जे पिसकर चटनी सरीखे हो जा रहे हैं। इन वाहनों में सवार बहुत किस्मत वाले ही सुरक्षित बच पा रहे हैं। वरना अधिकांश यात्रियों की मौत हो रही हैं। सोमवार को ही दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया।
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सिद्धार्थनगर का नव दंपती अयोध्या से दर्शन करके बुलेट बाइक से घर लौट रहा था। बस्ती पहुंचने पर पुरानी थाना क्षेत्र के चेनपुर ओवरब्रिज पर एक ट्रक ने पीछे से बुलेट बाइक में टक्कर मारी। जिससे उस पर सवार महिला उछलकर ट्रक के नीचे आ गई और चलती ट्रक के पहियों से कुचलकर शव कई टुकड़ों में बंट गया। इस दृश्य को जिसने भी देखा उसकी धड़कनें बढ़ गईं।
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सड़क सुरक्षा के दावे, हादसे पर अंंकुश नहीं
सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तमाम दावे के बाद भी हादसों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चार पहिया, दो पहिया वाहनों के कुछ शौकीन बताते हैं कि सड़क हादसों की वजह बेइंतहा बढ़ रहे वाहन भी है। बस्ती जिले में चार लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। हाईवे से लेकर लोकल मार्ग तक वाहनाें का तांता लगा हुआ है। इधर एक दशक से सड़कों की गुणवत्ता में अमूलचूल परिवर्तन हुआ है। फर्राटा भरने में सड़क मददगार साबित हो रही है। नए सेगमेंट की गाड़ियां भी एक्सीलेटर पैर रखते ही हवा से बात कर रही है। इस वजह से भी हादसे अधिक हो गए हैं। इस साल प्रतिमाह सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 30 है। औसत रोजाना सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो रही है।
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38 अयोग्य चालकों का लाइसेंस निरस्त
सड़क हादसों के दौरान जांच पड़ताल में जिन चालकों को अयोग्य पाया जा रहा हैं परिवहन विभाग उनका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दे रहा है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी माला बाजपेई बताती है कि इधर दो महीने में 38 लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है। इसमें भारी और एलएमवी दोनों वाहनों के लाइसेंस शामिल हैं सड़क हादसों में मौत के बाद जांच में लापरवाही पाए जाने पर या नशे की हालत में गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिए जा रहे हैं।
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पिछले साल हुए थे अधिक हादसे
साल 2025 में सड़क हादसों का आंकड़ा और अधिक था। जनवरी से मई माह तक जिले भर में 228 सड़क हादसे हुए थे। इसमें 222 लोगों की मौत हुई थी। इस साल हादसों में कमी आई है। बस्ती से बांसी मार्ग पर बड़ेवन से लेकर मनौरी चौराहे तक तीन माह पहले तक दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र बन गया था। मड़वानगर टोल बचाने के लिए ट्रक, टूरिस्ट बस एवं अन्य कामर्शियल वाहन बड़ेवन से मनौरी होकर निकलते थे। इस वजह से कई बड़े हादसे सामने आने के बाद एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने शहर से जोड़ने वाली मनौरी से लेकर बड़ेवन के बीच भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया। इसके बाद यहां हादसों में काफी कमी हुई है।

कोट
लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने का मामला संज्ञान में आते ही संबंधित चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जा रहा है। सभी लोगों को नियंत्रित गति में ही वाहन चलाना चाहिए। मोड़ और स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी धीमी होनी चाहिए। वैसे पिछले साल की तुलना में इस साल सड़क हादसों में काफी कमी आई है। इसमें गिरावट लाने का अभी प्रयास चल रहा है।
-माला बाजपेई, एआरटीओ, प्रशासन।
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