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Basti News: जमीन पर बैठकर परीक्षा दे रहे नाैनिहाल, बदन पर स्वेटर तक नहीं
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रामनगर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय कनैली में जमीन पर बैठकर परीक्षा दे रहे बच्चे।
बस्ती। बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित परिषदीय स्कूलों का बुरा हाल है। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट मिलाकर कुल 2071 विद्यालय संचालित हैं। इसमें से 40 प्रतिशत विद्यालयों का अभी कायाकल्प नहीं हो सका है।
हरा-भरा परिसर, लकदक भवन, क्रीड़ांगन जैसी सुविधाओं की तो बात छोड़िए बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क तक की व्यवस्था नहीं है। कई परिषदीय स्कूलों में अभी भी टाट पट्टी का जमाना है। बच्चे जमीन पर बैठकर अर्द्धवार्षिक परीक्षा दे रहे हैं। ठंड से बचने के लिए न तो बदन पर स्वेटर हैं और न ही उनके पैराें में जूते-मोजे दिखाई दे रहे हैं।
साल दर साल परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या घटने की वजह सुविधा, संसाधन और शैक्षिक स्तर में सुधार न होना ही बताया जा रहा है। वर्तमान में जिले भर में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या एक लाख 66 हजार 873 ही रह गई है। दो-तीन साल पहले तक यह संख्या दो लाख से अधिक थी। जबकि सरकार ने हर तरह की सुविधा दे रखी है। बच्चों को निशुल्क कॉपी किताब के साथ मध्याह्न भोजन, ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, खेलने के लिए सभी तरह की सामग्री आदि हर साल उपलब्ध कराई जा रही है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए निपुण अभियान भी चलाया जा रहा है।
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बावजूद इसके इन विद्यालयों में कोई प्रभावी असर नहीं देखने को मिल रहा है। इस बार एसआईआर के चलते अर्द्धवार्षिक परीक्षा 15 दिन देर से शुरू हुई। इस बीच विद्यालयों की पड़ताल की गई तो बदइंतजामी की तस्वीर कई स्कूलों में सामने आई।
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हरा-भरा परिसर, लकदक भवन, क्रीड़ांगन जैसी सुविधाओं की तो बात छोड़िए बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क तक की व्यवस्था नहीं है। कई परिषदीय स्कूलों में अभी भी टाट पट्टी का जमाना है। बच्चे जमीन पर बैठकर अर्द्धवार्षिक परीक्षा दे रहे हैं। ठंड से बचने के लिए न तो बदन पर स्वेटर हैं और न ही उनके पैराें में जूते-मोजे दिखाई दे रहे हैं।
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साल दर साल परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या घटने की वजह सुविधा, संसाधन और शैक्षिक स्तर में सुधार न होना ही बताया जा रहा है। वर्तमान में जिले भर में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या एक लाख 66 हजार 873 ही रह गई है। दो-तीन साल पहले तक यह संख्या दो लाख से अधिक थी। जबकि सरकार ने हर तरह की सुविधा दे रखी है। बच्चों को निशुल्क कॉपी किताब के साथ मध्याह्न भोजन, ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, खेलने के लिए सभी तरह की सामग्री आदि हर साल उपलब्ध कराई जा रही है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए निपुण अभियान भी चलाया जा रहा है।
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बावजूद इसके इन विद्यालयों में कोई प्रभावी असर नहीं देखने को मिल रहा है। इस बार एसआईआर के चलते अर्द्धवार्षिक परीक्षा 15 दिन देर से शुरू हुई। इस बीच विद्यालयों की पड़ताल की गई तो बदइंतजामी की तस्वीर कई स्कूलों में सामने आई।