{"_id":"68fe85db645ec09c9c0d11b7","slug":"children-are-vulnerable-to-cold-and-cough-due-to-changing-weather-basti-news-c-207-1-bst1005-146459-2025-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: बदलते माैसम में सर्दी-जुकाम की चपेट में बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: बदलते माैसम में सर्दी-जुकाम की चपेट में बच्चे
Mon, 27 Oct 2025 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 27 Oct 2025 02:04 AM IST
विज्ञापन
बस्ती। ठंड-गर्म और गिरते तापमान व प्रदूषण के चलते छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में सर्दी-जुकाम और खांसी की शिकायतें बढ़ गई हैं। जिला अस्पताल के साथ निजी अस्पतालों में खांसी-बुखार या निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। इमर्जेंसी वार्ड फुल है।
जिला अस्पताल की इमर्जेंसी से लेकर ओपीडी तक में खांसी संबंधित मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे हैं। फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव से दमा संबंधित शिकायतें बढ़ी हैं। इससे सांस रोगियों की संख्या बढ़ी है। मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। भाप के साथ ही ऑक्सीजन भी देना पड़ रहा है।
अक्तूबर में दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते जिले के बच्चों में खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे मामूली लक्षण भी गंभीर रूप ले सकते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीएस पटेल का कहना है कि सुबह दस बजे के बाद तेज धूप और शाम होते ही ठंड से छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। छोटे बच्चों में सर्दी-खांसी के मामूली लक्षणों की अनदेखी करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीएस पटेलने कहा कि बच्चों में बुखार और खांसी सामान्य से ज्यादा दिनों तक रह रही है। इसके कारण दवा की डोज बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। कहा कि संक्रमित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो वायरस और बैक्टीरिया सांस के जरिए फैलकर अन्य बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं।
खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। अभिभावकों से अपील की गई है कि बच्चों को पौष्टिक आहार दें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही किसी भी तरह के श्वसन लक्षण की अनदेखी न करें, क्योंकि शुरुआती समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल की इमर्जेंसी से लेकर ओपीडी तक में खांसी संबंधित मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे हैं। फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव से दमा संबंधित शिकायतें बढ़ी हैं। इससे सांस रोगियों की संख्या बढ़ी है। मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। भाप के साथ ही ऑक्सीजन भी देना पड़ रहा है।
विज्ञापन
अक्तूबर में दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते जिले के बच्चों में खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे मामूली लक्षण भी गंभीर रूप ले सकते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीएस पटेल का कहना है कि सुबह दस बजे के बाद तेज धूप और शाम होते ही ठंड से छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। छोटे बच्चों में सर्दी-खांसी के मामूली लक्षणों की अनदेखी करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पीएस पटेलने कहा कि बच्चों में बुखार और खांसी सामान्य से ज्यादा दिनों तक रह रही है। इसके कारण दवा की डोज बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। कहा कि संक्रमित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो वायरस और बैक्टीरिया सांस के जरिए फैलकर अन्य बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं।
खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। अभिभावकों से अपील की गई है कि बच्चों को पौष्टिक आहार दें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही किसी भी तरह के श्वसन लक्षण की अनदेखी न करें, क्योंकि शुरुआती समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है।