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Basti News: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगा आशीष, छठ पूजा का समापन
Sat, 09 Nov 2024 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 09 Nov 2024 12:34 AM IST
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अमहट घाट पर सूर्योदय की बेला में दिखी छठ की छटा
अमहट सहित सभी घाटों पर रात भर चला सांस्कृतिक कार्यक्रम
सूर्य की लालिमा दिखते ही व्रती महिलाओं में छाई खुशी, फिर शुरू हुआ अर्घ्य देने का क्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय सूर्य उपासना के महापर्व का शुक्रवार को समापन हो गया। व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य के साथ-साथ देवी प्रत्युषा कीपूजा की। पुत्र और सुहाग के लिए मंगलकामना की। 36 घंटे का निर्जला व्रत रहकर महिलाओं ने उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठ व्रत पूरा किया। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
कुआनो नदी के अमहट घाट और पुरानी बस्ती के निर्मली कुंड पर भोर में ही मंगल गीत गातीं व्रती महिलाओं की टोली आनी शुरू हो गईं। पौ फटने से पहले घाटों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। घाट पर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। ओस और हल्के कोहरे के बीच घाटों पर भगवान सूर्य की उपासना में जुटी महिलाओं के समूह का समागम का अद्भुत दृश्य दिखा। व्रती घुटने भर पानी में खड़े होकर सूप में फल आदि लेकर सूर्यदेवता को अर्घ्य देने के लिए प्रस्तुत हुईं तो उनके सहयोग में बेटे, पति या परिवार के दूसरे सदस्य दूध और जलधार गिराकर अर्घ्य में सहयोग देते देखे गए।
बृहस्पतिवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद शुक्रवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। सूर्य की उपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ ही शुरू हो गया था। व्रती महिलाओं ने पूजन स्थल पर वेदिका सजा दी। गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छठ मईया की विधिवत पूजा की। इसके बाद महिलाएं पानी में खड़ी होकर भक्तिभाव से सूर्य की लालिमा फूटने का इंतजार करने लगीं। जैसे ही सूर्य की किरणें फूटीं व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया। भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती महिलाएं वापस वेदिका के सामने पहुंचीं। वेदी के सम्मुख कंद, मूल और फल के साथ ही पूजन के लिए तैयार पकवान रख आरती उतारी। प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा।
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फिर पति के हाथाें प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। हर मंडप में दिव्य आभा से देव लोक सा दृश्य प्रस्फुटित हो रहा था। नगर पालिका प्रशासन के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल का बंदोबस्त किया था। नदी के तटों और घाटों काफी भीड़ रही। महत्वपूर्ण पर्व माने जाने वाला सूर्य षष्ठी व्रत में इस बार महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत पूरा होने के बाद दिन भर प्रसाद वितरण का दौर चला।
...
प्रशासन ने की थी चाक-चौबंद व्यवस्था
छठ पर्व को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कदम-कदम पर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। बड़ी संख्या में महिला पुलिस कर्मी भी अमहट घाट, निर्मली कुंड परिसर में नजर आईं। इतना ही नहीं, नदी में बैरिकेडिंग कर पानी में एक सीमा तक जाने की व्यवस्था प्रशासन ने की थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों और मोटर बोट की व्यवस्था थी। छठ मेला के दौरान कर्मचारियों के साथ अधिकारियों को भी लगाया गया था। नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा वर्मा, उनके पति अंकुर वर्मा लगातार घाटों पर व्यवस्था बेहतर बनाने में जुटे रहे।
...
घाटों पर पूरी रात गूंजे छठ मईया के गीत
घाटों पर किसी ने मंत्रों का जाप किया तो किसी ने गीत गाकर छठ मईया को खुश करने की कोशिश की। घाटों पर अरघ लेई सूरजदेव खुश होइहैं छठ मईया.., कहवां भईल एतनी देर हो मईया.., छठ मईया के आके सजा देबू का हो.., उतरले सूरज देव भईले अरघिया के जून..., पूजेली चरण तोहार हे छठी मईया, गांवे-गांवे गितिया गवाई लागल, कोसिया भराई लागल, मथवा प दउरा सजाय लागल, छठी घाट लोग जाय लागल जैसे गीत गूंजते रहे। मन्नत मांगने वाले कई श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए घाटों तक पहुंचे। हर-हर गंगे, जय छठी मईया और हर-हर महादेव के जयकारों से छठ घाट गूंज उठे।
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सूर्य की लालिमा दिखते ही व्रती महिलाओं में छाई खुशी, फिर शुरू हुआ अर्घ्य देने का क्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय सूर्य उपासना के महापर्व का शुक्रवार को समापन हो गया। व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य के साथ-साथ देवी प्रत्युषा कीपूजा की। पुत्र और सुहाग के लिए मंगलकामना की। 36 घंटे का निर्जला व्रत रहकर महिलाओं ने उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठ व्रत पूरा किया। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।
कुआनो नदी के अमहट घाट और पुरानी बस्ती के निर्मली कुंड पर भोर में ही मंगल गीत गातीं व्रती महिलाओं की टोली आनी शुरू हो गईं। पौ फटने से पहले घाटों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। घाट पर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। ओस और हल्के कोहरे के बीच घाटों पर भगवान सूर्य की उपासना में जुटी महिलाओं के समूह का समागम का अद्भुत दृश्य दिखा। व्रती घुटने भर पानी में खड़े होकर सूप में फल आदि लेकर सूर्यदेवता को अर्घ्य देने के लिए प्रस्तुत हुईं तो उनके सहयोग में बेटे, पति या परिवार के दूसरे सदस्य दूध और जलधार गिराकर अर्घ्य में सहयोग देते देखे गए।
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बृहस्पतिवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद शुक्रवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। सूर्य की उपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ ही शुरू हो गया था। व्रती महिलाओं ने पूजन स्थल पर वेदिका सजा दी। गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छठ मईया की विधिवत पूजा की। इसके बाद महिलाएं पानी में खड़ी होकर भक्तिभाव से सूर्य की लालिमा फूटने का इंतजार करने लगीं। जैसे ही सूर्य की किरणें फूटीं व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया। भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती महिलाएं वापस वेदिका के सामने पहुंचीं। वेदी के सम्मुख कंद, मूल और फल के साथ ही पूजन के लिए तैयार पकवान रख आरती उतारी। प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा।
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फिर पति के हाथाें प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। हर मंडप में दिव्य आभा से देव लोक सा दृश्य प्रस्फुटित हो रहा था। नगर पालिका प्रशासन के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल का बंदोबस्त किया था। नदी के तटों और घाटों काफी भीड़ रही। महत्वपूर्ण पर्व माने जाने वाला सूर्य षष्ठी व्रत में इस बार महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत पूरा होने के बाद दिन भर प्रसाद वितरण का दौर चला।
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प्रशासन ने की थी चाक-चौबंद व्यवस्था
छठ पर्व को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कदम-कदम पर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। बड़ी संख्या में महिला पुलिस कर्मी भी अमहट घाट, निर्मली कुंड परिसर में नजर आईं। इतना ही नहीं, नदी में बैरिकेडिंग कर पानी में एक सीमा तक जाने की व्यवस्था प्रशासन ने की थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों और मोटर बोट की व्यवस्था थी। छठ मेला के दौरान कर्मचारियों के साथ अधिकारियों को भी लगाया गया था। नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा वर्मा, उनके पति अंकुर वर्मा लगातार घाटों पर व्यवस्था बेहतर बनाने में जुटे रहे।
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घाटों पर पूरी रात गूंजे छठ मईया के गीत
घाटों पर किसी ने मंत्रों का जाप किया तो किसी ने गीत गाकर छठ मईया को खुश करने की कोशिश की। घाटों पर अरघ लेई सूरजदेव खुश होइहैं छठ मईया.., कहवां भईल एतनी देर हो मईया.., छठ मईया के आके सजा देबू का हो.., उतरले सूरज देव भईले अरघिया के जून..., पूजेली चरण तोहार हे छठी मईया, गांवे-गांवे गितिया गवाई लागल, कोसिया भराई लागल, मथवा प दउरा सजाय लागल, छठी घाट लोग जाय लागल जैसे गीत गूंजते रहे। मन्नत मांगने वाले कई श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए घाटों तक पहुंचे। हर-हर गंगे, जय छठी मईया और हर-हर महादेव के जयकारों से छठ घाट गूंज उठे।