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Basti News: चातुर्मास शुरू...चार माह नहीं होंगे मांगलिक कार्यक्रम

Thu, 18 Jul 2024 03:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 18 Jul 2024 03:31 AM IST
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Chaturmas begins... there will be no auspicious programs for four months
- 12 नवंबर तक रहेगा चतुर्मास, 16 संस्कारों की मनाही
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- मान्यता है कि भगवान शिव संभालते हैं सृष्टि का कामकाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आज से चातुर्मास शुरू हो रहा है। हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है, जो कि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक रहता है। इस अवधि में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक माह शामिल होते हैं। चातुर्मास लगने के बाद शुभ व मांगलिक कार्य जैसे मुंडन संस्कार, विवाह, तिलक, यज्ञोपवीत जैसे 16 संस्कार बंद हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर श्री हरि के योग निद्रा से बाहर ने के बाद शुभ व मांगलिक कार्य दोबारा सक्रिय हो जाते हैं।
पंडित देवस्य मिश्र के मुताबिक चातुर्मास में सूर्य दक्षिणायन में विराजमान होते हैं। साथ ही भगवान विष्णु शयन अवस्था में होते हैं। ऐसे में इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों पर भगवान विष्णु की कृपा नहीं होती है। इसलिए इस इस दौरान मांगलिक कार्य यानी शादी-विवाह जैसे अन्य 16 संस्कारों को करने की मनाही होती है। चातुर्मास के दौरान साधु-संत अपने भ्रमण को रोकते हैं और एक ही स्थान पर रहकर साधना और तपस्या में लीन रहते हैं। यह समय आत्मसंयम, स्वाध्याय और आत्म विश्लेषण के लिए आदर्श माना जाता है। लोग भी इस अवधि में साधु-संतों के सत्संग का लाभ उठाते हैं और धार्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं।
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चातुर्मास के दौरान इन देवी-देवताओं की पूजा होती है
पंडित देवस्य मिश्र ने बताया कि चातुर्मास में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान 4 माह तक सृष्टि के संचार का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए इन 4 माह में भगवान विष्णु के अलावा भगवान शिव और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
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चातुर्मास के दौरान भूलकर भी न करें ये काम

- 17 जुलाई से 12 नवंबर के बीच में कोई भी मांगलिक कार्यक्रम तो न ही करें। साथ-साथ नया वाहन खरीदना, नई प्रॉपर्टी खरीदना, भूमि पूजन, घर के निर्माण के लिए नींव रखना जैसे कार्यों को भी नहीं करना चाहिए।


प्राकृतिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ
चातुर्मास का समय वर्षा ऋतु के साथ आता है। जब प्राकृतिक वातावरण हरा-भरा और शीतल होता है। इस समय में उपवास और सात्विक भोजन से स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह समय शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करने और आत्मा को शुद्ध करने के लिए आदर्श माना जाता है।

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चातुर्मास के नियम और पालन



- अहिंसा का पालन : किसी भी जीव को हानि न पहुंचाने का संकल्प लेना।

- सात्विक भोजन : केवल सात्विक और शुद्ध भोजन का सेवन करना।

- व्रत और उपवास : विभिन्न व्रतों और उपवासों का पालन करना।

- ध्यान और साधना : नियमित ध्यान और साधना करना।
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