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Basti News: मौसम बदलने से बच्चों की सेहत पर असर...संक्रमण की चपेट में आ रहे बच्चे
Tue, 31 Mar 2026 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 31 Mar 2026 12:32 AM IST
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- जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे करीब 150 से अधिक बच्चे
- पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती
- वायरल निमोनिया और एंट्रिक फीवर से भी पीड़ितों की बढ़ रही संख्या
बस्ती। मौसम बदलने से बच्चों में वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। तेज बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी और दस्त के साथ वायरल निमोनिया और एंट्रिक फीवर भी बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं।वहीं, पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती हैं। बीमार बच्चों के स्वस्थ होने में करीब सात से 10 दिन का समय लग रहा है। डॉक्टरों ने सावधानी बरतने और सही खानपान की सलाह दी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि दिन में धूप और सुबह व शाम हल्की ठंड महसूस हो रही है। इस मौसम में वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी से स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे अधिक चपेट में आ रहे हैं। बच्चों को तेज बुखार के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी, श्वास, पेट दर्द की समस्या हो रही है, वहीं उल्टी और दस्त से भी पीड़ित हो रहे हैं। इलाज में लापरवाही से वायरल निमोनिया से भी ग्रसित हो जा रहे हैं। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक बच्चे आ रहे हैं। इनमें करीब 40 प्रतिशत से अधिक मरीज वायरल इंफेक्शन से पीड़ित होते हैं। वहीं, हर रोज पांच से छह गंभीर बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मौसम बदलने पर वायरस और बैक्टीरिया ग्रोथ करते हैं, यह उनके लिए अनुकूल होता है। इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे चपेट में आते हैं। इस समय इंफ्लुएंजा, पैरा इंफ्लुएंजा, रोटा वायरस का प्रकोप है। इसके अलावा, आरएसवी वायरस का प्रकोप बढ़ा है। इससे एक साल के नीचे के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आने से बच्चों को तेज बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी, श्वास की समस्या हो रही है। बच्चों को भाप दिलवाना पड़ रहा है। वहीं, मेडिसिन विभाग में भी बुखार, सूखी खांसी के मरीज अधिक आए। डॉ. मो. फखरजमा ने बताया कि यह संक्रमण फैलने का असर है।
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जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की सेहत जांची जा रही है। सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि समय से ओपीडी में मरीजाें काे परामर्श दें। - डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल
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- पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती
- वायरल निमोनिया और एंट्रिक फीवर से भी पीड़ितों की बढ़ रही संख्या
बस्ती। मौसम बदलने से बच्चों में वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। तेज बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी और दस्त के साथ वायरल निमोनिया और एंट्रिक फीवर भी बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं।वहीं, पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती हैं। बीमार बच्चों के स्वस्थ होने में करीब सात से 10 दिन का समय लग रहा है। डॉक्टरों ने सावधानी बरतने और सही खानपान की सलाह दी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि दिन में धूप और सुबह व शाम हल्की ठंड महसूस हो रही है। इस मौसम में वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी से स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे अधिक चपेट में आ रहे हैं। बच्चों को तेज बुखार के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी, श्वास, पेट दर्द की समस्या हो रही है, वहीं उल्टी और दस्त से भी पीड़ित हो रहे हैं। इलाज में लापरवाही से वायरल निमोनिया से भी ग्रसित हो जा रहे हैं। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक बच्चे आ रहे हैं। इनमें करीब 40 प्रतिशत से अधिक मरीज वायरल इंफेक्शन से पीड़ित होते हैं। वहीं, हर रोज पांच से छह गंभीर बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। पीआईसीयू में चार और चिल्ड्रेन वार्ड में 20 मरीज भर्ती हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मौसम बदलने पर वायरस और बैक्टीरिया ग्रोथ करते हैं, यह उनके लिए अनुकूल होता है। इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे चपेट में आते हैं। इस समय इंफ्लुएंजा, पैरा इंफ्लुएंजा, रोटा वायरस का प्रकोप है। इसके अलावा, आरएसवी वायरस का प्रकोप बढ़ा है। इससे एक साल के नीचे के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आने से बच्चों को तेज बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी, श्वास की समस्या हो रही है। बच्चों को भाप दिलवाना पड़ रहा है। वहीं, मेडिसिन विभाग में भी बुखार, सूखी खांसी के मरीज अधिक आए। डॉ. मो. फखरजमा ने बताया कि यह संक्रमण फैलने का असर है।
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जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की सेहत जांची जा रही है। सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि समय से ओपीडी में मरीजाें काे परामर्श दें। - डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल