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Basti News: चंदोताल बदहाल... तारणहार का इंतजार
Thu, 07 Dec 2023 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:30 AM IST
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बदहाल पड़ा चंदोताल ।
नेशनल वेटलैंड की सूची में है शामिल
वर्ष 1996 में घोषित हुआ था पक्षी विहार
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नगर बाजार (बस्ती)। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर स्थित चंदोताल बदहाल है। परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। झूले टूट गए हैं। वॉच टावर की रेंलिंग जर्जर हो गई है, लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले हैं। इसकी बदहाली दूर करने के लिए तारणहार का इंतजार है।
एक समय था यहां कि वादियां विदेशी पक्षियों को लुभाती थीं। इसके चलते वर्ष 1996 में वन विभाग ने इस ताल को पक्षी विहार घोषित किया था। नवंबर से ही यहां साइबेरिया सहित अन्य विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। करीब तीन माह के प्रवास के बाद फरवरी व मार्च में वह अपने वतन लौट जाते हैं।
मौजूदा समय में चंदो ताल इस कदर बदहाल हो गया है कि यहां तक पहुंचने वाले मार्ग पर चलते हुए भी भय लगता है। भीतर का नजारा इससे भी भयावह है। उपेक्षा की चादर इस कदर इस स्थल से लिपट गया है कि मनुष्य तो क्या, पशु-पक्षियों ने भी यहां से मुंह फेर लिया है।
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12 वर्ष पहले नेशनल वेटलैंड की सूची में किया गया था शामिल
चंदोताल को 12 वर्ष पहले नेशनल वेटलैंड की सूची में केंद्र सरकार ने शामिल किया था। इसे बचाने के लिए छिटपुट प्रयास किए गए, मगर जलकुंभी व सिल्ट निकालने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। अब यह ताल अपने अस्तित्व की बांट जोह रहा है। चंदोताल की बदहाली को लेकर जब क्षेत्रीय वनाधिकारी हीरालाल अवस्थी ने कहा कि सुंदरीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही काम कराया जाएगा।
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वर्ष 1996 में घोषित हुआ था पक्षी विहार
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नगर बाजार (बस्ती)। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर स्थित चंदोताल बदहाल है। परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। झूले टूट गए हैं। वॉच टावर की रेंलिंग जर्जर हो गई है, लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले हैं। इसकी बदहाली दूर करने के लिए तारणहार का इंतजार है।
एक समय था यहां कि वादियां विदेशी पक्षियों को लुभाती थीं। इसके चलते वर्ष 1996 में वन विभाग ने इस ताल को पक्षी विहार घोषित किया था। नवंबर से ही यहां साइबेरिया सहित अन्य विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। करीब तीन माह के प्रवास के बाद फरवरी व मार्च में वह अपने वतन लौट जाते हैं।
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मौजूदा समय में चंदो ताल इस कदर बदहाल हो गया है कि यहां तक पहुंचने वाले मार्ग पर चलते हुए भी भय लगता है। भीतर का नजारा इससे भी भयावह है। उपेक्षा की चादर इस कदर इस स्थल से लिपट गया है कि मनुष्य तो क्या, पशु-पक्षियों ने भी यहां से मुंह फेर लिया है।
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12 वर्ष पहले नेशनल वेटलैंड की सूची में किया गया था शामिल
चंदोताल को 12 वर्ष पहले नेशनल वेटलैंड की सूची में केंद्र सरकार ने शामिल किया था। इसे बचाने के लिए छिटपुट प्रयास किए गए, मगर जलकुंभी व सिल्ट निकालने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। अब यह ताल अपने अस्तित्व की बांट जोह रहा है। चंदोताल की बदहाली को लेकर जब क्षेत्रीय वनाधिकारी हीरालाल अवस्थी ने कहा कि सुंदरीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही काम कराया जाएगा।