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सावधान : फिशिंग अटैक बना सकता है कंगाल
Fri, 30 Jun 2023 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 30 Jun 2023 12:08 AM IST
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स्ती। आजकल ऑनलाइन फिशिंग अटैक के मामलों की बाढ़ आ गई है। लोकप्रिय वेबसाइट से मिलते-जुलते नाम की मेल आईडी बनाकर ऑनलाइन ऑफर के नाम पर लोगों से उनका व्यक्तिगत विवरण हासिल करते हैं। उसके बाद उस डाटा का इस्तेमाल करके बैंक खातों को आसानी से खंगाल लेते हैं। ऐसे साइबर अटैक से परेशान गूगल भी लोगों को आगाह कर रहा है। बैंकों की तरफ से भी इसे लेकर अलर्ट जारी किए जा रहे हैं।
साइबर एक्सपर्ट व साइबर सेल प्रभारी मजहर खान फिशिंग का मतलब बताते हैं कि लोगों को जाल में फंसाना। इसमें हैकर या साइबर अपराधी किसी न किसी तरीके से लोगों की निजी जानकारी हासिल करके उसका गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। इनका प्रमुख निशाना बैंक खाते में जमा रकम उड़ाना या झांसा देकर अपने खाते में रुपये मंगवाना होता है।
बताते हैं कि धोखे से बचने के लिए बैंक ग्राहक को उस नंबर पर गौर करना चाहिए, जिससे फोन या मैसेज आया है। फर्जी मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर असली नंबर की तरह नहीं होते। उसमें कोई न कोई अंतर जरूर होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाते हैं। अपराधी पकड़ में न आएं, इसके लिए वे ईमेल और टेक्स्ट सर्विस का सहारा लेते हैं। अगर किसी बैंक से प्रामाणिक मैसेज भेजा जाएगा तो उसमें सेंडर की आईडी जरूर होती है। इसमें बैंक का शॉर्ट नाम दिया होता है। सेंडर के इनफॉरमेशन फील्ड में बैंक की आईडी होती है न कि मोबाइल नंबर। मैसेज में यूआरएल पर क्लिक करना होता है, जिसमें वेबसाइट का डोमेन दिखता है। इससे सही और गलत मैसेज की पहचान की जा सकती है।
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क्रेडिट कार्ड जारी करने के नाम पर की धोखाधड़ी
वाकया एक - नगर बाजार के शैलेंद्र ने एक बैंक के क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया। संयोग से वह साइबर अपराधी के जाल में फंस गए और बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करने के बजाए वह उससे मिलती-जुलती फिशिंग की साइट पर अपना सारा डाटा साझा कर दिए। उसमें बैंक खाते से जुड़े सारे गोपनीय दस्तावेज भी अपलोड कर दिया। इसके दूसरे ही दिन फिशिंग करने वालों ने फोन किया और यह कहकर फंसाया कि क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए बैंक अकाउंट का पिन कोड जरूरी है। पिन कोड जानने के बाद जालसाज ने अकाउंट को हैक करके उससे जुड़े मोबाइल नंबर को भी डी-एक्टिवेट कर दिया ताकि खाते से रकम निकालने का खातेदार को पता भी न चल सके। करीब एक सप्ताह बाद जब खातेदार ने बैंक जाकर अपना अकाउंट चेक किया तो उसमें जमा 29 हजार रुपये गायब मिले।
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सिक्योरिटी के नाम पर जमा करा लिए रुपये
वाकया दो - शैलेंद्र की तरह पेट्रोल पंप आवंटन का विज्ञापन देखकर हरैया के अनुराग सिंह ने भी ऑनलाइन आवेदन किया। उसके साथ भी हैकरों ने पेट्रोल पंप का आवंटन करने के लिए सिक्योरिटी के रूप में एक लाख 29 हजार रुपये जमा करा लिया। उसके बाद वह नंबर बंद हो गया। काफी खोजबीन के बावजूद भी पता नहीं चल सका कि वह नंबर किसका था और कहां से कॉल की गई थी। वह वेबसाइट भी तभी से नहीं खुल रही।
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बचने के लिए ये करें उपाय
- किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक ना करें।
- अपने ईमेल को सिक्योर कर लें ताकि कोई अनजान ईमेल आपके ईमेल बॉक्स में ना आ सके।
- ध्यान में रखना है कि कुछ भी हो जाए अपना बैंक या किसी भी अकाउंट से जुड़ा यूजरनेम और पासवर्ड किसी भी परिस्थिति में किसी को शेयर नहीं करें।
- किसी भी वेबसाइट पर जाने से पहले उसके यूआरएल को चेक करें।
- अगर फेक वेबसाइट होगी तो आपको उसमें स्पेलिंग मिस्टेक नजर आ जाएगी।
- किसी भी असुरक्षित वेबसाइट पर जाने से बचें।
अगर आप असुरक्षित वेबसाइट पर चले गए हैं तो इस तरह की वेबसाइट पर अपनी जरूरी डिटेल्स कभी न डालें।
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साइबर एक्सपर्ट व साइबर सेल प्रभारी मजहर खान फिशिंग का मतलब बताते हैं कि लोगों को जाल में फंसाना। इसमें हैकर या साइबर अपराधी किसी न किसी तरीके से लोगों की निजी जानकारी हासिल करके उसका गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। इनका प्रमुख निशाना बैंक खाते में जमा रकम उड़ाना या झांसा देकर अपने खाते में रुपये मंगवाना होता है।
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बताते हैं कि धोखे से बचने के लिए बैंक ग्राहक को उस नंबर पर गौर करना चाहिए, जिससे फोन या मैसेज आया है। फर्जी मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर असली नंबर की तरह नहीं होते। उसमें कोई न कोई अंतर जरूर होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाते हैं। अपराधी पकड़ में न आएं, इसके लिए वे ईमेल और टेक्स्ट सर्विस का सहारा लेते हैं। अगर किसी बैंक से प्रामाणिक मैसेज भेजा जाएगा तो उसमें सेंडर की आईडी जरूर होती है। इसमें बैंक का शॉर्ट नाम दिया होता है। सेंडर के इनफॉरमेशन फील्ड में बैंक की आईडी होती है न कि मोबाइल नंबर। मैसेज में यूआरएल पर क्लिक करना होता है, जिसमें वेबसाइट का डोमेन दिखता है। इससे सही और गलत मैसेज की पहचान की जा सकती है।
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क्रेडिट कार्ड जारी करने के नाम पर की धोखाधड़ी
वाकया एक - नगर बाजार के शैलेंद्र ने एक बैंक के क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया। संयोग से वह साइबर अपराधी के जाल में फंस गए और बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करने के बजाए वह उससे मिलती-जुलती फिशिंग की साइट पर अपना सारा डाटा साझा कर दिए। उसमें बैंक खाते से जुड़े सारे गोपनीय दस्तावेज भी अपलोड कर दिया। इसके दूसरे ही दिन फिशिंग करने वालों ने फोन किया और यह कहकर फंसाया कि क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए बैंक अकाउंट का पिन कोड जरूरी है। पिन कोड जानने के बाद जालसाज ने अकाउंट को हैक करके उससे जुड़े मोबाइल नंबर को भी डी-एक्टिवेट कर दिया ताकि खाते से रकम निकालने का खातेदार को पता भी न चल सके। करीब एक सप्ताह बाद जब खातेदार ने बैंक जाकर अपना अकाउंट चेक किया तो उसमें जमा 29 हजार रुपये गायब मिले।
सिक्योरिटी के नाम पर जमा करा लिए रुपये
वाकया दो - शैलेंद्र की तरह पेट्रोल पंप आवंटन का विज्ञापन देखकर हरैया के अनुराग सिंह ने भी ऑनलाइन आवेदन किया। उसके साथ भी हैकरों ने पेट्रोल पंप का आवंटन करने के लिए सिक्योरिटी के रूप में एक लाख 29 हजार रुपये जमा करा लिया। उसके बाद वह नंबर बंद हो गया। काफी खोजबीन के बावजूद भी पता नहीं चल सका कि वह नंबर किसका था और कहां से कॉल की गई थी। वह वेबसाइट भी तभी से नहीं खुल रही।
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बचने के लिए ये करें उपाय
- किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक ना करें।
- अपने ईमेल को सिक्योर कर लें ताकि कोई अनजान ईमेल आपके ईमेल बॉक्स में ना आ सके।
- ध्यान में रखना है कि कुछ भी हो जाए अपना बैंक या किसी भी अकाउंट से जुड़ा यूजरनेम और पासवर्ड किसी भी परिस्थिति में किसी को शेयर नहीं करें।
- किसी भी वेबसाइट पर जाने से पहले उसके यूआरएल को चेक करें।
- अगर फेक वेबसाइट होगी तो आपको उसमें स्पेलिंग मिस्टेक नजर आ जाएगी।
- किसी भी असुरक्षित वेबसाइट पर जाने से बचें।
अगर आप असुरक्षित वेबसाइट पर चले गए हैं तो इस तरह की वेबसाइट पर अपनी जरूरी डिटेल्स कभी न डालें।