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कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, आपसी खींचतान में जिले मे डूबी भाजपा की नैया
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कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, आपसी खींचतान से जिले में डूबी भाजपा की नैया
बस्ती। जिले में भारतीय जनता पार्टी ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार को गंवा दिया है। जिले में सपा ने इस बार अपना परचम लहराया है। अब हार को लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा के खाटी कार्यकर्ता अभिनव उपाध्याय व अमृत वर्मा इसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुल कर रखे गए इस बयान से एक बात तो साफ हो गई कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा व पार्टी में पद व कद को लेकर मची खींचतान के चलते भाजपा की नैया यहां डूब गई।
हालांकि जिलाध्यक्ष भाजपा महेश शुक्ल इससे खारिज करते हैं। कहते हैं कि सभी कार्यकर्ता संतुष्ट हैं। रही हार की बात तो इसकी समीक्षा होगी। तत्कालीन जिलाध्यक्ष पवन कसौधन के नेतृत्व में वर्ष 2017 में भाजपा ने जिले की पांचों सीट पर कब्जा कर लिया था। यह पहला मौका था, जब किसी दल को पांचों सीट मिल गई हो, मगर इसे बरकरार रखने में यहां भाजपा कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि भाजपा ने हर्रैया की सीट को फिर से हासिल कर लिया, मगर सदर, कप्तानगंज, रुधौली व महादेवा सीट गवां दी। परिणाम आने के थोड़ी ही देर बाद सोशल मीडिया पर अभिनव उपाध्याय ने पार्टी के हार के कारणों पर टिप्पणी करते हुए मैसेज वायरल किया। इसके बाद अमृत वर्मा भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए अपनी बात रखी।
37 साल बाद अजय ने हर्रैया में दोहराया इतिहास
जिले के सबसे अहम सीट मानी जाने वाले हर्रैया विधानसभा सीट पर भाजपा के अजय सिंह ने 37 साल पुराना इतिहास दोहराया है। इससे पहले कांग्रेस के कई नेता जिले की सभी सीटों पर कई बार चुनाव जीते हैं, मगर 1985 के बाद अजय ने हर्रैया में यह काम कर दिखाया, जबकि इतने दिनों बाद ही भाजपा एक ऐसी पार्टी थी, जिसे जिले की पांचों सीट पर वर्ष 2017 में जीत मिली थी, लेकिन यह जीत वह 2022 के चुनाव में बरकरार न रख सकी।
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बोले जिलाध्यक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल ने कहा कि हार की समीक्षा होगी। इसकी नैतिक जिम्मेदारी मैं लेता हूं। कहा कि कोई कार्यकर्ता नाराज नहीं है। कोई पार्टी से खफा है यह संज्ञान में नहीं है। रही सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज की बात तो सभी को पद देना संभव नहीं है। इससे कोई नाराज हो जाए तो इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। फिर भी प्रयास है कि सभी को एक साथ बैठाकर बात की जाएगी।
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बस्ती। जिले में भारतीय जनता पार्टी ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार को गंवा दिया है। जिले में सपा ने इस बार अपना परचम लहराया है। अब हार को लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा के खाटी कार्यकर्ता अभिनव उपाध्याय व अमृत वर्मा इसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुल कर रखे गए इस बयान से एक बात तो साफ हो गई कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा व पार्टी में पद व कद को लेकर मची खींचतान के चलते भाजपा की नैया यहां डूब गई।
हालांकि जिलाध्यक्ष भाजपा महेश शुक्ल इससे खारिज करते हैं। कहते हैं कि सभी कार्यकर्ता संतुष्ट हैं। रही हार की बात तो इसकी समीक्षा होगी। तत्कालीन जिलाध्यक्ष पवन कसौधन के नेतृत्व में वर्ष 2017 में भाजपा ने जिले की पांचों सीट पर कब्जा कर लिया था। यह पहला मौका था, जब किसी दल को पांचों सीट मिल गई हो, मगर इसे बरकरार रखने में यहां भाजपा कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि भाजपा ने हर्रैया की सीट को फिर से हासिल कर लिया, मगर सदर, कप्तानगंज, रुधौली व महादेवा सीट गवां दी। परिणाम आने के थोड़ी ही देर बाद सोशल मीडिया पर अभिनव उपाध्याय ने पार्टी के हार के कारणों पर टिप्पणी करते हुए मैसेज वायरल किया। इसके बाद अमृत वर्मा भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए अपनी बात रखी।
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37 साल बाद अजय ने हर्रैया में दोहराया इतिहास
जिले के सबसे अहम सीट मानी जाने वाले हर्रैया विधानसभा सीट पर भाजपा के अजय सिंह ने 37 साल पुराना इतिहास दोहराया है। इससे पहले कांग्रेस के कई नेता जिले की सभी सीटों पर कई बार चुनाव जीते हैं, मगर 1985 के बाद अजय ने हर्रैया में यह काम कर दिखाया, जबकि इतने दिनों बाद ही भाजपा एक ऐसी पार्टी थी, जिसे जिले की पांचों सीट पर वर्ष 2017 में जीत मिली थी, लेकिन यह जीत वह 2022 के चुनाव में बरकरार न रख सकी।
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बोले जिलाध्यक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल ने कहा कि हार की समीक्षा होगी। इसकी नैतिक जिम्मेदारी मैं लेता हूं। कहा कि कोई कार्यकर्ता नाराज नहीं है। कोई पार्टी से खफा है यह संज्ञान में नहीं है। रही सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज की बात तो सभी को पद देना संभव नहीं है। इससे कोई नाराज हो जाए तो इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। फिर भी प्रयास है कि सभी को एक साथ बैठाकर बात की जाएगी।