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दीपावली की रौनक में दिखी कारोबार बढ़ने की उम्मीद
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नगर बाजार क्षेत्र में मिट्टी का दीपक बनाते कुम्हार।
- फोटो : BASTI
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दीपावली की रौनक में दिखी कारोबार बढ़ने की उम्मीद
कोरोना काल में कुम्हारों का ठप हो गया था कामकाज
मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने की जगी है उम्मीद
नगर बाजार (बस्ती)। कोरोना के चलते करीब पौने दो साल कारोबार के लिहाज से बेहद निराशाजनक रहे, लेकिन अब बाजार में दिख रही दीपावली की रौनक ने सभी के चेहरों पर चमक ला दी है। इन्हीं में कुम्हार भी शामिल हैं। दीपावली को देखते हुए वे दिन-रात मिट्टी के दीये व अन्य सामान बनाने में जुटे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनकी भी दीपावली अच्छी गुजरेगी।
दीपावली पर मिट्टी के दीये न जलें तो पर्व की परंपरा पूरी नहीं होती है। जैसे-जैसे दीपावली का त्योहार नजदीक आ रहा है, कुम्हार के चाक की गति भी तेज होती जा रही है। उन्हें आस है कि इस दीपावली पर दीयों की रोशनी के साथ कोरोना का अंधियारा भी छंट जाएगा। नगर बाजार के पूर्व ग्राम प्रधान राम गरीब ने बताया कि मिट्टी के दीपक व खिलौने बनाना उनका पुश्तैनी काम है। नवरात्र में जितनी उम्मीद थी, उतनी बिक्री नहीं हो पाई। अब दीपावली से आस है। पहले ही कोरोना महामारी के चलते काम बंद हो गए थे। इस बार दीपावली के त्योहार में मिट्टी के दीपक व खिलौने बिकने की ज्यादा उम्मीद है।
राम सेवक प्रजापति का कहना है कि एक दिन में लगभग 1500 दीपक बनाकर तैयार देते हैं। दीपक बनाने में मेहनत बहुत लगती है। पूरा परिवार इसी काम में लगा है। साल भर का खर्च इस बार दीपावली पर होने वाले व्यवसाय पर टिका है। आसपास के व्यवसायी व ग्रामीण यहां से दीपक खरीदकर ले जाते हैं। हर वर्ष दीपावली पर लगभग तीस हजार दीपक बेच देते हैं।
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राम जगत प्रजापति ने बताया कि पिछले कई वर्षों से दीपावली पर चाइनीज लाइटों का बाजार अधिक रहा। 2019 में चाइनीज सामान का विरोध हुआ तो मिट्टी के दीयों का क्रेज बढ़ गया। बीच में कोरोना महामारी के बीच मिट्टी के दीपक व खिलौनों पर ग्रहण लग गया, लेकिन इस बार दीपावली पर काफी उम्मीद है। पिंटू, राम शब्द, अवधेष व संतोष कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक झालरों के कारण मिट्टी के दीपकों की मांग कम हुई है, लेकिन आज भी दीपावली पर्व, घर, प्रतिष्ठान में माता लक्ष्मी के पूजन और छत, आंगन में मिट्टी के दीपक ही जलाए जाते हैं।
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कोरोना काल में कुम्हारों का ठप हो गया था कामकाज
मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने की जगी है उम्मीद
नगर बाजार (बस्ती)। कोरोना के चलते करीब पौने दो साल कारोबार के लिहाज से बेहद निराशाजनक रहे, लेकिन अब बाजार में दिख रही दीपावली की रौनक ने सभी के चेहरों पर चमक ला दी है। इन्हीं में कुम्हार भी शामिल हैं। दीपावली को देखते हुए वे दिन-रात मिट्टी के दीये व अन्य सामान बनाने में जुटे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनकी भी दीपावली अच्छी गुजरेगी।
दीपावली पर मिट्टी के दीये न जलें तो पर्व की परंपरा पूरी नहीं होती है। जैसे-जैसे दीपावली का त्योहार नजदीक आ रहा है, कुम्हार के चाक की गति भी तेज होती जा रही है। उन्हें आस है कि इस दीपावली पर दीयों की रोशनी के साथ कोरोना का अंधियारा भी छंट जाएगा। नगर बाजार के पूर्व ग्राम प्रधान राम गरीब ने बताया कि मिट्टी के दीपक व खिलौने बनाना उनका पुश्तैनी काम है। नवरात्र में जितनी उम्मीद थी, उतनी बिक्री नहीं हो पाई। अब दीपावली से आस है। पहले ही कोरोना महामारी के चलते काम बंद हो गए थे। इस बार दीपावली के त्योहार में मिट्टी के दीपक व खिलौने बिकने की ज्यादा उम्मीद है।
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राम सेवक प्रजापति का कहना है कि एक दिन में लगभग 1500 दीपक बनाकर तैयार देते हैं। दीपक बनाने में मेहनत बहुत लगती है। पूरा परिवार इसी काम में लगा है। साल भर का खर्च इस बार दीपावली पर होने वाले व्यवसाय पर टिका है। आसपास के व्यवसायी व ग्रामीण यहां से दीपक खरीदकर ले जाते हैं। हर वर्ष दीपावली पर लगभग तीस हजार दीपक बेच देते हैं।
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राम जगत प्रजापति ने बताया कि पिछले कई वर्षों से दीपावली पर चाइनीज लाइटों का बाजार अधिक रहा। 2019 में चाइनीज सामान का विरोध हुआ तो मिट्टी के दीयों का क्रेज बढ़ गया। बीच में कोरोना महामारी के बीच मिट्टी के दीपक व खिलौनों पर ग्रहण लग गया, लेकिन इस बार दीपावली पर काफी उम्मीद है। पिंटू, राम शब्द, अवधेष व संतोष कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक झालरों के कारण मिट्टी के दीपकों की मांग कम हुई है, लेकिन आज भी दीपावली पर्व, घर, प्रतिष्ठान में माता लक्ष्मी के पूजन और छत, आंगन में मिट्टी के दीपक ही जलाए जाते हैं।