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Basti News: त्योहारों में महंगाई का बोझ, पूजा सामग्री और मेवे के दाम बढ़े
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। त्योहारों के मौसम में महंगाई ने आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। पूजा में उपयोग होने वाला तिल का तेल 40 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। बादाम, काजू, मखाना, छुहारा और साबूदाना जैसी सामग्री भी महंगी हुई है।
शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू होने पर पूजन सामग्री की बिक्री तेज हुई है। दुकानदार राधेश्याम ने बताया कि मेवों के दाम बढ़ने से खरीदार कतरा रहे हैं। मखाना 900 रुपये थोक भाव से बढ़कर 1200 रुपये किलो के पार पहुंच गया है। बादाम के दाम 200 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये किलो हो गए हैं। काजू 900 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति किलो और छुहारा 300 से 350 रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्रमोद कुमार ने बताया कि परिवहन लागत बढ़ने से थोक मंडियों में कीमतें बढ़ी हैं। इससे खुदरा बाजार में भी मेवा और पूजा सामग्री महंगी मिल रही है।
आम परिवारों पर महंगाई का असर
आम उपभोक्ताओं का मानना है कि त्योहारों के आसपास जरूरी सामान के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। कुछ ग्राहकों ने कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की आशंका जताई है। सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल हो गया है। महंगाई का सबसे बड़ा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। आमदनी स्थिर होने से परिवारों के सामने बच्चों की जरूरतों और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
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बस्ती। त्योहारों के मौसम में महंगाई ने आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। पूजा में उपयोग होने वाला तिल का तेल 40 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। बादाम, काजू, मखाना, छुहारा और साबूदाना जैसी सामग्री भी महंगी हुई है।
शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू होने पर पूजन सामग्री की बिक्री तेज हुई है। दुकानदार राधेश्याम ने बताया कि मेवों के दाम बढ़ने से खरीदार कतरा रहे हैं। मखाना 900 रुपये थोक भाव से बढ़कर 1200 रुपये किलो के पार पहुंच गया है। बादाम के दाम 200 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये किलो हो गए हैं। काजू 900 से बढ़कर 1000 रुपये प्रति किलो और छुहारा 300 से 350 रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्रमोद कुमार ने बताया कि परिवहन लागत बढ़ने से थोक मंडियों में कीमतें बढ़ी हैं। इससे खुदरा बाजार में भी मेवा और पूजा सामग्री महंगी मिल रही है।
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आम परिवारों पर महंगाई का असर
आम उपभोक्ताओं का मानना है कि त्योहारों के आसपास जरूरी सामान के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। कुछ ग्राहकों ने कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की आशंका जताई है। सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल हो गया है। महंगाई का सबसे बड़ा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। आमदनी स्थिर होने से परिवारों के सामने बच्चों की जरूरतों और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
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