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Basti News: दुष्कर्म के दोनों आरोपी दोषमुक्त, महिला से तीन लाख की वसूली के आदेश
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बस्ती। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम राम करन यादव की अदालत ने दुष्कर्म और साजिश के मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। वहीं, मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादिनी के सरकारी अनुदान पाने के लिए मुकदमा दर्ज कराने संबंधी बयान के आधार पर अदालत ने उन्हें दिए गए तीन लाख रुपये के प्रतिकर की वसूली कर राजकोष में जमा कराने का आदेश जिला समाज कल्याण अधिकारी बस्ती को दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रुधौली थाना क्षेत्र की महिला ने 27 अगस्त 2023 को नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद और मायाराम पाठक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि मायाराम पाठक ने नौकरी दिलाने के बहाने उनकी मुलाकात धीरसेन निषाद से कराई थी। इसके बाद नौकरी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया। वादिनी ने यह भी आरोप लगाया था कि नौकरी मिलने के बाद भी उनका शारीरिक शोषण किया गया और विरोध करने पर प्रताड़ित किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने वादिनी के मोबाइल फोन में बातचीत की रिकॉर्डिंग को जांच के लिए भेजा था। हालांकि, अदालत ने माना कि आवाज के नमूनों के मिलान मात्र से दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं होता। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों से भी आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आया। अदालत ने अभियुक्त धीरसेन निषाद और मायाराम पाठक को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 120बी तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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अनुदान के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने का दिया था बयान
वादिनी ने प्रतिपरीक्षा में कहा कि उन्हें सरकार से तीन लाख रुपये मिले थे। उसने सरकारी अनुदान पाने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस बयान के आधार पर अदालत ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को नियमानुसार प्रतिकर की धनराशि की वसूली कराकर राजकोष में जमा कराने का निर्देश दिया। निर्णय की प्रति भी जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजने का आदेश दिया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, रुधौली थाना क्षेत्र की महिला ने 27 अगस्त 2023 को नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद और मायाराम पाठक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि मायाराम पाठक ने नौकरी दिलाने के बहाने उनकी मुलाकात धीरसेन निषाद से कराई थी। इसके बाद नौकरी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया। वादिनी ने यह भी आरोप लगाया था कि नौकरी मिलने के बाद भी उनका शारीरिक शोषण किया गया और विरोध करने पर प्रताड़ित किया गया।
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विवेचना के दौरान पुलिस ने वादिनी के मोबाइल फोन में बातचीत की रिकॉर्डिंग को जांच के लिए भेजा था। हालांकि, अदालत ने माना कि आवाज के नमूनों के मिलान मात्र से दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं होता। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों से भी आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आया। अदालत ने अभियुक्त धीरसेन निषाद और मायाराम पाठक को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 120बी तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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अनुदान के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने का दिया था बयान
वादिनी ने प्रतिपरीक्षा में कहा कि उन्हें सरकार से तीन लाख रुपये मिले थे। उसने सरकारी अनुदान पाने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस बयान के आधार पर अदालत ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को नियमानुसार प्रतिकर की धनराशि की वसूली कराकर राजकोष में जमा कराने का निर्देश दिया। निर्णय की प्रति भी जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजने का आदेश दिया गया है।