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अपडेट--भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या,शहर में बवाल

Wed, 09 Oct 2019 11:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2019 11:48 PM IST
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BJP leader shot dead, ruckus in the city
बस्ती के छात्र नेता कबीर तिवारी की फाइल फोटो - फोटो : BASTI
भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या, शहर में बवाल
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बस्ती। शहर के मालवीय रोड पर अग्रवाल भवन परिसर में स्थित मंदिर के बरामदे में बैठे छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आदित्य उर्फ कबीर तिवारी की बुधवार दोपहर 11 बजे दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर पैदल पहुंचे थे। चारपाई पर बैठे कबीर के हाथ और सीने में तीन गोली लगी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस घायल को जिला अस्पताल ले गई। बेहद नाजुक देख डॉक्टरों ने छात्रनेता को केजीएमसी लखनऊ रेफर कर दिया। मगर हर्रैया पहुंचने से पहले 28 वर्षीय कबीर ने दम तोड़ दिया।
करीब सवा 12 बजे एंबुलेंस शव लेकर वापस कोतवाली पहुुंची। इसके साथ छात्रों व कबीर तिवारी के समर्थकों का हुजूम भी कोतवाली पहुंच गया। कोतवाल को हत्या का जिम्मेदार मानते हुए निलंबित करने एवं एसपी को हटाने की मांग करने लगे। कुछ ही देर में सांसद हरीश द्विवेदी, सदर विधायक दयाराम चौधरी, डीएम माला श्रीवास्तव, एसपी पंकज कुमार कोतवाली जा पहुंचे। करीब तीन घंटे तक आला अधिकारी व सांसद विधायक बंद कमरे में बैठकर हालात से निपटने की रणनीति बनाते रहे। कबीर के पिता सुनील दत्त तिवारी भी तहरीर लेकर अधिकारियों के पास मौजूद थे। अंदर वे लोग भीड़ हटने का इंतजार करने लगे, लेकिन यह रणनीति उल्टी पड़ गई। बाहर प्रतिक्रिया के इंतजार में खड़ी भीड़ का धैर्य जवाब देने लगा। तभी कुछ आक्रोशित छात्र कोतवाली में सांसद, जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बाहर माहौल खराब होता गया, मगर पुलिस टस से मस नहीं हुई। छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कुछ छात्र एकाएक एंबुलेंस कब्जे में लेकर कोतवाली से रोडवेज पर पहुंच गए। डिपो के अंदर जाकर वहां खड़ी एक दर्जन से अधिक बसों के शीशे तोड़ डाले। इस दौरान कई यात्रियों को चोटें लगीं।
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रोडवेज पुलिस चौकी में रखे कागजात व फर्नीचर में आग लगा दिया। थाना नगर एवं वाल्टरगंज थाने की जीप तोड़ डाले और आग लगाने की कोशिश की। इस दौरान दोनों थानेदारों को भागकर जान बचानी पड़ी। पुलिस मूकदर्शक बनी देखती रही और उपद्रवी तोड़फोड़ करते नेहरू तिराहे के पास सीसी कैमरे, सरकारी बोर्ड और सिगनल लाइट तोड़ डाले। आधे घंटे तक अफरातफरी का माहौल रहा। दुकानों के शटर बंद हो गए। जिस समय यह उपद्रव हो रहा था, उस समय पूरा सरकारी अमला कोतवाली में मौजूद था। पीछे से भारी संख्या में भाजपा नेताओं के साथ सांसद, विधायक, नगर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि समेत हुजूम जुलूस की शक्ल में आ पहुंचा, उपद्रवी भी उसी भीड़ में शामिल होकर गांधीनगर की तरफ बढ़ गई।
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आईजी ने माना, तमाशबीन रही पुलिस
घटना के बाद कमिश्नर अनिल कुमार सागर, आईजी आशुतोष कुमार रोडवेज पर पहुंचे। अमर उजाला से बातचीत में कमिश्नर ने कहा कि मेले के दौरान भीड़ इकट्ठा कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। आईजी ने कबूल किया कि पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ हुई। हैरानगी जाहिर करते हुए इसकी जांच कराने और जिम्मेदार पुलिस वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कहा।
सामने आई अग्रवाल परिसर की बाउंड्री की रार
मालवीय रोड पर रंजीत चौराहे के पास अग्रवाल कोठी है। जिसके परिसर में छोटा सा मंदिर है। बुधवार सुबह कबीर तिवारी बाइक से वहां पहुंचे। मंदिर की सीढ़ी से पहले अपना जूता निकाल दिया और बरामदे में बिछी चारपाई पर बैठे। इसी बीच बाइक से दो युवक पहुंचे। उनमें से एक कबीर के निकट जाकर प्रणाम किया और मुड़ते ही गोली दाग दी। सामने से हुए हमले से बचने के लिए हाथ आगे कर दिया लेकिन गोली छीलते हुए सीने में जा धंसी। बरामदे में खून के छींटे देख दोनों हमलावर अलग-अलग भागे। एक पास के एक मकान में घुस गया, जबकि दूसरे को भागते समय लोगों ने पकड़ लिया।
भोलू गुप्ता ने दिए थे तमंचे
तीन असलहों के साथ पुलिस की गिरफ्त में आए अभय तिवारी एवं अनुराग से एसपी ने पूछताछ की तो दोनों ने भोलू गुप्ता का नाम लिया। कहा कि उसने 20 हजार रुपये लेकर उसे रंजीत चौराहे की एक चाय की दुकान पर आकर भोलू गुप्ता ने उसे तीनों कट्टे दिए। पुलिस के लिए पहेली बनता जा रहा भोलू गुप्ता असली साजिशकर्ता माना जा रहा है। अभय व अनुराग से काफी घुमा फिराकर भोलू के बारे में ब्योरा जानने का प्रयास किया लेकिन दोनों इससे ज्यादा बताने से बचने लगे। यह कहकर टाल दिया कि भोलू ही उनसे आकर मिलता था। दोनों ने कारण मंदिर में बन रही बाउंड्री का विवाद बताया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी पहले कबीर के गुट के सदस्य थे, मगर इन दिनों अनबन चल रही थी।
कप्तानगंज के एंठी में मातम
एडवोकेट सुनील दत्त तिवारी के पुत्र आदित्य नारायण उर्फ कबीर तिवारी मूल रूप से कप्तानगंज थाने के एंठी गांव निवासी थे। तीन भाइयों में सबसे छोटे कबीर ने गांव से आकर शहर में न केवल अच्छीखासी पहचान बनाई, बल्कि छात्र राजनीति में भी हनक कायम किया। एक दो बार हार का सामना करने के बाद वह एपीएनपीजी कालेज छात्र संघ का अध्यक्ष निर्वाचित हो जाने के बाद कबीर की पहचान दबंग छात्रनेता की बनने लगी। राजनैतिक शह पाकर कबीर काफी निरंकुश होता गया और ताबड़तोड़ कई मुकदमे दर्ज होते गए। इधर कुछ वर्षों से जमीन-जायदाद की खरीदफरोख्त का काम करने लगा था। जिसे लेकर भी कई विवाद पुलिस की डायरी में दर्ज हैं।

सांसद दे चुके हैं धरना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्थन के एपीएन का अध्यक्ष बनने वाले कबीर से संगठन ने यूं तो किनारा कर लिया था, लेकिन भाजपाई खेमे का वरदहस्त बरकारर रहा। नौ सितंबर 2017 को कोतवाली में तोड़फोड़ करके उसे लॉकअप से पार्टी के लोग निकाल ले गए थे। इसमें वर्तमान नगर पालिका चेयरमैन पुष्कर मिश्र, वरिष्ठ भाजपा नेता प्रमोद पांडेय सहित 201 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसके बाद सांसद हरीश द्विवेदी, महादेवा विधायक रवि सोनकर, हर्रैया विधायक के प्रतिनिधि, भाजपा जिलाध्यक्ष पवन कसौधन आदि ने आधीरात तक धरना दिया था।
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