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साइकिल से चलना भी दुश्वार
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Wed, 06 Jul 2016 11:05 PM IST
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कुदहरा क्षेत्र के भिखारीपुर गांव में जाने का सकरा रास्ता।
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कुदरहा ब्लॉक क्षेत्र के राजस्व ग्राम भिखारीपुर आज भी एक अदद सड़क व अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। नहर पटरी से गांव जाने का मुख्य रास्ता है वह भी गड्ढों में बदल चुका है। प्रशासनिक ही नहीं जनप्रतिनिधियों के उपेक्षित व्यवहार से लोग खफा हैं।
2006 में सरयू नहर की पटरी बनने से यह लगा था कि अब रामजानकी मार्ग के मनौवा चौराहा से गांव में आना जाना आसान हो जाएगा लेकिन 10 साल बाद भी पटरी को पिच की बात दूर एक खड़ंजा तक नहीं लग सका। लगातार आवागमन के चलते पटरी भी क्षतिग्रस्त हो गई है। जिसमें बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसी दुर्दशा में पैदल भी पार पाना दूभर ही है। नहर की पटरी से गांव में जाने के लिए दो मीटर चकरोड होने के कारण शादी विवाह में भी गांव में चार पहिया वाहन नहीं जा पाता है। गांव में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से रास्ते में जमा रहता है।
पेयजल के लिए लगा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब है। बरसात के मौसम में गांव के चारों तरफ पानी भर जाता है जिससे बच्चे गिरते पड़ते स्कूल जाते हैं। गांव के रविचंद्र त्रिपाठी, राम शब्द, रामकुमार, हीरालाल, चौथीराम, अनिरुद्ध मिश्र, भोलू तिवारी, माधव, बुद्धिराम, काशीराम, राम चरित्र आदि की मांग है कि कम से कम एक संपर्क मार्ग गांव के लिए बनाया जाए।
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2006 में सरयू नहर की पटरी बनने से यह लगा था कि अब रामजानकी मार्ग के मनौवा चौराहा से गांव में आना जाना आसान हो जाएगा लेकिन 10 साल बाद भी पटरी को पिच की बात दूर एक खड़ंजा तक नहीं लग सका। लगातार आवागमन के चलते पटरी भी क्षतिग्रस्त हो गई है। जिसमें बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसी दुर्दशा में पैदल भी पार पाना दूभर ही है। नहर की पटरी से गांव में जाने के लिए दो मीटर चकरोड होने के कारण शादी विवाह में भी गांव में चार पहिया वाहन नहीं जा पाता है। गांव में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से रास्ते में जमा रहता है।
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पेयजल के लिए लगा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब है। बरसात के मौसम में गांव के चारों तरफ पानी भर जाता है जिससे बच्चे गिरते पड़ते स्कूल जाते हैं। गांव के रविचंद्र त्रिपाठी, राम शब्द, रामकुमार, हीरालाल, चौथीराम, अनिरुद्ध मिश्र, भोलू तिवारी, माधव, बुद्धिराम, काशीराम, राम चरित्र आदि की मांग है कि कम से कम एक संपर्क मार्ग गांव के लिए बनाया जाए।
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