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बस्ती का स्थापना दिवस मनाया
basti
Updated Sun, 06 May 2018 11:47 PM IST
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कायऱ्र्यक्रम
- फोटो : amar ujala
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बस्ती।
यह धरती ऋषियों मुनियों, साहित्यकारों और शहीदों की रही है। आज का युवा उनके जीवन से प्रेरणा लेकर बस्ती के गौरवशाली इतिहास को चार चांद लगाए। ये उद्गार राना दिनेश प्रताप सिंह ने व्यक्त किए। वह शनिवार को बस्ती के 152वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्होंने स्थापना दिवस मनाए जाने के औचित्य को रेखांकित किया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत वृद्धाश्रम की माताओं ने केक काटकर किया। कच्ची शराब के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाली दुबौलिया ब्लॉक के ग्राम पूरे ओरीराय निवासी रानी कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि रहीं। परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य योगेश शुक्ल ने जनपद के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर विस्तार से अपनी बात रखी। प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद उपाध्याय ने बस्ती की गाथा को स्वर दिया। दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाओं से मुग्ध कर दिया। सीतापुर के दृष्टिहीन कवि आलोक सीतापुरी ने प्रेम पतंग उड़ान भरे, विधि हाथन में रसरी.. सुनाकर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। इसके बाद दिल्ली की ज्योतिमा शुक्ला ने शृंगार रस की कविता सुनाई। हास्य कवि अंबिका अंबुज लखीमपुरखीरी ने अपनी कविता सबको गुदगुदाया। लखनऊ की डॉ. मंजूश्री प्रीत ने अपनी कविता में मानवीय संवेदना बिखेरी। इसके बाद बारी आई ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक की। उन्होंने हम मजदूरों की बस्ती में कब रात सुहानी आती है सुनाया। कार्यक्रम में सागर गोरखपुरी, सत्येंद्र नाथ मतवाला, लालमणि प्रसाद, डॉ. स्नेहा पांडेय, अजय श्रीवास्तव अश्क पंकज सोनी, सलीम बस्तवी, ताजीर बस्तवी ने अपनी अपनी रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल केसी मिश्र व संचालन कवि रामकृष्ण लाल जगमग ने किया। समारोह के दौरान वृद्धाश्रम की माताओं को रानी और कार्यक्रम के आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने उपहार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मनोज सिंह, शिव पूजन लाल श्रीवास्तव, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चंद्रिका सिंह, शांतिभूषण त्रिपाठी, बीसीडीए के अध्यक्ष राजेश सिंह, अविनाश श्रीवास्तव, अश्वनी राज, संतोष भट्ट, प्रशांत श्रीवास्तव, रंजीत सिंह, प्रतीक श्रीवास्तव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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यह धरती ऋषियों मुनियों, साहित्यकारों और शहीदों की रही है। आज का युवा उनके जीवन से प्रेरणा लेकर बस्ती के गौरवशाली इतिहास को चार चांद लगाए। ये उद्गार राना दिनेश प्रताप सिंह ने व्यक्त किए। वह शनिवार को बस्ती के 152वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्होंने स्थापना दिवस मनाए जाने के औचित्य को रेखांकित किया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत वृद्धाश्रम की माताओं ने केक काटकर किया। कच्ची शराब के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाली दुबौलिया ब्लॉक के ग्राम पूरे ओरीराय निवासी रानी कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि रहीं। परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य योगेश शुक्ल ने जनपद के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर विस्तार से अपनी बात रखी। प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद उपाध्याय ने बस्ती की गाथा को स्वर दिया। दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाओं से मुग्ध कर दिया। सीतापुर के दृष्टिहीन कवि आलोक सीतापुरी ने प्रेम पतंग उड़ान भरे, विधि हाथन में रसरी.. सुनाकर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। इसके बाद दिल्ली की ज्योतिमा शुक्ला ने शृंगार रस की कविता सुनाई। हास्य कवि अंबिका अंबुज लखीमपुरखीरी ने अपनी कविता सबको गुदगुदाया। लखनऊ की डॉ. मंजूश्री प्रीत ने अपनी कविता में मानवीय संवेदना बिखेरी। इसके बाद बारी आई ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक की। उन्होंने हम मजदूरों की बस्ती में कब रात सुहानी आती है सुनाया। कार्यक्रम में सागर गोरखपुरी, सत्येंद्र नाथ मतवाला, लालमणि प्रसाद, डॉ. स्नेहा पांडेय, अजय श्रीवास्तव अश्क पंकज सोनी, सलीम बस्तवी, ताजीर बस्तवी ने अपनी अपनी रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल केसी मिश्र व संचालन कवि रामकृष्ण लाल जगमग ने किया। समारोह के दौरान वृद्धाश्रम की माताओं को रानी और कार्यक्रम के आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने उपहार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मनोज सिंह, शिव पूजन लाल श्रीवास्तव, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चंद्रिका सिंह, शांतिभूषण त्रिपाठी, बीसीडीए के अध्यक्ष राजेश सिंह, अविनाश श्रीवास्तव, अश्वनी राज, संतोष भट्ट, प्रशांत श्रीवास्तव, रंजीत सिंह, प्रतीक श्रीवास्तव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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