{"_id":"94fe4204dfae71d135a75c5705a1c872","slug":"basti-dipo-became-highest-earner-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सबसे अधिक कमाई करने वाला बना बस्ती डिपो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सबसे अधिक कमाई करने वाला बना बस्ती डिपो
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2016 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। बस्ती डिपो पूर्वांचल के आठ जनपदों में सबसे अधिक कमाई करने वाला
विज्ञापन
डिपो बन गया है। इस डिपो से प्रति दिन 93 बसों का संचालन हो रहा है। लक्ष्य
के अतिरिक्त प्रति बस 365 रुपये प्रति दिन के हिसाब से आमदनी हो रही है।
इस तरह डिपो को प्रति दिन 33,945 रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है।
सबसे अधिक लाभ बस्ती-बांसी रूट से हो रहा है। यह स्थिति उस समय की है जब प्रति बस का लोड फैक्टर 70 फीसदी है। एआरएम ओम मिश्र ने बताया कि अगर प्रतिबंधित और अनियमित बसों का संचालन बंद हो जाए तो लोड फैक्टर शत-प्रतिशत हो जाएगा और आय 30 फीसदी बढ़ जाएगी।
बस्ती डिपो के बसों से प्रति दिन साढ़े चार यात्री विभिन्न स्थानों के लिए यात्रा करते हैं। हालांकि इस डिपो से एक भी वातानुकूलित बस नहीं चलती, जब कि यात्रियों की मांग है। विभाग का निर्देश है कि उन्हीं रूटों पर बस चलाया जाए जहां पर 50 फीसदी यात्री मिलते हैं। एआरएम ने बताया कि जिले में कोई भी ऐसा रूट नहीं हैं, जिसमें 50 फीसदी से कम यात्री मिलते हैं।
बताया कि लोड फैक्टर 100 फीसदी से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है, इसके लिए रूटों पर चलने वाले प्रतिबंधित और अनियमित वाहनों का संचालन बंद कराने के लिए प्रशासन, पुलिस और एआरटीओ को कई पत्र लिखे गए हैं। बताया कि फरवरी में 22 दिनों में डिपो ने लक्ष्य का 104 फीसदी आमदनी की है, जो कि गोरखपुर, देवरिया और अन्य आठ डिपो से अधिक है। 9656 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 10021 लाख की आय हो चुकी है। 22 दिन में 205 लाख रुपये की आय हुई।
संविदा चालक और परिचालक के भरोसे चल रहा डिपो
बस्ती डिपो में बसों का संचालन करने के लिए विभाग संविदा चालक और परिचालक का सहारा ले रहा है। विभाग में जो नियमित चालक और परिचालक अवशेष रह गए है, उनकी आयु अधिक होने के कारण उनसे कम ही काम लिया जा रहा है। संविदा के कुल चालकों की संख्या 112 और परिचालकों की संख्या 134 है, जबकि नियमित चालक 84 और परिचालक 69 हैं।
सबसे अधिक लाभ बस्ती-बांसी रूट से हो रहा है। यह स्थिति उस समय की है जब प्रति बस का लोड फैक्टर 70 फीसदी है। एआरएम ओम मिश्र ने बताया कि अगर प्रतिबंधित और अनियमित बसों का संचालन बंद हो जाए तो लोड फैक्टर शत-प्रतिशत हो जाएगा और आय 30 फीसदी बढ़ जाएगी।
बस्ती डिपो के बसों से प्रति दिन साढ़े चार यात्री विभिन्न स्थानों के लिए यात्रा करते हैं। हालांकि इस डिपो से एक भी वातानुकूलित बस नहीं चलती, जब कि यात्रियों की मांग है। विभाग का निर्देश है कि उन्हीं रूटों पर बस चलाया जाए जहां पर 50 फीसदी यात्री मिलते हैं। एआरएम ने बताया कि जिले में कोई भी ऐसा रूट नहीं हैं, जिसमें 50 फीसदी से कम यात्री मिलते हैं।
बताया कि लोड फैक्टर 100 फीसदी से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है, इसके लिए रूटों पर चलने वाले प्रतिबंधित और अनियमित वाहनों का संचालन बंद कराने के लिए प्रशासन, पुलिस और एआरटीओ को कई पत्र लिखे गए हैं। बताया कि फरवरी में 22 दिनों में डिपो ने लक्ष्य का 104 फीसदी आमदनी की है, जो कि गोरखपुर, देवरिया और अन्य आठ डिपो से अधिक है। 9656 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 10021 लाख की आय हो चुकी है। 22 दिन में 205 लाख रुपये की आय हुई।
संविदा चालक और परिचालक के भरोसे चल रहा डिपो
बस्ती डिपो में बसों का संचालन करने के लिए विभाग संविदा चालक और परिचालक का सहारा ले रहा है। विभाग में जो नियमित चालक और परिचालक अवशेष रह गए है, उनकी आयु अधिक होने के कारण उनसे कम ही काम लिया जा रहा है। संविदा के कुल चालकों की संख्या 112 और परिचालकों की संख्या 134 है, जबकि नियमित चालक 84 और परिचालक 69 हैं।