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Basti News: महायोजना की राह आसान, बीडीए के प्रस्ताव पर लगी मुहर
Sun, 13 Aug 2023 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 13 Aug 2023 11:37 PM IST
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बस्ती। शहरी क्षेत्र के नियोजित विकास का समुचित खाका खींच कर समुचित विकास का रास्ता अब भी पूरा नहीं हो सका है। शासन में एक सप्ताह पहले बीडीए की बैठक में प्रस्तुतीकरण पर शासन ने मुहर तो लगा दी, मगर अब जिन तीन बिंदुओं पर आपत्ति थी वह बरकरार है। यानी महायोजना की फाइल फिर एक बार लौट आई। अब तीनों बिंदुओं को पूरा करने में बीडीओ जुटा है, मगर इसमें सबसे बड़ी अड़चन दूसरे विभागों से सहयोग की है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों की सूची सिंचाई विभाग के खाते में तो पार्क आदि में निर्मित मकानों के लैंड यूज बदलने की नीति शासन स्तर से तय होनी है।
बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए)वर्ष 2018 में यहां प्रभावी किया गया था। इसके बाद दो साल कोरोना की वजह से कामकाज लगभग ठप रहा। वर्ष 2021 में महायोजना-2031 लागू कराने की कवायद शुरू हुई। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद आपत्तियों की ढेर लग गई, जिसके निस्तारण में लंबा वक्त लगा। इधर वर्ष 2023 में मई में मास्टर प्लान-2031 प्राधिकरण ने अंतिम रूप दिया। महायोजना की यह फाइल स्वीकृति के लिए शासन में भेज दी गई। दो माह बाद यह फाइल टिप्पणी के साथ वापस आ गई। इसे दुरुस्त कराकर बीडीए ने सप्ताह भर पहले शासन में प्रजेंटेशन के लिए प्रस्तुत किया।
शासन ने प्रस्तुतीकरण को ठीक करार देते हुए आपत्तियों के निस्तारण का पेंच लगाकर फाइल वापस कर दी है।
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तीन अहम बिंदु, जिन पर नहीं हुआ कार्य
बिंदु-1
महायोजना में नहीं दी गई भूमि प्रकार की जानकारी
मास्टर प्लान-2031 में भूमि प्रकार की जानकारी नहीं दर्शाई गई है। शासन ने इस पर टिप्पणी की है। बीडीए में शहर से सटे कुल 217 गांव शामिल है। शासन से कहा गया है कि शहरी विस्तार से संबंधित गांवों में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो। मास्टर प्लान में तालाब, कब्रिस्तान, चारागाह, बंजर एवं अन्य किस्म की सरकारी भूमि इंगित होनी चाहिए।
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बिंदु- 2
मास्टर प्लान से गायब है तीन गांव
मास्टर प्लान 2031 से तीन गांव छूट गए। देवापार, सोनूपार और बेलवादर को प्राधिकरण ने नहीं शामिल किया। शासन की टिप्पणी में यह तीन गांव भी शामिल हैं। शासन स्तर से कहा गया कि इन गांवों को महायोजना में शामिल करने के साथ वहां की भौगोलिक स्थिति का विवरण भी दिया जाए। धरातलीय स्थिति के उल्लेख से ही विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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बिंदु- 3
नदी के तटवर्ती गांवों का उल्लेख
मास्टर प्लान-2031 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का भी उल्लेख नहीं है। शासन ने इस पर भी आपत्ति जताई है। बीडीए को स्पष्ट करना होगा कि नदी के तटवर्ती गांव कौन से है, जहां बाढ़ की संभावना रहती है। इन्हें महायोजना में अलग श्रेणी में रखना है। इसके अलावा बड़े जलाशय, पोखरे भी मास्टर प्लान में अलग से चिह्नित किए जाएंगे। राजस्व अभिलेखों से इसका मेल होना जरूरी है।
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घर-घर सर्वे कर रही बीडीए की टीम
बीडीए परिक्षेत्र में आने वाले पार्क व ग्रीन लैंड की स्थिति का आंकलन शुरू कर दिया गया है। इसके टीम घर-घर सर्वे कर रही है। वह यह कि आखिर जिस लैंड को पार्क व ग्रीन जोन दिखाया गया है वहां क्या स्थिति है। कहीं ऐसा तो नहीं भवन बना हो अथवा निर्माणाधीन हो कि स्थिति से शासन को बीडीए अवगत कराएगा। नक्शे में भी इसे सुधारा जा सकेगा।
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मास्टर प्लान-2031 में जिन बिंदुओं पर शासन ने टिप्पणी की है, उसको दुरुस्त कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। बहुत जल्द ही शासन के निर्देशों के अनुरूप महायोजना-2031 को दुरुस्त कर फिर से भेज दिया जाएगा। बीडीए की ओर से जमीन की वस्तुस्थिति का आंकलन करने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। सिंचाई विभाग से बाढ़ क्षेत्र व नदी किनारे के जमीन का खाका मांगा गया है। शीघ्र ही स्थानीय स्तर की आपत्तियों को दूर कर लिया जाएगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।
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बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए)वर्ष 2018 में यहां प्रभावी किया गया था। इसके बाद दो साल कोरोना की वजह से कामकाज लगभग ठप रहा। वर्ष 2021 में महायोजना-2031 लागू कराने की कवायद शुरू हुई। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद आपत्तियों की ढेर लग गई, जिसके निस्तारण में लंबा वक्त लगा। इधर वर्ष 2023 में मई में मास्टर प्लान-2031 प्राधिकरण ने अंतिम रूप दिया। महायोजना की यह फाइल स्वीकृति के लिए शासन में भेज दी गई। दो माह बाद यह फाइल टिप्पणी के साथ वापस आ गई। इसे दुरुस्त कराकर बीडीए ने सप्ताह भर पहले शासन में प्रजेंटेशन के लिए प्रस्तुत किया।
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शासन ने प्रस्तुतीकरण को ठीक करार देते हुए आपत्तियों के निस्तारण का पेंच लगाकर फाइल वापस कर दी है।
तीन अहम बिंदु, जिन पर नहीं हुआ कार्य
बिंदु-1
महायोजना में नहीं दी गई भूमि प्रकार की जानकारी
मास्टर प्लान-2031 में भूमि प्रकार की जानकारी नहीं दर्शाई गई है। शासन ने इस पर टिप्पणी की है। बीडीए में शहर से सटे कुल 217 गांव शामिल है। शासन से कहा गया है कि शहरी विस्तार से संबंधित गांवों में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो। मास्टर प्लान में तालाब, कब्रिस्तान, चारागाह, बंजर एवं अन्य किस्म की सरकारी भूमि इंगित होनी चाहिए।
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मास्टर प्लान से गायब है तीन गांव
मास्टर प्लान 2031 से तीन गांव छूट गए। देवापार, सोनूपार और बेलवादर को प्राधिकरण ने नहीं शामिल किया। शासन की टिप्पणी में यह तीन गांव भी शामिल हैं। शासन स्तर से कहा गया कि इन गांवों को महायोजना में शामिल करने के साथ वहां की भौगोलिक स्थिति का विवरण भी दिया जाए। धरातलीय स्थिति के उल्लेख से ही विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बिंदु- 3
नदी के तटवर्ती गांवों का उल्लेख
मास्टर प्लान-2031 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का भी उल्लेख नहीं है। शासन ने इस पर भी आपत्ति जताई है। बीडीए को स्पष्ट करना होगा कि नदी के तटवर्ती गांव कौन से है, जहां बाढ़ की संभावना रहती है। इन्हें महायोजना में अलग श्रेणी में रखना है। इसके अलावा बड़े जलाशय, पोखरे भी मास्टर प्लान में अलग से चिह्नित किए जाएंगे। राजस्व अभिलेखों से इसका मेल होना जरूरी है।
घर-घर सर्वे कर रही बीडीए की टीम
बीडीए परिक्षेत्र में आने वाले पार्क व ग्रीन लैंड की स्थिति का आंकलन शुरू कर दिया गया है। इसके टीम घर-घर सर्वे कर रही है। वह यह कि आखिर जिस लैंड को पार्क व ग्रीन जोन दिखाया गया है वहां क्या स्थिति है। कहीं ऐसा तो नहीं भवन बना हो अथवा निर्माणाधीन हो कि स्थिति से शासन को बीडीए अवगत कराएगा। नक्शे में भी इसे सुधारा जा सकेगा।
मास्टर प्लान-2031 में जिन बिंदुओं पर शासन ने टिप्पणी की है, उसको दुरुस्त कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। बहुत जल्द ही शासन के निर्देशों के अनुरूप महायोजना-2031 को दुरुस्त कर फिर से भेज दिया जाएगा। बीडीए की ओर से जमीन की वस्तुस्थिति का आंकलन करने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। सिंचाई विभाग से बाढ़ क्षेत्र व नदी किनारे के जमीन का खाका मांगा गया है। शीघ्र ही स्थानीय स्तर की आपत्तियों को दूर कर लिया जाएगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।