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Basti News: उधार के अभियंता पर बीडीए निर्भर, अन्य पद भी खाली
Thu, 10 Aug 2023 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 10 Aug 2023 12:03 AM IST
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बस्ती। पांच साल पूरे होने के बाद भी बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) पूर्ण रूप से स्थापित नहीं हो सका। इंजीनियरिंग से लेकर प्लॉनिंग तक के कार्यों के लिए बीडीए के पास स्टॉफ नहीं है। शुरू से ही उधार के अभियंता पर बीडीए निर्भर रह गया है। पर्याप्त इंजीनियरों की व्यवस्था नहीं बन पाई है। इसके अलावा कार्यालयी कामकाज निपटाने वाले लिपिकों की भी कमी है। नतीजा संविदा पर तैनात तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी बाबू और इंजीनियरों तक का दायित्व संभालते हुए देखे जा रहे हैं।
स्थापना के समय से ही बीडीए पर लगा ग्रहण अभी तक समाप्त नहीं हो सका है। वर्ष 2016 में बीडीए का गठन होने के बाद शुरू के दो साल तक कार्यालय की स्थापना ही नहीं हुई। 2018 में तत्कालीन डीएम डॉ. राजशेखर की पहल पर गांधी कला भवन को बीडीए के हवाले किया गया। तब जाकर कार्यालय खुल पाया। इसके बाद विभिन्न पदों के सृजन के सापेक्ष तैनाती अभी तक नहीं हो सकी। बीडीए में कुल पांच अभियंताओं के पद हैं। इसमें एक अधिशासी अभियंता, दो सहायक अभियंता, दो अवर अभियंता का पद शामिल है। शुरुआत में एक अधिशासी अभियंता और एक अवर अभियंता की तैनाती हुई। जिनके साथ बीडीए प्रभाव में आने लगा।
जिला प्रशासन की मदद से शुरू से ही दूसरे विभाग के एक अवर अभियंता यहां संबद्ध होते रहे। बाद में शासन स्तर से दो सहायक अभियंताओं की स्थायी रूप से तैनाती हुई। करीब छह माह पूर्व अधिशासी अभियंता पंकज पांडेय का यहां से स्थानांतरण हो गया और बीडीए के एक अवर अभियंता लंबे अवकाश पर चले गए। इसके बाद बीडीए फिर लड़खड़ा गया। सहायक अभियंता संदीप कुमार को अधिशासी अभियंता का प्रभार मिल गया। उनके साथ एक अन्य सहायक अभियंता अरुण शर्मा ही रह गए।
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यहां संबद्ध किए गए पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता केजी चौधरी छह दिन पूर्व रिश्वत लेने के आरोप में हटा दिए गए। अब बीडीए का पूरा बोझ केवल दो सहायक अभियंताओं पर है। इसके अलावा कर्मचारियों की भी कमी बरकरार है। प्लाॅनिंग के कार्यों के लिए यहां पांच पद सृजित हैं। मानचित्रकार, मुख्य मानचित्रकार, ड्राफ्टमैन, ट्रेनर एवं सहायक नगर नियोजक में से किसी की भी तैनाती नहीं है। लिपिक के दो पद हैं। इसमें एक पद खाली है। संविदा लिपिक पर ही कार्यालय के कामकाज का जिम्मा है। इसके अलावा चार मेट में से वर्तमान में एक मेट तैनात है। तीन ने नौकरी छोड़ दी है। संविदा पर एक पत्रवाहक भी तैनात है।
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बीडीए के पास प्रशासनिक अफसर भी नहीं
बीडीए के पास खुद के प्रशासनिक अफसर भी नहीं हैं। सचिव पद का प्रभार वर्तमान में अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद्र के पास है। इसके पहले इस पद का प्रभार एसडीएम के पास था। बीडीए उपाध्यक्ष पद का प्रभार शुरू से ही डीएम खुद संभालते आ रहे हैं, जबकि पदेन अध्यक्ष मंडलायुक्त हैं।
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स्टॉफ नहीं फिर भी बढ़ता जा रहा दायरा
2016 में गठन के समय नगर पालिका समेत 69 गांव बीडीए में शामिल किए गए थे। इनका मास्टर प्लान भी तैयार हुआ था। इसका क्षेत्रफल 51.12 वर्ग किलोमीटर था। महायोजना 2021 में बीडीए का दायरा बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर में फैल गया। नगर पालिका समेत कुल 217 गांव शामिल हो गए। महायोजना 2031 के लिए इन गांवों का मास्टर प्लॉन भी तैयार कर लिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य का बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।
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स्टाॅफ की डिमांड शासन से की जाती है। सृजित पदों के सापेक्ष रिक्तियों से शासन को अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल मौजूद स्टाफ की मदद से बीडीए का कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाता है।
-कमलेश चंद्र, सचिव/अपर जिलाधिकारी।
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स्थापना के समय से ही बीडीए पर लगा ग्रहण अभी तक समाप्त नहीं हो सका है। वर्ष 2016 में बीडीए का गठन होने के बाद शुरू के दो साल तक कार्यालय की स्थापना ही नहीं हुई। 2018 में तत्कालीन डीएम डॉ. राजशेखर की पहल पर गांधी कला भवन को बीडीए के हवाले किया गया। तब जाकर कार्यालय खुल पाया। इसके बाद विभिन्न पदों के सृजन के सापेक्ष तैनाती अभी तक नहीं हो सकी। बीडीए में कुल पांच अभियंताओं के पद हैं। इसमें एक अधिशासी अभियंता, दो सहायक अभियंता, दो अवर अभियंता का पद शामिल है। शुरुआत में एक अधिशासी अभियंता और एक अवर अभियंता की तैनाती हुई। जिनके साथ बीडीए प्रभाव में आने लगा।
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जिला प्रशासन की मदद से शुरू से ही दूसरे विभाग के एक अवर अभियंता यहां संबद्ध होते रहे। बाद में शासन स्तर से दो सहायक अभियंताओं की स्थायी रूप से तैनाती हुई। करीब छह माह पूर्व अधिशासी अभियंता पंकज पांडेय का यहां से स्थानांतरण हो गया और बीडीए के एक अवर अभियंता लंबे अवकाश पर चले गए। इसके बाद बीडीए फिर लड़खड़ा गया। सहायक अभियंता संदीप कुमार को अधिशासी अभियंता का प्रभार मिल गया। उनके साथ एक अन्य सहायक अभियंता अरुण शर्मा ही रह गए।
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यहां संबद्ध किए गए पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता केजी चौधरी छह दिन पूर्व रिश्वत लेने के आरोप में हटा दिए गए। अब बीडीए का पूरा बोझ केवल दो सहायक अभियंताओं पर है। इसके अलावा कर्मचारियों की भी कमी बरकरार है। प्लाॅनिंग के कार्यों के लिए यहां पांच पद सृजित हैं। मानचित्रकार, मुख्य मानचित्रकार, ड्राफ्टमैन, ट्रेनर एवं सहायक नगर नियोजक में से किसी की भी तैनाती नहीं है। लिपिक के दो पद हैं। इसमें एक पद खाली है। संविदा लिपिक पर ही कार्यालय के कामकाज का जिम्मा है। इसके अलावा चार मेट में से वर्तमान में एक मेट तैनात है। तीन ने नौकरी छोड़ दी है। संविदा पर एक पत्रवाहक भी तैनात है।
बीडीए के पास प्रशासनिक अफसर भी नहीं
बीडीए के पास खुद के प्रशासनिक अफसर भी नहीं हैं। सचिव पद का प्रभार वर्तमान में अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद्र के पास है। इसके पहले इस पद का प्रभार एसडीएम के पास था। बीडीए उपाध्यक्ष पद का प्रभार शुरू से ही डीएम खुद संभालते आ रहे हैं, जबकि पदेन अध्यक्ष मंडलायुक्त हैं।
स्टॉफ नहीं फिर भी बढ़ता जा रहा दायरा
2016 में गठन के समय नगर पालिका समेत 69 गांव बीडीए में शामिल किए गए थे। इनका मास्टर प्लान भी तैयार हुआ था। इसका क्षेत्रफल 51.12 वर्ग किलोमीटर था। महायोजना 2021 में बीडीए का दायरा बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर में फैल गया। नगर पालिका समेत कुल 217 गांव शामिल हो गए। महायोजना 2031 के लिए इन गांवों का मास्टर प्लॉन भी तैयार कर लिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य का बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।
स्टाॅफ की डिमांड शासन से की जाती है। सृजित पदों के सापेक्ष रिक्तियों से शासन को अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल मौजूद स्टाफ की मदद से बीडीए का कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाता है।
-कमलेश चंद्र, सचिव/अपर जिलाधिकारी।