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द्वापर जैसे मुहूर्त में होगा कृष्ण जन्म
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:22 PM IST
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सुपरकिड्ज एकेडेमी में श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया।
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सोलह कला से परिपूर्ण ब्रह्म श्रीकृष्ण के प्रादुर्भाव के निमित्त बृहस्पतिवार को धूमधाम से 5243वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस जन्माष्टमी पर अष्टमी उदया तिथि तथा मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र लग रहा है। ज्योतिषी बताते हैं कि अबकी बार माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी द्वापर में कृष्ण जन्म के समय थी। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था।
पंडित जय प्रकाश द्विवेदी के अनुसार 24 अगस्त को रात 10:17 मिनट से ही अष्टमी लग जाएगी। लेकिन व्रत रखने का अच्छा मुहूर्त बृहस्पतिवार को ही है। जन्माष्टमी पूजन का शुभ मुहूर्त 12 बजे से 12:45 तक का है। वहीं वत्र रखने वालों के लिए पारण का समय 26 अगस्त को 10:52 के बाद है। जन्माष्टमी के दिन, श्री कृष्ण पूजा निशीथ यानी रात्रि समय पर की जाती है। इस समय पर भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
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पंडित जय प्रकाश द्विवेदी के अनुसार 24 अगस्त को रात 10:17 मिनट से ही अष्टमी लग जाएगी। लेकिन व्रत रखने का अच्छा मुहूर्त बृहस्पतिवार को ही है। जन्माष्टमी पूजन का शुभ मुहूर्त 12 बजे से 12:45 तक का है। वहीं वत्र रखने वालों के लिए पारण का समय 26 अगस्त को 10:52 के बाद है। जन्माष्टमी के दिन, श्री कृष्ण पूजा निशीथ यानी रात्रि समय पर की जाती है। इस समय पर भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
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