{"_id":"65720d497b5d7b7a580fdf4a","slug":"as-the-weather-changed-patients-suffering-from-neck-and-back-pain-increased-basti-news-c-207-1-bst1001-8048-2023-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: सड़क के मध्य से 30 मीटर तक रहेगा ग्रीन लैंड... नए मास्टर प्लान में घटा दायरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: सड़क के मध्य से 30 मीटर तक रहेगा ग्रीन लैंड... नए मास्टर प्लान में घटा दायरा
Thu, 07 Dec 2023 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 07 Dec 2023 11:52 PM IST
विज्ञापन
महायोजना 2031 के मास्टर प्लान में हाईवे के किनारे के काश्तकारों को बड़ी राहत मिलेगी। नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड का मानक बदलने का प्रस्ताव है। इसमें दायरा घटाया गया है। महायोजना 2031 को स्वीकृति मिली तो हाईवे के मध्य से दोनों तरफ महज 30 मीटर दूरी तक ही ग्रीन लैंड माना जाएगा। इसके बाद काश्तकार अपनी जमीन में निर्माण कर सकते हैं। वर्तमान में महायोजना 2021 के अनुसार ग्रीन लैंड का मानक हाईवे के मध्य से दोनों तरफ 87.5 मीटर है।
बीडीए प्रभावी होने के बाद से हाईवे के किनारे के काश्तकारों की मुसीबत बढ़ गई है। सड़क के मध्य से दोनों तरफ 87.5 मीटर दूरी तक ग्रीन लैंड घोषित होने के कारण निर्माण प्रतिबंधित है। काश्तकार चाहकर भी अपनी जमीन पर निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। बीडीए की ओर से उनका मानचित्र ही नहीं स्वीकृति किया जा रहा है। यह प्रतिबंध गोरखपुर-अयोध्या और लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर शहर से 10 किमी के दायरे में लागू है।
काश्तकारों की इस समस्या को उकेरती हुई रिपोर्ट अमर उजाला ने 12 अगस्त को चले जाइए बीडीए... पता करिए, कहीं आपकी जमीन ग्रीन जोन में तो नहीं शीर्षक से प्रकाशित किया था। शासन ने इसी बीच महायोजना 2031 के प्रस्ताव को आपत्ति के साथ लौटा दिया था। इसके बाद बीडीए ने ग्रीन लैंड के मानक में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया। नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड का मानक सड़क के मध्य से दोनों तरफ 87.5 मीटर के बजाय 30 मीटर कर दिया गया है यानी ग्रीन का दायरा सड़क के दोनों तरफ 50 मीटर तक घटा दिया गया है।
विज्ञापन
यदि महायोजना 2031 को स्वीकृति मिली तो काश्तकार सड़क के मध्य से 30 मीटर छोड़कर अपनी जमीन पर पक्का निर्माण करा सकते हैं। बीडीए इस मानक के अनुसार मानचित्रों को स्वीकृति भी देगा।
खाली पड़ी थीं हाईवे के किनारे की जमीनें
ग्रीन लैंड चिह्नित होने के कारण हाईवे के किनारे की जमीनों में पिछले तीन साल से निर्माण रुका हुआ है। कामर्शियल जमीन होने के कारण काश्तकार खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। उनका मानचित्र न पास होने के चलते आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण के लिए बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था। कुछ काश्तकार अस्थायी निर्माण कर जमीनों का उपभोग कर रहे हैं तो कुछ अपनी जमीनों को खाली छोड़ रखा है।
अक्सर बीडीए और काश्तकारों में होता रहा विवाद
ग्रीन लैंड के चक्कर में काश्तकारों और बीडीए के बीच अक्सर विवाद सामने आता गया। काश्तकार अपनी जमीन में निर्माण कराना चाहते तो बीडीए ग्रीन लैंड का अडंगा खड़ा कर देता था। यदि कोई बिना मानचित्र के निर्माण कराते हुए मिल जाता तो उसे जुर्माना अदा करना पड़ता था। इसको लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। बीडीए अधिकारियों पर रिश्वत मांगने तक के आरोप लगे। बहरहाल नए मास्टर प्लान के लागू हो जाने से यह दुश्वारी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
बीडीए के मानचित्र में ग्रीन जोन का भी विवरण
बीडीए के नए मास्टर प्लान मेंं ग्रीन जोन का संपूर्ण विवरण दर्ज किया गया है। मानचित्र से लेकर बुकलेट तक 151 वर्ग किमी की परिधि में आने वाले ग्रीन जोन में चिह्नित जमीनों का राजस्व अभिलेख के अनुसार गाटा संख्या और रकबा सहित विवरण दर्शाया गया है। मानचित्र में इसका कलर भी अलग रखा गया है। इसमें बंजर, नजूल, चारागाह, पर्ती, गड़ही, ताल, पोखरा, चकमार्ग आदि प्रकृति की जमीनें शामिल की गई है।
महायोजना 2031 के नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड के मानक में परिवर्तन किया गया है। इसका दायरा हाईवे के मध्य से केवल 30 मीटर निर्धारित हुआ है। महायोजना 2031 को स्वीकृति मिलने के बाद ही यह लागू हो पाएगा। फिलहाल अभी महायोजना 2021 के मास्टर प्लान का मानक ही प्रभावी हैं।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए
विज्ञापन
बीडीए प्रभावी होने के बाद से हाईवे के किनारे के काश्तकारों की मुसीबत बढ़ गई है। सड़क के मध्य से दोनों तरफ 87.5 मीटर दूरी तक ग्रीन लैंड घोषित होने के कारण निर्माण प्रतिबंधित है। काश्तकार चाहकर भी अपनी जमीन पर निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। बीडीए की ओर से उनका मानचित्र ही नहीं स्वीकृति किया जा रहा है। यह प्रतिबंध गोरखपुर-अयोध्या और लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर शहर से 10 किमी के दायरे में लागू है।
विज्ञापन
काश्तकारों की इस समस्या को उकेरती हुई रिपोर्ट अमर उजाला ने 12 अगस्त को चले जाइए बीडीए... पता करिए, कहीं आपकी जमीन ग्रीन जोन में तो नहीं शीर्षक से प्रकाशित किया था। शासन ने इसी बीच महायोजना 2031 के प्रस्ताव को आपत्ति के साथ लौटा दिया था। इसके बाद बीडीए ने ग्रीन लैंड के मानक में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया। नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड का मानक सड़क के मध्य से दोनों तरफ 87.5 मीटर के बजाय 30 मीटर कर दिया गया है यानी ग्रीन का दायरा सड़क के दोनों तरफ 50 मीटर तक घटा दिया गया है।
विज्ञापन
यदि महायोजना 2031 को स्वीकृति मिली तो काश्तकार सड़क के मध्य से 30 मीटर छोड़कर अपनी जमीन पर पक्का निर्माण करा सकते हैं। बीडीए इस मानक के अनुसार मानचित्रों को स्वीकृति भी देगा।
खाली पड़ी थीं हाईवे के किनारे की जमीनें
ग्रीन लैंड चिह्नित होने के कारण हाईवे के किनारे की जमीनों में पिछले तीन साल से निर्माण रुका हुआ है। कामर्शियल जमीन होने के कारण काश्तकार खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। उनका मानचित्र न पास होने के चलते आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण के लिए बैंकों से ऋण भी नहीं मिल पा रहा था। कुछ काश्तकार अस्थायी निर्माण कर जमीनों का उपभोग कर रहे हैं तो कुछ अपनी जमीनों को खाली छोड़ रखा है।
अक्सर बीडीए और काश्तकारों में होता रहा विवाद
ग्रीन लैंड के चक्कर में काश्तकारों और बीडीए के बीच अक्सर विवाद सामने आता गया। काश्तकार अपनी जमीन में निर्माण कराना चाहते तो बीडीए ग्रीन लैंड का अडंगा खड़ा कर देता था। यदि कोई बिना मानचित्र के निर्माण कराते हुए मिल जाता तो उसे जुर्माना अदा करना पड़ता था। इसको लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। बीडीए अधिकारियों पर रिश्वत मांगने तक के आरोप लगे। बहरहाल नए मास्टर प्लान के लागू हो जाने से यह दुश्वारी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
बीडीए के मानचित्र में ग्रीन जोन का भी विवरण
बीडीए के नए मास्टर प्लान मेंं ग्रीन जोन का संपूर्ण विवरण दर्ज किया गया है। मानचित्र से लेकर बुकलेट तक 151 वर्ग किमी की परिधि में आने वाले ग्रीन जोन में चिह्नित जमीनों का राजस्व अभिलेख के अनुसार गाटा संख्या और रकबा सहित विवरण दर्शाया गया है। मानचित्र में इसका कलर भी अलग रखा गया है। इसमें बंजर, नजूल, चारागाह, पर्ती, गड़ही, ताल, पोखरा, चकमार्ग आदि प्रकृति की जमीनें शामिल की गई है।
महायोजना 2031 के नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड के मानक में परिवर्तन किया गया है। इसका दायरा हाईवे के मध्य से केवल 30 मीटर निर्धारित हुआ है। महायोजना 2031 को स्वीकृति मिलने के बाद ही यह लागू हो पाएगा। फिलहाल अभी महायोजना 2021 के मास्टर प्लान का मानक ही प्रभावी हैं।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए