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Basti News: शिकायत होते ही बरतने लगे गोपनीयता, चुपगुप में भुगतान का बुन रहे तानाबाना
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बस्ती। स्वास्थ्य विभाग में आजकल सबकुछ गोपनीय हो रहा है। खासकर एनएचएम के अधीन संचालित योजनाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारी-कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट से लेकर भुगतान तक का तानाबाना चुपगुप बुना जा रहा है। एनएचएम के तहत आवंटित बजट और खर्च विभाग का छिपा हुआ राज बन गया है। इससे पर्दा उठाने के लिए शिकायतकर्ता पुराना डाकघर निवासी दीपक मिश्रा भी सुरागरसी में जुटे हैं।
पिछले दिनों एनएचएम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी जिले स्तर से लेकर शासन तक खूब हुई है। स्थानीय विधायक कवींद्र चौधरी ने एनएचएम के कार्य को बिना टेंडर के ही बांट देने का मुद्दा सदन में उठाया था। जिला स्तर पर आयोजित दिशा की बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने विभाग की जबरदस्त घेराबंदी की। इस मामले में डीएम को सीडीओ से जांच कराने का आश्वासन देकर जनप्रतिनिधियों को शांत करना पड़ा था।
इसी के बाद से विभाग में सबकुछ गोपनीयता के साथ होने लगा है। एनएचएम से जुड़े लिपिक, प्रबंधक और अन्य उच्चाधिकारी किसी तरह की जानकारी देने से साफ इन्कार कर दे रहे हैं। शिकायतकर्ता डाकघर निवासी दीपक मिश्रा लगातार बजट खपाने की ताक झाक में लगे हैं। मगर, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। विभाग से जुड़े एक ठेकेदार ने तो यहां तक कह दिया है कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन में घर जैसी गोपनीयता विभाग को खुद संदिग्ध बना रही है।
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उठ चुके हैं यह मामले
पिछले महीने एनएचएम के तहत की गई सेनेट्री पैड की आपूर्ति का मुद्दा जोर शोर उठा था। इस मामले में डीएम से शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जेम पोर्टल पर निविदा आवंटित कर बाहर की फर्म को इसकी आपूर्ति कराई गई। आरोप था कि एक ही शख्स की ओर से कई फर्मों के नाम से सेनेट्री पैड की आपूर्ति के लिए आवेदन किया गया। विभाग ने इसी में से एक फर्म का चुनाव कर कार्य आवंटित कर दिया। जबकि आपूर्ति होने वाले सेनेट्री पैड के नमूने की जांच विधिक रूप से नहीं कराई गई। इसकी गुणवत्ता पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। इस मद में 35 लाख रुपये भुगतान करने का आरोप लगा है। इसी तरह आठ माह पुराने टेंडर पर 50 लाख रुपये के प्रिटिंग कार्य के मद में भी भुगतान किए जाने की शिकायत हुई है। दिशा की बैठक में आवाज उठने के बाद डीएम ने इन प्रकरणों की जांच सीडीओ को सौंपी हैं।
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विद्युतीकरण के टेंडर की भी हुई थी शिकायत
विद्युतीकरण के कार्य के लिए आवंटित हुए टेंडर की शिकायत भी हो चुकी है। आरोप था कि जिस फर्म को निविदा आवंटित हुई है, उसमें हैसियत और चरित्र प्रमाणपत्र अलग-अलग जनपद के लगे हैं। इसकी जांच मुख्य कोषाधिकारी अशोक कुमार प्रजापति को मिली थी। उनके अनुसार, गाइड लाइन के अनुसार निविदा उसी को आवंटित हो सकती है जिसके पास एक ही जिले से निर्गत यह दोनों प्रपत्र हों। उन्होंने बताया कि हैसियत प्रमाणपत्र गोरखपुर जिले से जारी पाया गया है। इसकी वैधता की जांच उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है। इसीलिए फाइल लौटा दी गई है।
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कोट
टुकड़ों में किया गया चश्मा और सर्जिकल सामान के आपूर्ति का आर्डर
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एनएचएम के तहत चश्मा और सर्जिकल सामग्रियों की आपूर्ति का आर्डर भी टुकड़ों में किया गया है। इसके आपूर्ति जिम्मा भी गैर जनपद की फर्मों को दिया गया है। इसके भुगतान की प्रक्रिया भी गोपनीय ढंग से शुरू कर दी गई है।
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कोट
एनएचएम के अधीन संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी साझा नहीं की जा सकती है। भुगतान और बजट से संबंधित कोई भी जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति को देना प्रतिबंधित है। इसीलिए सबकुछ गोपनीय रखा गया है। सभी कार्य नियमों के अनुरूप आवंटित हुए हैं।
डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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पिछले दिनों एनएचएम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी जिले स्तर से लेकर शासन तक खूब हुई है। स्थानीय विधायक कवींद्र चौधरी ने एनएचएम के कार्य को बिना टेंडर के ही बांट देने का मुद्दा सदन में उठाया था। जिला स्तर पर आयोजित दिशा की बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने विभाग की जबरदस्त घेराबंदी की। इस मामले में डीएम को सीडीओ से जांच कराने का आश्वासन देकर जनप्रतिनिधियों को शांत करना पड़ा था।
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इसी के बाद से विभाग में सबकुछ गोपनीयता के साथ होने लगा है। एनएचएम से जुड़े लिपिक, प्रबंधक और अन्य उच्चाधिकारी किसी तरह की जानकारी देने से साफ इन्कार कर दे रहे हैं। शिकायतकर्ता डाकघर निवासी दीपक मिश्रा लगातार बजट खपाने की ताक झाक में लगे हैं। मगर, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। विभाग से जुड़े एक ठेकेदार ने तो यहां तक कह दिया है कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन में घर जैसी गोपनीयता विभाग को खुद संदिग्ध बना रही है।
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उठ चुके हैं यह मामले
पिछले महीने एनएचएम के तहत की गई सेनेट्री पैड की आपूर्ति का मुद्दा जोर शोर उठा था। इस मामले में डीएम से शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जेम पोर्टल पर निविदा आवंटित कर बाहर की फर्म को इसकी आपूर्ति कराई गई। आरोप था कि एक ही शख्स की ओर से कई फर्मों के नाम से सेनेट्री पैड की आपूर्ति के लिए आवेदन किया गया। विभाग ने इसी में से एक फर्म का चुनाव कर कार्य आवंटित कर दिया। जबकि आपूर्ति होने वाले सेनेट्री पैड के नमूने की जांच विधिक रूप से नहीं कराई गई। इसकी गुणवत्ता पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। इस मद में 35 लाख रुपये भुगतान करने का आरोप लगा है। इसी तरह आठ माह पुराने टेंडर पर 50 लाख रुपये के प्रिटिंग कार्य के मद में भी भुगतान किए जाने की शिकायत हुई है। दिशा की बैठक में आवाज उठने के बाद डीएम ने इन प्रकरणों की जांच सीडीओ को सौंपी हैं।
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विद्युतीकरण के टेंडर की भी हुई थी शिकायत
विद्युतीकरण के कार्य के लिए आवंटित हुए टेंडर की शिकायत भी हो चुकी है। आरोप था कि जिस फर्म को निविदा आवंटित हुई है, उसमें हैसियत और चरित्र प्रमाणपत्र अलग-अलग जनपद के लगे हैं। इसकी जांच मुख्य कोषाधिकारी अशोक कुमार प्रजापति को मिली थी। उनके अनुसार, गाइड लाइन के अनुसार निविदा उसी को आवंटित हो सकती है जिसके पास एक ही जिले से निर्गत यह दोनों प्रपत्र हों। उन्होंने बताया कि हैसियत प्रमाणपत्र गोरखपुर जिले से जारी पाया गया है। इसकी वैधता की जांच उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है। इसीलिए फाइल लौटा दी गई है।
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टुकड़ों में किया गया चश्मा और सर्जिकल सामान के आपूर्ति का आर्डर
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एनएचएम के तहत चश्मा और सर्जिकल सामग्रियों की आपूर्ति का आर्डर भी टुकड़ों में किया गया है। इसके आपूर्ति जिम्मा भी गैर जनपद की फर्मों को दिया गया है। इसके भुगतान की प्रक्रिया भी गोपनीय ढंग से शुरू कर दी गई है।
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एनएचएम के अधीन संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी साझा नहीं की जा सकती है। भुगतान और बजट से संबंधित कोई भी जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति को देना प्रतिबंधित है। इसीलिए सबकुछ गोपनीय रखा गया है। सभी कार्य नियमों के अनुरूप आवंटित हुए हैं।
डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ